समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष मुलायम सिंह यादव (नेताजी)कार्यकर्ताओं से अगले लोकसभा चुनाव में उन्हें प्रधानमंत्री बनाने का आह्वान कर चुके हैं, लेकिन उनके छोटे भाई और राज्य के लोक निर्माण मंत्री शिवपाल सिंह यादव का मानना है कि विधानसभा चुनाव में भारी जीत के बाद नेताजी को मुख्यमंत्री की कुर्सी संभालनी चाहिए थी. इंडिया टुडे के प्रमुख संवाददाता आशीष मिश्र से बातचीत के दौरान शिवपाल ने प्रश्नों के जवाब बिना किसी लाग-लपेट के दिए. बातचीत के प्रमुख अंशः
विधानसभा चुनाव के नतीजे आने के बाद ऐसी खबरें आईं कि आप अखिलेश के मुख्यमंत्री बनने के खिलाफ थे.
अखिलेश मेरे बेटे की तरह है. बचपन से मेरे ही घर में रहता आया है और आज भी ज्यादातर वह मेरे साथ ही समय बिताता है. एक पिता की तरह मेरी भी ख्वाहिश है कि वह खूब उन्नति करे. अखिलेश को मुख्यमंत्री बनाने के निर्णय का किसी ने विरोध नहीं किया. भारी बहुमत मिलने के बाद मैंने नेताजी को राय दी कि वे मुख्यमंत्री बनें. नेताजी परिवार और पार्टी के मुखिया हैं. वे जो निर्णय लेते हैं, हम उसका मान रखते हैं.
बतौर मुख्यमंत्री अखिलेश के अब तक के कार्यकाल को कैसे आंकते हैं?
अखिलेश ने शानदार शुरुआत की है. निस्संदेह वे सफल मुख्यमंत्री के रूप में उभरेंगे. काफी पढ़े-लिखे हैं. गरीबों, छात्रों और नौजवानों की जरूरतों को भलीभांति समझ्ते हैं. खास बात यह है कि मुख्यमंत्री बनने के बाद वे और भी विनम्र व सुलभ हो गए हैं.
मुलायम सिंह यादव का अगला लक्ष्य लोकसभा चुनाव है. क्या आप भी उनके साथ केंद्र की राजनीति में उतरेंगे?
मैं नेताजी का सहयोगी हूं. उनका जो भी आदेश होगा, मुझे मान्य होगा, लेकिन मेरा केंद्र की राजनीति करने का इरादा नहीं है.
इस बार विधानसभा चुनाव में आपके बेटे ने आपके क्षेत्र में प्रचार की कमान संभाल रखी थी. क्या इसे राजनीति में आने से पहले की ट्रेनिंग समझ जाए?
मेरा बेटा आदित्य यादव बैचलर ऑफ बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन (बीबीए) के अंतिम वर्ष का छात्र है. इस बार मैंने उसे अपने चुनाव क्षेत्र में आने वाले जसवंतनगर ब्लॉक की जिम्मेदारी सौंपी थी. लेकिन इसका अर्थ यह नहीं कि वह राजनीति में आएगा. परिवार के बहुतेरे लोग राजनीति में हैं. आदित्य को राजनीति में लाने का कोई इरादा नहीं है.
मायावती के शासन में हुए भ्रष्टाचार की जांच आपने जिस तेजी से शुरू की थी, वह अब कुछ धीमी पड़ती दिख रही है. दूसरी पार्टियां आरोप लगा रही हैं कि सपा सरकार ने मायावती के प्रति नरम रुख अख्तियार कर लिया है?
मायावती के शासनकाल में भ्रष्टाचार का ऐसा खुला खेल हुआ कि बड़ी संख्या में नौकरशाही बेईमान हो गई. उससे सहयोग न मिल पाने से तेजी से जांच नहीं हो पा रही. थोड़ा समय लग सकता है, लेकिन भ्रष्टाचार में लिप्त लोगों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी.
अगर ज्यादातर नौकरशाही भ्रष्ट हो गई है तो आप अपनी सरकार चलाने के लिए बेहतर अफसर कहां से लाएंगे?अफसरों पर हमारी पैनी नजर है. कई अच्छे अधिकारी और कर्मचारी भी हैं. उन्हें बेहतर काम के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है.
आरोप है कि सपा में एक नहीं, 3-4 मुख्यमंत्री हैं, जो स्वतंत्र काम करते हैं. विरोधियों का इशारा आपकी तरफ भी है?पूरा मंत्रिमंडल अखिलेश यादव के नेतृत्व में सरकार चला रहा है. सभी सदस्य बगैर मुख्यमंत्री को जानकारी दिए कोई निर्णय नहीं लेते. इनमें मैं कोई अपवाद नहीं हूं.
आगामी लोकसभा चुनाव के लिए आपका रोडमैप क्या है?
मेरे पास लोक निर्माण विभाग, सिंचाई, सहकारिता जैसे महत्वपूर्ण विभाग हैं. मेरी पूरी कोशिश है कि जल्द-से-जल्द प्रदेश को गड्ढा युक्त सड़कों से मुक्ति दिलाऊं. सड़कें दुरुस्त होते ही विकास का एक नया मार्ग खुलेगा. इसके अलावा सिंचाई की बंद पड़ी सरयू, शारदा, बाणसागर परियोजना को केंद्रीय योजना आयोग, विश्व बैंक के सहयोग से जल्द पूरा करेंगे. इस बार हमारी सरकार किसानों को फसल का पूरा मूल्य नहीं दिला सकी, लेकिन अगली बार इस कमी को दूर कर लिया जाएगा. दो साल में सारे वादे पूरे करेंगे.

