लॉकडाउन का दूसरा चरण 15 अप्रैल को शुरू होते ही मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने आयुष विभाग के अधिकारियों के साथ मीटिंग में एक खास तरह का मोबाइल ऐप तैयार करने की मंशा जाहिर की थी. इस समय तक ‘इम्युनिटी बूस्टिंग’ पर काफी जोर दिया जा रहा था लेकिन इससे जुड़ी जरूरी जानकारियां एक प्लेटफार्म पर मौजूद हों, इसके लिए बहुत प्रभावी व्यवस्था नहीं थी. केंद्रीय आयुष मंत्रालय जो जानकारियां डिजिटल फार्म में मुहैया करा रहा था वह बेहद सामान्य प्रकार की थीं और लोगों में पॉपुलर भी हो चुकी थीं.
मुख्यमंत्री से निर्देश मिलने के बाद आयुष विभाग के प्रमुख सचिव प्रशांत त्रिवेदी ने आयुष मिशन के मिशन निदेशक राजकमल यादव को एक अनोखा मोबाइल ऐप तैयार करने का जिम्मा सौंपा. राजकमल तुरंत अपने काम पर लग गए. मिशन निदेशक कार्यालय में तैनात प्रबंधक अरविंद शर्मा, आयुर्वेद विभाग के एक्सपर्ट को लेकर एक टीम बनाई गई. ऐप के निर्माण में टेक्निकल सपोर्ट देने के लिए आठ जानकार लोग आउटसोर्स किए गए. इसके बाद युद्ध स्तर पर काम शुरू हो गया.
पहले इस बात की जानकारी जुटाई गई कि ऐसी कौन-कौन सी आयुर्वेदिक चीजें हैं जो आसानी से घर में या फिर किचेन गार्डन में मौजूद हैं, या फिर गांव के परिवेश में दिखने वाली जैसे नीम, बेल, शहजन या गिलोए पर फोकस किया गया. मंशा यह थी कि तैयार होने वाले आयुष विभाग के मोबाइल ऐप में कोई ऐसी बात न बताई जाए जिसके लिए किसी व्यक्ति को कही दूर चलकर जाना पड़े या फिर बाजार से खरीद कर लाना पड़े.
राजकमल ने बनने वाले मोबाइल ऐप से दी जाने वाली संभावित जानकारियों को पांच स्तर पर बांटा. पहला, ऐसी प्राकृतिक संपदा थी जो पूरे प्रदेश में समान रूप से उपलब्ध हैं जैसे नीम आदि, इसके बाद क्षेत्रवार जैसे बुंदेलखंड, पूर्वी, पश्चिमी और मध्य उत्तर प्रदेश में मिलने वाली आयुर्वेदिक गुणों वाली वनस्पितियों का अलग-अलग वर्गीकरण किया गया. इन वनस्पतियों की जानकारी देता हुआ आसान भाषा में हिंदी और अंग्रेजी में ‘मटेरियल’ तैयार किया गया. इसके लिए आयुर्वेद निदेशालय के विशेषज्ञ और संबंधित जिले के जिला आयुष अधिकारियों की मदद ली गई. चूंकि लॉकडाउन चल रहा था और घर में बैठे-बैठे लोगों को काफी शारीरिक और मानसिक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा था. इसलिए आयुष विभाग के संभावित मोबाइल ऐप में योग को भी एक प्रमुख बिंदु के रूप में शामिल किया गया. इसमें प्रचलित और परंपरागत आसन की जानकारी देने की बजाय लक्षणों के अनुसार प्रभावी योग और आसन को शामिल किया गया. मसलन नींद नहीं आ रही है तो कौन सा आसन करें, दिमागी तनाव में कौन-कौन से सुकून देने वाले योग किए जा सकते हैं, ऐसे कई बिंदुओं पर जानकारी जुटाई गई.
इसके अलावा एक योग का जनरल प्रोटोकाल भी तैयार किया गया कि सुबह के वक्त कौन-कौन सी क्रियाएं करनी चाहिए, शाम के वक्त कौन सी और रात के वक्त कौन सी. इसके साथ मोबाइल ऐप में सुबह आठ बजे से एक्सपर्ट का मुफ्त लाइव सेशन कराने की व्यवस्था भी की गई. एक वीडियो गैलरी भी बनाई गई जिसमें आसान और प्रचलित आसनों के क्वालिटी वीडियो को रखा गया ताकि कोई भी व्यक्ति इसे आसानी से देखकर सीख सके.
