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मैं जनता की अदालत में जाने को तैयार हूं: जगन

मेरे पिता और मैं जब तक कांग्रेस के साथ थे, सम्मानित थे और पसंद किए जाते थे. जिस क्षण मैंने पार्टी छोड़ दी हम असम्मान के पात्र हो गए.

जगन मोहन रेड्डी
जगन मोहन रेड्डी
अपडेटेड 4 जून , 2012

दो दिनों में (पहली बार अपने चुनाव अभियान के दौरान 17 मई को और दूसरी बार अपनी गिरफ्तारी से एक दिन पहले 26 मई को) इंडिया टुडे को दिए विशेष इंटरव्यू में वाइ.एस. जगन मोहन रेड्डी ने कांग्रेस हाइकमान सोनिया गांधी, संपत्ति की सीबीआइ जांच और अपने भविष्य के बारे में बात की. उनकी कोहनियों और हाथों के पिछले हिस्सों में खरोंच के निशान बन गए हैं जो उनसे हाथ मिलाने और उन्हें छूने को आतुर लोगों की निशानी है. एसोसिएट एडिटर भावना विज अरोड़ा और निर्मला रवींद्रन से उन्होंने कहा कि यह 'लोगों का प्यार है.'

सीबीआइ ने आपको पूछताछ के लिए बुलाया जिससे आपको प्रचार अभियान छोटा करना पड़ा. पूछताछ के लिए चुने गए समय पर आप क्या कहेंगे?
इस समय को चुनना शक पैदा करने वाला है. कांग्रेस यह नहीं चाहती थी कि मैं अपना प्रचार अभियान जारी रखूं. हम इस उपचुनाव में एकतरफा जीत के लिए तैयार हैं. हमारी योजना इन चुनावों के लिए 41 दिनों तक प्रचार अभियान चलाने की थी. हम लगातार सड़कों पर रहते जब तक कि वे मुझे गिरफ्तार या कुछ और नहीं करते (हंसते हैं).

आपको गिरफ्तारी का अंदाजा था?
मैं जानता था कि मुझे गिरफ्तार कर लिया जाएगा. कांग्रेस के खेल का अंदाजा लगाना आसान है. आश्चर्य तो तब होता जब गिरफ्तार नहीं किया जाता.

सीबीआइ जांच की रूपरेखा कांग्रेस ने तैयार की?
सब कुछ कांग्रेस का किया-धरा है. मेरे पिता और मैं जब तक पार्टी से जुड़े रहे, काफी सम्मानित पसंद किए जाते रहे. जिस क्षण मैंने पार्टी छोड़ी, हम असम्मान के पात्र हो गए. मैं चाहता हूं कि जनता की अदालत मेरे बारे में फैसला करे, पर मुझे भरोसा नहीं होता कि पिता को बदनाम करने के लिए ये इतने नीचे गिर सकते हैं, जिन्होंने उनको राज्‍य में अभूतपूर्व जीत दिलाई थी, जो अपना बचाव करने के लिए दुनिया में नहीं हैं.

आप उनके मुताबिक चलते तो जीवन आसान रहता?
निश्चित रूप से. मुझे तत्काल मंत्री बना दिया जाता और बाद में मुख्यमंत्री. मेरे खिलाफ कोई सीबीआइ जांच भी नहीं होती. लेकिन मैंने तय किया कि उन लोगों के परिवारों से मिलने यात्रा पर जाऊंगा जिन्होंने मेरे पिता के लिए जान दी है. इससे हाइकमान नाराज हो गया. उन्होंने कहा कि आपके वादों का कोई मतलब नहीं. एक चीज मैंने पिता से सीखी है कि जबान दो तो उस पर खरा उतरना ही होगा.

इसलिए आपने अपनी पार्टी बना ली?
यह सब बाद में हुआ. मैंने कांग्रेस छोड़ी तो हर कोई कह रहा था कि मैं बर्बाद हो जाऊंगा. जब कई कांग्रेसी सांसद और विधायक इस्तीफा देकर मेरे साथ आना चाहते थे तो मैंने उनसे इंतजार करने को कहा. मैं नहीं चाहता था कि मेरे निर्णय का खामियाजा उन्हें भुगतना पड़े. वर्षों से मेरे पिता लोगों से पंजे पर वोट मांगते रहे थे. मेरे मन में सवाल था कि कांग्रेस के साथ नहीं रहने पर क्या वे मुझे वोट देंगे? ईश्वर और स्वर्ग में बैठे पिता और लोगों के आशीर्वाद से मई 2011 में मैं कडप्पा लोकसभा सीट पर रिकॉर्ड मतों से जीता.

