भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आइसीएआर) ने कोविड-19 के बढ़ते प्रकोप को ध्यान में रखते हुए रबी फसलों की कटाई, मड़ाई और फसल कटाई के बाद कृषि उपज के भंडारण और उसकी खरीद-बिक्री के लिए कुछ मशविरे दिए हैं. आइसीएआर ने किसानों से कहा है कि वे फसलों की कटाई-मंड़ाई में अधिक से अधिक मशीनों का इस्तेमाल करने की कोशिश करें और हाथ का इस्तेमाल करना ही पड़े तो पर्याप्त सावधानी बरतें.
असल में, देश में यह फसलें पकने का का मौसम है. इन फसलों की कटाई और उन्हें बाजार तक पहुंचाने का काम भी होना है. यह समय खेती-बाड़ी के लिहाज से बहुत अहम है. इसलिए किसानों को इन सब कामों में सावधानी बरतने की जरूरत है. आइसीएआर ने किसानों से कोरोना से बचने वाले साफ-सफाई के बुनियादी नियमों का पालन करने को कहा है.
आइसीएआर ने उत्तर भारत में गेहूं के पकने और कटाई के लिहाज से किसानों को कुछ सलाहें दी हैं. परिषद के मुताबिक, गेहूं की कटाई के लिए कंबाइन कटाई मशीन की आवा-जाही के लिए सरकार ने आदेश दिए हैं पर इनमें काम में लगे मजदूरों की सुरक्षा का ध्यान रखा जाना चाहिए. परिषद की सलाह है कि सरसों की फसल की कटाई और मड़ाई हाथ से की जाती है. साथ ही मसूर, मक्का और मिर्ची जैसे फसलें भी तोड़ी जा रही हैं. कुछ इलाकों में गन्ने की कटाई और हाथ से रोपाई भी चल रही है. आइसीएआर ने मछली पालन से लेकर तमाम कामों में लगे मजदूरों के बीच सामाजिक दूरी को बनाए रखने के लिये कहा है.
परिषद के मुताबिक, फसलों की हाथ से कटाई/तुड़ाई के दौरान बेहतर होगा कि 4-5 फीट की पट्टियों में काम किया जाए और एक पट्टी की दूरी में एक ही मजदूर को काम करने के लिए लगाया जाए. सभी मजदूरों के लिए मास्क लगाना और बीच-बीच में हाथ को साबुन से धोते रहने की भी सलाह दी गई है.
परिषद की सलाह है कि एक ही दिन अधिक मजदूरों को काम पर लगाने की बजाए उस काम को शिफ्ट में बांटकर करना चाहिए और जितना मुमकिन हो, परिचित व्यक्ति को ही खेतों के कार्य में लगाना चाहिए. परिषद ने यह भी कहा कि जितना मुमकिन हो पाए, खेती का कामकाज मशीनों और उपकरणों से किया जाए, हाथ से नहीं. और सिर्फ कुशल व्यक्ति को ही मशीन चलाने दिया जाए.
आइसीएआर की सलाह है कि खलिहानों में तैयार पैदावार को छोटे-छोटे ढेरों में इकट्ठा करना चाहिए जिनकी आपस में दूरी 3-4 फीट हो. इसके साथ ही प्रत्येक ढेर पर 1-2 व्यक्ति को ही काम पर लगाना चाहिए और भीड़ इकट्ठी नहीं होने देना चाहिए.
कटाई किए गए मक्के और खोदी हुई मूंगफली की मड़ाई के लिए लगाई गई मशीनों की उचित साफ-सफाई और स्वच्छता (सैनिटाइज) करना भी बहुत जरूरी है. खासकर यदि इन मशीनों को दूसरे किसान भी उपयोग करने वाले हों तो यह करना बहुत जरूर है, इन मशीनों के पुर्जों को बार-बार छूने पर साबुन से हाथ धोना चाहिए.
फसल कटाई के बाद कृषि उपज का भंडारण और खरीद-बिक्री
आइसीएआर ने कहा है कि खलिहान में चलने वाले कुछ खास कामों, मसलन, मड़ाई, सफाई, सुखाई, छंटाई, ग्रेडिंग और पैकेजिंग के दौरान किसानों/मजदूरों को चेहरे पर मास्क जरूर लगाना चाहिए, ताकि वायु-कण और धूल-कण से बचा जा सके और सांस से संबंधित तकलीफों से दूर रहा जा सके. तैयार अनाजों, मोटे अनाजों तथा दालों को भंडारण के पहले पर्याप्त सुखा लें और जूट की पुरानी बोरियों का उपयोग भंडारण के लिए नहीं करना चाहिए. नई बोरियों को नीम के 5 फीसद घोल में उपचारित कर और सुखा कर ही अनाजों का भंडारण करना चाहिए.