मोबाइल ऐप के फीचर्स पर मंथन चल रहा था तभी प्रमुख सचिव प्रशांत त्रिवेदी ने राजकमल को राय दी कि इस ऐप को सरकारी कंट्रोल रूम से भी जोड़ दिया जाए. इस समय आपदा प्रबंधन का कंट्रोलरूम 1070, सीएम हेल्पलाइन 1076 और एक स्वास्थ्य विभाग का टोलफ्री नंबर चल रहा था. यह तय हुआ कि इन सभी नंबरों को एक साथ एक प्लेटफार्म पर रखा जाए और 'इन ऐप कनेक्टिविटी' दी जाए. यानी मोबाइल ऐप से ही सीधे कंट्रोलरूम को डायल किया जा सके. इसके साथ मोबाइल ऐप में सभी जिलों के कंट्रोलरूम के नंबर भी जोड़ दिए गए. इसके अलावा इस मोबाइल ऐप में प्राचीन लाइफ स्टाइल को मार्डन लाइफ स्टाइल के साथ ‘फ्यूजन’ करके एक व्यवहारिक ‘हेल्दी लाइफ स्टाइल’ का सेशन तैयार किया.
किस समय पर क्या करना चाहिए? कब क्या खाना चाहिए? कितना खाना चाहिए? सोने से पहले कितना खाना चाहिए? यह सभी जानकारियां लोगों को पहले भी मिल रही थीं लेकिन उन्हें यह नहीं पता था कि इसे किसने तैयार किया है. मोबाइल ऐप के लिए आयुर्वेद निदेशालय के विशेषज्ञों ने ऐसे सारे नियम तैयार किए. मोबाइल ऐप के लिए जब सारी जानकारियां जुटा ली गईं तो राजकमल को लगा कि इसमें लोगों को कई तरह की जिज्ञासाएं भी होंगी क्योंकि ऐप में ‘टेक्सट’ और ‘विजुअल’ तरीके से दी गई जानकारियों की एक शब्द सीमा और समय सीमा है. इसके बाद मोबाइल ऐप में “आस्क अवर एक्सपर्ट” की सुविधा जोड़ी गई. वर्तमान में इस पैनल में आयुर्वेद मेडिकल कालेज के वरिष्ठ प्रोफेसर, रीडर, डाक्टर समेत 30 विशेषज्ञ शामिल हैं. इनको हर तरह की सूचनाएं देने के लिए स्वतंत्र किया गया. अबतक यह पैनल मोबाइल ऐप के जरिए “मेरा पास कैसे बनेगा” से लेकर “लॉकडाउन में नींद नहीं आ रही है” जैसी आईं दस हजार कॉल का जवाब दे चुका है.
दस दिन के भीतर ऐप तैयार हो गया. उसकी कई स्तरों पर पड़ताल हुई. यह जांचा गया कि मोबाइल ऐप कितना ‘यूजर्स फ्रेंडली’ है? जब सारे स्तरों पर मोबाइल ऐप ‘एफीशियंट’ साबित होने लगा तब 5 मई को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इसे जनता के लिए लॉन्च किया. इस मोबाइल ऐप को ‘आयुष कवच कोविड” नाम दिया गया. लांच होते ही यह ऐप लोगों को भाने लगा. अब तक प्रदेश के साढ़े सात लाख लोग इस मोबाइल ऐप को डाउनलोड कर चुके हैं. इस मोबाइल ऐप में बिजनेस इंटीग्रेशन के जरिए तीन व्हाट्सऐप नंबर भी दिए हैं जिनमें मैसेज करके लोग अपने सुझाव दे सकते हैं. मोबाइल ऐप के लांच के बाद इसमें 'सोशल इंटीग्रेशन' का नया फीचर जोड़ा गया है. इसमें यूपी में कोरोना संक्रमण रोकने के लिए की गई मुख्यमंत्री की घोषणाओं, क्या-क्या सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं, क्या अच्छे कार्य किए गए हैं, इन सबकी स्लाइड उपलब्ध कराई गई है.