अपने खिलाफ चलने वाले मामलों पर आप क्या कहेंगे?
कांग्रेस से इस्तीफा देने के एक माह के भीतर ही मेरे पास आयकर विभाग का नोटिस आ गया. मेरे पिता और मेरा अपराध अगर यह है कि उद्योगों को जमीन कौड़ियों के भाव दी गई तो गुजरात और तमिलनाडु सरकारों को तो इस आधार पर बर्खास्त कर देना चाहिए, जिन्होंने कारखाने लगाने के लिए उद्योग जगत को मुफ्त में जमीनें दी हैं. राज्‍य की पिछली सरकारों के जमीन सौदों पर क्या किया जाएगा? क्या एन. चंद्रबाबू नायडू के शासन के दौरान हुए जमीनों के आवंटन की जांच की जाएगी? जहां तक साक्षी (जगन के मीडिया हाउस) के वैल्युएशन की बात है, जो भी धन आया है, यह साबित करने के लिए दस्तावेज हैं कि वह कहां से आया.

जांच में तो कुछ और ही कहा गया है?
मैं जांच को लेकर परेशान नहीं हूं. मैंने वकीलों की सेवाएं ली हैं जो इसे देखेंगे. पर सोचिए, राज्‍य की छवि को किस तरह से बट्टा लग रहा है. मुझे खत्म करने की बदले की कार्रवाई में कांग्रेस आंध्र प्रदेश से कारोबार को खत्म कर रही है.

आपका क्या कहना है, कांग्रेस बदले की भावना से काम कर रही है?
कांग्रेस काफी प्रतिशोध की भावना रखने वाली है. यह अजीब पार्टी है, जिस पर कुछ लोगों का असर रहता है. कांग्रेस और सोनिया गांधी ने इसे व्यक्तिगत तौर पर लिया है और वे इस तथ्य को स्वीकार नहीं कर रहे हैं कि एक बच्चा भी अपने पैरों पर खड़ा हो सकता है. वे सोचते हैं कि मैं कांग्रेस के बगैर जिंदा नहीं रह सकता. वे यह भूल गए हैं कि यह लोकतंत्र है न कि आपातकाल या कुछ लोगों का शासन.

आप पर जमीन देने, गलत रिकॉर्ड और जालसाजी के बदले उद्योगपतियों से अनुचित लाभ उठाने का आरोप है.
कौन लगा रहा है ये आरोप? कांग्रेस. इसका क्या मतलब निकलता है? मैं जांच में सहयोग कर रहा हूं, सीबीआइ के सवालों के जवाब दिए हैं. देखते हैं कि इससे क्या 'सच' बाहर आता है.

ओदारपू यात्रा अब भी जारी रहेगी?
मैं इसे तब तक खत्म नहीं करूंगा जब तक अपने पिता के लिए जान देने वाले हर व्यक्ति के परिवार से नहीं मिल लेता. इस यात्रा के दौरान मैंने काफी कुछ सीखा है. मैंने गरीब से गरीब जिलों में 700 घरों का दौरा किया है. लोग मुझे यह बताते हैं कि किस तरह से मेरे पिता की शुरू की गई योजनाओं ने उनके जीवन पर असर डाला है. मैं यह सब देखकर फख्र महसूस करता हूं.

आप बहुत कम समय में मंझे हुए नेता बन गए हैं, क्या कहेंगे?
दस साल पहले मैं राजनीति में नहीं उतरना चाहता था. राहुल गांधी जब राजनीति में आए तो इसे लेकर लोगों में काफी उत्साह था. तब मेरे परिवार ने सोचा कि मुझे भी राजनीति में आना चाहिए. लेकिन मैं एक मीडिया कंपनी चलाना चाहता था. साल 2009 में मेरे पिता ने मुझे राजनीति में उतरने को कहा. मैंने उनसे कहा कि मैं राजनीति की धूल और गंदगी में क्यों जाऊं जबकि एक मीडिया समूह का मालिक होने से राजनेता खुद मेरे पास आते हैं. मैंने कभी यह नहीं सोचा था कि एक दिन मुझे अपने पिता के बगैर इन चीजों को संभालना पड़ेगा. लेकिन आगे बढ़ते हुए मैं सीख रहा हूं. यह काफी अच्छे सबक वाला अनुभव है.

राहुल गांधी के बारे में क्या कहेंगे?
मैं उनके बारे में कुछ नहीं कहना चाहता. उनके बारे में यदि मैं कुछ भी कहूंगा तो यह काफी घमंड भरा लगेगा.

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