जजों के प्रेस कॉन्फ्रेंस वाला विवाद शायद सुलझने लगा है. आरोप थे कि जजों को काम करने की आजादी नहीं है. ऐसे में यह जानना दिलचस्प होगा कि आखिर कैसे केस एलाट होते हैं सुप्रीम कोर्टमें?
सर्वोच्च न्यायालय के चार जजों ने मुकदमों के अलाटमेंट में मुख्य न्यायाधीश पर वरिष्ठता को दरकिनार करने का आरोप लगाया है.
वैसे, मुख्य न्यायाधीश के पास केस अलॉट करने का एकाधिकार होता है. इससे पहले सीजेआइ की अध्यक्षता वाली पीठ जस्टिस चेलमेश्वर के फैसले को पलट चुकी है.
नियम कहता है जिस पर अभी हाल ही में संविधान पीठ ने मुहर भी लगादी है कि चीफ जस्टिस मास्टर अॉफ रोस्टर होता है. यानी कौन सा केस किसी पीठ मेंजाएगा या कौन जज उसकी सुनवाई करेगा यह तय करने का अधिकार सिर्फ मुख्य न्यायाधीश कोहोता है. यही व्यवस्था उच्च न्यायालयों में होती है. वहां भी मुख्य न्यायाधीश ही नेतृत्वकर्ता होता है.
कुछ दिनों पहले जब जस्टिस चेलमेश्वरकी अध्यक्षता वाली पीठ ने जजों के नाम पर रिश्वतखोरी केस की सुनवाई पांच जजों कीपीठ को हस्तांतरित करने का आदेश दिया था तो उसी दिन आनन-फानन प्रधान न्यायाधीशदीपक मिश्रा की अध्यक्षता में पांच जजों की पीठ ने जस्टिस चेलमेश्वर की पीठ का वोआदेश रद्द किया था. इतना ही नहीं प्रधान न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली पीठ नेव्यवस्था दे दी थी कि चीफ जस्टिस मास्टर अॉफ रोस्टर होता है और सिर्फ वही तय करसकता है कि कौन सा केस कौन सी पीठ सुनेगी. इसलिए आज की तारीख में यही कानून है औरयही व्यवस्था चली आ रही है.
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