कोल्ड स्टोरेज, सरकारी गोदामों और अन्य गोदामों द्वारा आपूर्ति की गई जूट की बोरियों का उपयोग अनाज भंडारण के लिए करने से पहले काफी सतर्कता बरतनी जरूरी है.
बीज उत्पादक किसानों को अपने बीजों को लेकर बीज कंपनियों तक ढुलाई करने की इजाजत है, बशर्ते उन किसानों के पास संबंधित दस्तावेज हों. बीज प्रसंस्करण एवं पैकेजिंग, संयंत्रों द्वारा बीजों की आवाजाही बीज उत्पादक प्रांतों से फसल उत्पादक प्रांतों तक जरूरी है, ताकि गुणवत्तापूर्ण बीजों की उपलब्धता आगामी खरीफ सीजन के लिए सुनिश्चित की जा सके (दक्षिण भारत से उत्तर भारत तक). मिसाल के लिए, अप्रैल के महीने में उत्तर भारत में हरे चारे की खेती के लिए बीज की आपूर्ति दक्षिण भारत के सूबों से होती है. इनके अलावा, किसानों द्वारा उनके खलिहानों पर तैयार टमाटर, फूल गोभी, हरी पत्तेदार सब्जियां, खीरा तथा लौकी श्रेणी की अन्य सब्जियों के बीज की सीधी खरीद-बिक्री में किसानों को विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है.
खेतों में खड़ी फसलों का क्या होगा
इस बार ज्यादातर गेहूं उत्पादक राज्यों में औसत तापमान पिछले कई सालों की तुलना में औसत से कम है, इसलिए गेहूं की कटाई कम-से-कम 10-15 दिन आगे बढ़ने की संभावना है. ऐसे में किसान यदि 20 अप्रैल तक भी गेहूं की कटाई करें तो भी उन्हें कोई आर्थिक नुकसान नहीं होगा. इस प्रकार गेहूं की खरीदारी राज्य सरकारों और अन्य एजेंसियां आसानी से कर पाएंगी.
दक्षिण भारत के राज्यों में शीतकालीन (रबी) धान की फसल के दाने पुष्ट होने की अवस्था में हैं और नेक ब्लास्ट रोग से प्रभावित हैं. इसलिए परिषद ने किसानों को सलाह दी है कि वे संबंधित रोगनाशक रसायन का छिड़काव सावधानीपूर्वक करें. इन्हीं राज्यों में धान की कटाई की अवस्था में यदि बेमौसम बारिश हो जाए तो किसानों को 5 प्रतिशत लवण के घोल का छिड़काव फसल पर करना चाहिए, ताकि बीज अकुंरण को रोका जा सके.
बागानी फसलें, खासकर, आम के पेड़ पर इस समय फल बनने की अवस्था है. आम के बागों में पोषक तत्वों के छिड़काव और फसलों की सुरक्षा के उपायों के दौरान भी मशीनों-उपकरणों को अच्छे से सैनिटाइज किया जाना जरूरी है.
ध्यान रहे कि कोरोना प्रकोप की वजह से किए गए लॉकडाउन के दौरान कुछ खेती-बाड़ी से जुड़ी कुछ कामकाज में छूट दी गयी हैः
-पशु चिकित्सा अस्पताल
-एमएसपी परिचालनों सहित कृषि उत्पादों की खरीद के लिए जिम्मेदार निकाय
-कृषि उपज मंडियां
-किसानों और खेत मजदूरों का खेती का काम
-फार्म मशीनरी से संबंधित कस्टम हायरिंग सेंटर (सीएचसी)
-उर्वरक, कीटनाशक और बीज के विकास और पैकेजिंग में कार्यरत इकाइयां
-कम्बाइन हार्वेस्टर और कृषि/बागवानी उपकरणों की कटाई और बुवाई से संबंधित मशीनों की दो या अधिक राज्यों में आवाजाही
***