फिरोजाबाद के शिकोहाबाद इलाके के रहने वाले राजकमल की शुरुआती शिक्षा लखनऊ के सैनिक स्कूल में हुई. इसके बाद इन्होंने चेन्नै से वेटनरी साइंस में ग्रेजुएशन किया. इसी दौरान इन्होंने सिविल सेवा की भी तैयारी शुरू कर दी. ग्रेजुएशन खत्म होते ही वर्ष 2013 में पहले प्रयास में इनका भारतीय सिविल सेवा में चयन हो गया. नवंबर 2015 में राजकमल की पहली पोस्टिंग लखनऊ में ज्वाइंट मजिस्ट्रेट के रूप में हुई. इस दौरान ये लखनऊ में मलिहाबाद, बख्शी का तालाब और सदर में एसडीएम रहे.
लखनऊ में एसडीएम सदर रहने के दौरान राजकमल ने सरकारी जमीनों को अतिक्रमण से मुक्त कराने का अभियान चलाया. लखनऊ में बड़ी संख्या में ‘अनक्लेम्ड’ शत्रु संपत्तियों को सरकारी डाटाबेस में दर्ज कराया. तहसील को आइएसओ सर्टिफिकेशन दिलाने की कार्रवाई राजकमल के समय में ही शुरू हुई. बाद में सदर तहसील को आइएसओ सर्टिफिकेट मिला. लखनऊ में गोमतीनगर में सदर तहसील के नए बनने वाले भवन को लेकर हो रहे विरोध के शांत करने में राजकमल की बड़ी भूमिका थी. मई, 2017 में यह सीडीओ प्रतापगढ़ के पद पर तैनात हुए. पिछले वर्ष सितंबर में राजकमल आयुष विभाग में विशेष सचिव और इसके बाद आयुष मिशन में मिशन निदेशक के पद पर तैनात हुए.
मार्च में लॉकडाउन के लागू होते ही आयुष विभाग के प्रमुख सचिव प्रशांत त्रिवेदी ने राजकमल को एक और जिम्मेदारी सौंपी. यह थी आयुष विभाग की मैनपावर को कोरोना संक्रमण की रोकथाम में सेकेंड लाइन सपोर्ट के रूप में तैयार करना. इसके बाद राजकमल ने जब विभाग की स्टडी कराई तो पता चला कि प्रदेश में 69 आयुष के मेडिकल कालेजों, सरकारी अस्पतालों में बड़ी संख्या में ऐक्टिव डॉक्टर, मेडिकल सुपरिटेंडेंट, नर्स, फार्मासिस्ट, वार्ड ब्वाय का एक पूरा तंत्र मौजूद था. राजकमल ने इनको प्रशिक्षित करने के लिए 'इंफेक्शन कंट्रोल अगेंस्ट कोरोना', 'मेंटल हेल्थ मैनेजमेंट', 'सर्विलांस मैनेजमेंट' और 'क्वारंटीन मैनेजमेंट फैसिलिटीज' का ट्रेनिंग मॉड्यूल तैयार कराया. आयुष विभाग के मैन पावर की इन ट्रेनिंग प्रोटोकाल का प्रशिक्षण दिलाया गया. इस तरह 20 हजार लोग कोरोना नियंत्रण में अपनी सेवाएं देने को तैयार हो गए. आज प्रदेश में सर्विलांस और स्क्रीनिंग में लगे ज्यादातर लोग आयुष विभाग के हैं. प्रदेश में आयुष मेडिकल कॉलेज के पास काफी बेड भी मौजूद थे. आयुष विभाग ने पांच हजार बेड भी स्वास्थ्य विभाग को मुहैया कराए. अलीगढ़ और प्रयागराज में आयुष मेडिकल कालेज में कोविड एल-1 हॉस्पिटल बनाया गया.
कोरोना के खिलाफ जंग में आयुष को हथियार बनाने वाले राजकमल के पिता पिछले वर्ष बैंक मैनेजर के पद से रिटायर हुए हैं. पिता के जरिए ही इन्हें क्वाइन कलेक्शन का शौक लगा. आज इनके पास डेढ़ हजार से अधिक दुर्लभ सिक्के हैं और आजकल राजकमल दुर्लभ जड़ी-बूटियों से कोविड नियंत्रण की राह तैयार कर रहे हैं.
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