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न्‍यायाधीश गांगुली रिटायरमेंट से पहले दे सकते हैं फैसला

सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस गांगुली सेवानिवृत्त हो रहे हैं 2 फरवरी को. आला हाकिमों के खिलाफ उस रोज सख्त फैसले आने का अंदेशा है.

जस्टिस गांगुली
जस्टिस गांगुली
अपडेटेड 30 जनवरी , 2012

उनके लिए 2 फरवरी फैसले का दिन हो सकता है. गृह मंत्री पी. चिदंबरम को उस रोज इस्तीफा देना पड़ सकता है. 2जी स्पेक्ट्रम आवंटन मामले की सुनवाई कर  रहे दो न्यायाधीशों में एक जस्टिस अशोक कुमार गांगुली उस दिन सेवानिवृत्त होने को हैं, इसलिए 2जी स्पेक्ट्रम की कीमतें तय करने में चिदंबरम की कथित भूमिका पर उसी दिन फैसला आना तय है. मामले की सुनवाई पूरी हो चुकी है, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने अक्तूबर, 2011 में फैसला सुरक्षित रख लिया था. अब जस्टिस गांगुली की सेवानिवृत्ति की तारीख नजदीक होने से न्यायिक कार्रवाई तेज हो गई है. अगर चिदंबरम दोषी पाए जाते हैं, तो वे गृह मंत्री के पद पर नहीं रह सकेंगे.

यह अकेला मामला नहीं है जिससे यूपीए-2 को झटका लग सकता है. 2जी के कम-से-कम चार बड़े मामलों पर 2 फरवरी को फैसला होना है. इन मामलों में सरकार और उद्योग के बड़े अधिकारी शामिल हैं. टेलीकॉम उद्योग की 2008 में जारी सभी 121 टेलीकॉम लाइसेंस रद्द कर दिए जाने संबंधी मामले पर नजर है. ये लाइसेंस पूर्व दूरसंचार मंत्री ए. राजा ने जारी किए थे.

राजा पर स्पेक्ट्रम को औने-पौने दाम पर बेच देने और सरकार को भारी आर्थिक नुकसान पहुंचाने का आरोप है. दूसरा मामला कानून मंत्रालय और प्रधानमंत्री कार्यालय से संबंधित है. इस मामले में सरकारी अधिकारियों पर मुकदमा चलाने के लिए मंजूरी देने के दिशा-निर्देश शायद तय हो जाएंगे. 2जी मामलों पर दिन प्रतिदिन निगरानी रखने के लिए विशेष जांच दल के गठन से संबंधित मामले के नतीजे का भी इंतजार किया जा रहा है.

जस्टिस जी.एस. सिंघवी के साथ जस्टिस गांगुली ने मुख्य न्यायाधीश एस.एच. कपाड़िया के कोर्ट को मौखिक फायरिंग स्क्वाड में तब्दील कर दिया था. अक्तूबर, 2010 से लेकर 15 महीने तक 2जी स्पेक्ट्रम आवंटन घोटाले की सुनवाई करने वाली सुप्रीम कोर्ट पीठ के सदस्य के रूप में दोनों न्यायाधीशों ने राष्ट्र के प्रभावशाली और रसूखदार लोगों को भी नहीं बख्शा और जांच एजेंसियों को लताड़ लगाई. यही नहीं, उन्होंने शासन की शर्मनाक खामियां भी उजागर कीं.

हालांकि यह बात बार-बार उठती रही कि ''न्यायपालिका नियंत्रण से बाहर हो गई है'' या ''अपनी सीमाओं का अतिक्रमण कर रही है,'' इसके बावजूद दोनों न्यायाधीशों ने लोगों की सोच के मुताबिक सार्वजनिक जीवन में बेईमानी, भ्रष्टाचार, चरित्रहीनता और लालच की भर्त्सना की.

इस तरह के ट्रैक रिकॉर्ड को देखते हुए कोर्ट के अंदरूनी सूत्रों का कहना है कि जस्टिस गांगुली सेवानिवृत्त होने से पहले अपना फैसला सुना देंगे. इसके अलावा, मुख्य न्यायाधीश सख्त नियम लागू करते हुए अपने काम में तेजी भी ला रहे हैं. सूत्र कहते हैं, ''मुख्य न्यायाधीश इन दिनों लंबित मामलों की सूची रिटायर होने वाले जजों के पास महीनों पहले भेज देते हैं.

जस्टिस गांगुली का रिकॉर्ड रहा है कि वे मामलों को लंबित नहीं रखते.'' सूत्रों के मुताबिक, सुप्रीम कोर्ट के जज प्रायः अपने कार्यकाल के अंतिम दिन कई फैसले सुनाते हैं. ''अगर किसी पीठ का एक जज फैसला नहीं सुनाता है और अन्य जज फैसला सुनाते हैं तो भी वह अपने चैंबर में उन पर दस्तखत कर सकता है. 2जी मामले में भी ऐसा हो सकता है जिसकी सुनवाई करने वाली पीठ में जस्टिस गांगुली के साथ जस्टिस सिंघवी थे.''

जस्टिस गांगुली उन विरले न्यायाधीशों में शुमार हैं जो बड़ी होशियारी से अपने शब्द चुनते हैं और सटीक टिप्पणी करते हुए फैसला सुनाते हैं. उन्होंने पिछले साल मई में 2जी घोटाले के आकार पर अपनी टिप्पणी में कहा था, ''स्कूल के गणित को छोड़कर इतने जीरो मैंने कभी नहीं देखे.'' इसी तरह, अक्तूबर, 2010 में उन्होंने सीबीआइ से पूछा था कि वह मामले की जांच में और कितना समय लेगी, ''दस साल और?''

नवंबर में उन्होंने प्रधानमंत्री की ''निष्क्रियता और चुप्पी'' पर पूछा था और अगस्त में भ्रष्टाचार निवारक कानून को ''भ्रष्टाचार संरक्षक कानून'' कहा था. केंद्र ने कहा था कि सुप्रीम कोर्ट को 2जी मामले की जांच की निगरानी करके लक्ष्मण रेखा नहीं लांघनी चाहिए. सितंबर, 2011 में गांगुली ने कहा कि यह सामान्य आपराधिक मामला नहीं है. फिर उन्होंने कड़ी टिप्पणी की, ''यदि रामायण में सीता ने लक्ष्मण रेखा पार नहीं की होती तो रावण मारा नहीं जाता. लक्ष्मण रेखा एक सीमा तक ही कारगर है.'' जस्टिस गांगुली 2 फरवरी को सुप्रीम कोर्ट की लक्ष्मण रेखा पार करेंगे. देखना यह है कि उस दिन उनके इर्दगिर्द कितने रावण ढेर होते हैं. -

जस्टिस गांगुली के रिटायरमेंट को देखते हुए 2जी मामले की कार्रवाई में तेजी आ गई है. यदि चिदंबरम 2 फरवरी को दोषी पाए जाते हैं तो उन्हें गृह मंत्री पद से इस्तीफा देना पड़ेगा.

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