राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के अध्यक्ष और पूर्व प्रधान न्यायाधीश के. जी. बालकृष्णन के भाई के.जी. भास्करन विशेष सरकारी वकील के नाते अवकाश पर चले गए हैं. कहते हैं, उन पर भ्रष्टाचार के आरोप लगने के बाद उन्हें मेडिकल अवकाश पर जाने के लिए कहा गया.
आरोप है कि केरल हाइकोर्ट में वकालत करते बालकृष्णन के दो दामादों पी.वी. श्रीनिजन और एम.जे. बेन्नी के साथ ही भास्करन ने प्रधान न्यायाधीश के रूप में बालकृष्णन के कार्यकाल के दौरान नई संपत्तियां अर्जित की थीं. राज्य सरकार ने सतर्कता और भ्रष्टाचार निरोधक विभाग को कांग्रेसी नेता श्रीनिजन के खिलाफ जांच करने को कहा है.
जांच का आदेश देने वाले मुख्यमंत्री वी.एस. अच्युतानंदन कहते हैं, ''यह वृहत जांच होगी.'' आरोपों के पीछे बालकृष्णन को साजिश का अंदेशा है और वे कहते हैं कि श्रीनिजन को इन आरोपों के जवाब देने चाहिए.{mospagebreak}
इस मुद्दे पर विपक्षी कांग्रेस की सत्तारूढ़ माकपा से ठन गई है. श्रीनिजन पर लगे आरोपों के आधार पर सबसे पहले सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज वी.आर. कृष्ण अय्यर ने बालकृष्णन का इस्तीफा मांगा, पर बाद में वे पीछे हट गए. वे कहते हैं कि केरल हाइकोर्ट के एक जज ने उनसे कहा था कि बालकृष्णन को पद से हटाने के लिए वे प्रधानमंत्री को पत्र न लिखें.
पहले अय्यर ने कहा था, ''बालकृष्णन पर गंभीर आरोप हैं. प्रधानमंत्री इनकी जांच करवाएं और उनसे इस्तीफा देने के लिए कहें.'' फली एस. नरीमन और शांतिभूषण जैसे न्यायविदों ने भी इसकी जांच की मांग की है.
श्रीनिजन ने 2006 का विधानसभा चुनाव लड़ा था पर हार गए थे. तब उन्होंने अपने पास 25,000 रु. नकद राशि दिखाई थी और कहा था कि उनकी कोई संपत्ति नहीं है. मगर 2009 की उनकी आयकर विवरणी बताती है कि उनके पास 35 लाख रु. की संपत्ति है और उनकी पत्नी सोनी की संपत्ति तीन लाख रु. से बढ़कर 15 लाख रु. हो गई है.{mospagebreak}
नदी तट पर स्थित एक करोड़ रु. मूल्य की 2.5 एकड़ की एक संपत्ति महज 14 लाख रु. की बताई गई थी. बालकृष्णन के अन्य दामाद बेन्नी ने एक करोड़ रु. से अधिक की 5 संपत्ति खरीदीं जबकि उनकी सालाना आय करीब पांच लाख रु. है. भास्करन पर तमिलनाडु में अपनी आय से अधिक कीमत की जमीन खरीदने के आरोप हैं.
मई 2010 में दिल्ली के एक स्वतंत्र पत्रकार एम. फुरकान ने उपराष्ट्रपति से शिकायत कर श्रीनिजन पर कुछ खास कॉरपोरेट घरानों के पक्ष में न्यायिक व्यवस्था को प्रभावित करने के प्रयास का आरोप लगाया था. इसमें अंबानी परिवार के विवाद से संबंधित मामलों और कर्नाटक के खदान मालिक रेड्डी बंधुओं से संबंधित मामलों में बालकृष्णन के फैसलों का भी हवाला दिया गया था.
उपराष्ट्रपति कार्यालय ने सीबीआइ को इन आरोपों की जांच के निर्देश दिए थे. युवक कांग्रेस और माकपा की युवा शाखा डीवाइएफआइ ने भी श्रीनिजन की संपत्ति की जांच की मांग की है. जस्टिस अय्यर ने जजों की नियुक्ति और उनके कामकाज के आकलन के लिए एक आयोग के गठन का सुझाव दिया है. {mospagebreak}उन्होंने कहा, ''इससे पहले कभी भारतीय न्यायपालिका को ऐसे गंभीर आरोपों का सामना नहीं करना पड़ा.''
वामपंथियों के सुर मद्धिम पड़ गए हैं, क्योंकि बालकृष्णन माकपा के राज्य सचिव पिनरै विजयन के करीबी हैं. फुरकान की याचिका के मुताबिक, बालकृष्णन ने 1999 के एसएनसी घोटाले के 9वें आरोपी विजयन को, जो तब ऊर्जा मंत्री थे, राहत पहुंचाने के लिए अनावश्यक जल्दबाजी दिखाई थी.
अच्युतानंदन के इस मामले की सीबीआइ जांच का आदेश देने के पीछे वजह है कि वे और विजयन एक-दूसरे को फूटी आंख नहीं सुहाते. केरल प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष रमेश चेन्निथला की सरपरस्ती में कांग्रेस के एक धड़े का आरोप है कि श्रीनिजन उनके विरोधी गुट का समर्थन करते हैं.
2006 में चुनाव हारने के बावजूद श्रीनिजन को केरल युवक कांग्रेस का उपाध्यक्ष बनाया गया था. श्रीनिजन भले ही कह रहे हों कि वे किसी भी जांच का सामना करने को तैयार हैं, पर बालकृष्णन के लिए आने वाले दिन शुभ नहीं हैं.

