अल्मोड़ा जैसे विषम भौगोलिक परिस्थिति वाले सीमांत जिले में किसी लड़की के लिए क्रिकेट खिलाड़ी बनने के बारे में सोचना आसान नहीं है. लेकिन अल्मोड़ा जिले के देवली गांव के खजांची मुहल्ले में रहने वाली 25 साल की एकता बिष्ट ने न केवल यह सपना देखा बल्कि इसे पूरा कर राष्ट्रीय स्तर पर प्रदेश का नाम ऊंचा कर दिया. एकता अंतरराष्ट्रीय महिला क्रिकेट खेलने वाली उत्तराखंड राज्य की पहली महिला खिलाड़ी बन चुकी हैं.
बीसीसीआइ ने उत्तराखंड में किसी भी क्रिकेट संघ को मान्यता नहीं दी है इसलिए यहां के क्रिकेट खिलाड़ियों को अन्य राज्यों की टीमों में जगह बनानी पड़ती है. एकता को भी भारतीय टीम में जगह बनाने के लिए इसी संघर्ष का सामना करना पड़ा. लेकिन कठिन मेहनत और पक्के इरादे के बल पर पहाड़ की इस बेटी ने दिखा दिया है कि नामुमकिन शब्द उसके लिए कोई मायने नहीं रखते हैं. सेना में सूबेदार पद से सेवानिवृत्त हुए एकता के पिता कुंदन सिंह बिष्ट और मां तारा बिष्ट का एकता ने गर्व से सिर ऊंचा कर दिया है.
स्कूल से ही क्रिकेट खेलना शुरू कर चुकी एकता भारतीय टीम में जगह बनाने से पहले नॉर्थ जोन, इंडिया प्रेसिडेंट इलेवन के साथ ही 2006-07 से उत्तर प्रदेश महिला क्रिकेट टीम की सदस्य हैं. इसी साल जून-जुलाई में इंग्लैंड में आयोजित चार देशों की महिला क्रिकेट श्रृंखला के लिए पहली बार एकता का चयन अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट के लिए हुआ है. इस श्रृंखला में एकता ने जो जोरदार प्रदर्शन किया है उसे देखते हुए उन्हें भारतीय महिला क्रिकेट टीम में लंबी रेस का घोड़ा माना जा रहा है.
बाएं हाथ की लैगस्पीनर और खब्बू बल्लेबाज एकता ने अब तक खेले कुल तीन मैचों में 5 विकेट हासिल किए हैं. यही नहीं, 28 ओवरों में से उन्होंने 6 ओवर में एक भी रन नहीं दिया और 2.92 की किफायती दर से कव्वल 82 रन खर्च किए. न्यूजीलैंड के खिलाफ 15 रन देकर तीन विकेट हासिल करने वाली एकता को मैन ऑफ दी मैच भी चुना गया था. उन्होंने अब तक केवल एक ही ट्वेंटी 20 मैच खेला है. एकता ने घरेलू क्रिकेट का सफर 2006-07 में उत्तर प्रदेश महिला टीम में जगह बनाने के साथ शुरू किया था और पहले क्रिकेट सीजन में ही वह अपनी छाप छोड़ने में कामयाब रही थीं.
अंतरराष्ट्रीय श्रृंखला खेलकर लौटी एकता का अल्मोड़ा में जोरदार स्वागत हुआ. अल्मोड़ा में एकता के कोच रहे लियाकत अली कहते हैं कि क्रिकेट के प्रति उसके जुनून का उदाहरण इससे अच्छा और क्या होगा कि खजांची मोहल्ला स्थित अपने घर से तीन किमी दूर स्टेडियम आने वाली अकेली लड़की होने के बावजूद वह कभी भी आना टालती नहीं थी. एकता की मां तारा बिष्ट बताती हैं कि एकता तीन साल की उम्र से ही क्रिकेट खेलती आ रही है.
एकता के लिए इंग्लैंड दौरा कई मायनों में खास रहा. पहला तो, इसी दौरे से उनका अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट कॅरियर शुरू हुआ और दूसरा, इसी दौरे के दौरान उन्हें रेलवे में नौकरी मिलने की खुशखबरी भी मिली. एकता को खिलाड़ी कोटे से हेड क्लर्क बनाया गया है. लेकिन आगरा में नियुक्ति मिलने के कारण उन्होंने अभी ज्वाइन नहीं किया है. दरअसल एकता ने रेलवे में आवेदन भेज आग्रह किया है कि उन्हें आगरा की जगह कानपुर में नियुक्ति दी जाए ताकि वे अपना अभ्यास जारी रख सकें.
भावी योजनाओं के बारे में एकता कहती हैं कि वे अगले साल होने वाले महिला विश्वकप में टीम का प्रतिनिधित्व कर जीत भारत के नाम करना चाहती हैं.
एकता बिष्ट के साथ बातचीत:
अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में आने वाली उत्तराखंड की पहली लड़की बनने पर कैसा लग रहा है?
भारतीय टीम में खेलना मेरा सपना रहा है जो इंग्लैंड दौरे के साथ पूरा हो गया. अब इस सपने को जीना है और आगे बढ़ाना है.
बचपन में कभी क्रिकेट खिलाड़ी बनने का सोचा था?
क्रिकेट खेलने का शौक बचपन से ही था. लेकिन सही मायने में क्रिकेट की शुरुआत 2001 से हुई. मैं 11वीं क्लास में थी तभी लियाकत सर से मुलाकात हुई जिन्होंने मुझे क्रिकेट खेलने के लिए प्रेरित किया.
इंग्लैंड में खेलने का अनुभव कैसा रहा?
बहुत कुछ सीखने को मिला. एक मैच में मैं मैन ऑफ द मैच भी रही.
उत्तराखंड में महिला क्रिकेटरों के लिए कितनी संभावनाएं हैं?
संभावनाएं असीम हैं, जरूरत है तो राज्य के क्रिकेट संघ को बीसीसीआइ से मान्यता मिलने की.

