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कर्ज में फंसा किंगफिशर एयरलाइंस

भारतीय स्टेट बैंक और आइसीआइसीआइ बैंक लिमिटेड की अगुआई में कर्ज देने वाले 13 वित्तीय संस्थानों के एक समूह ने किंगफिशर एयरलाइंस (केएफए) के शेयर भारी-भरकम प्रीमियम पर खरीदकर गहरा झ्टका मोल ले लिया है.

विजय माल्‍या
विजय माल्‍या
अपडेटेड 10 सितंबर , 2011

भारतीय स्टेट बैंक और आइसीआइसीआइ बैंक लिमिटेड की अगुआई में कर्ज देने वाले 13 वित्तीय संस्थानों के एक समूह ने किंगफिशर एयरलाइंस (केएफए) के शेयर भारी-भरकम प्रीमियम पर खरीदकर गहरा झ्टका मोल ले लिया है.

यह एयरलाइन पहले ही कर्ज के पहाड़ में दबी हुई थी. इन कर्जदाताओं ने विजय माल्या के स्वामित्व वाली एयरलाइन की 23.21 प्रतिशत हिस्सेदारी मार्च में खरीदी थी. इसमें भारतीय स्टेट बैंक का हिस्सा 5.67 प्रतिशत और आइसीआइसीआइ बैंक का हिस्सा 5.3 प्रतिशत था.

ये शेयर केएफए की होल्डिंग कंपनियों-यूनाइटेड ब्रुवरीज होल्डिंग्स और किंगफिशर फिनवेस्ट के 64.48 रु. प्रति शेयर पर गिरवी रखे गए थे, जो उनके बाजार मूल्य से 61 प्रतिशत ज्‍यादा दाम पर रखे गए थे.

2009-10 के वित्त वर्ष में एयरलाइन को 1647.22 करोड़ रु. का शुद्ध घाटा हुआ. 2010-11 के वित्त वर्ष में घाटा कम हुआ, लेकिन वह अभी भी 1027 करोड़ रु. के ऊंचे स्तर पर था. इस घाटे के बावजूद 13 बैंकों ने कंपनी के शेयर प्रीमियम पर ले लिए. नवंबर, 2010 में कर्ज समायोजन करने का निर्णय लिया गया था और उसके बाद कर्जदाताओं ने यह कदम उठाया, जिसे भारतीय रिजर्व बैंक के स्वीकृत ढंग से ऋण समायोजन नियमों में एक बार की ढील के बाद अमल में लाया जाना था.

भारतीय स्टेट बैंक को 182.25 करोड़ रु. में 2.8 करोड़ इक्विटी शेयर आवंटित किए गए थे, जो एयरलाइन की इक्विटी का 5.67 प्रतिशत होते हैं. इसी तरह आइसीआइसीआइ बैंक को 169.3 करोड़ रु. में 2.6 करोड़ इक्विटी शेयर आवंटित किए गए थे, जो एयरलाइन की इक्विटी का 5.3 प्रतिशत होते थे.

वर्तमान बाजार मूल्य पर भारतीय स्टेट बैंक की हिस्सेदारी 75.6 करोड़ रु. मूल्य की है, जबकि आइसीआइसीआइ की 70.54 करोड़ रु. की. केएफए की बाजार पूंजी एक व्यापक इक्विटी आधार पर 1,777 करोड़ रु. से घटकर 1,376 करोड़ रु. हो चुकी है. सवाल उठता है-बैंकों में इस सौदे को मंजूरी किसने दी?

इंडिया टुडे की ओर से संपर्क किए जाने पर आइसीआइसीआइ बैंक के एक प्रवक्ता ने कहा, ''जहां नीतिगत तौर पर हम किसी विशेष मामले पर टिप्पणी नहीं करते, हम यह दोहराना चाहेंगे कि हमारे पुनर्भुगतान एयरलाइन की नकद आमदनी पर अथवा किंगफिशर के शेयर मूल्यों पर निर्भर नहीं हैं. हमारे दिए कर्ज के लिए हमारे पास सुविधाजनक सुरक्षा कवर है.'' एयरलाइन के एक अन्य मुख्य कर्जदाता भारतीय स्टेट बैंक से संपर्क करने की कोशिशों पर इंडिया टुडे को सिर्फ खामोशी का सामना करना पड़ा.

नागरिक उड्डयन मंत्रालय के पूर्व संयुक्त सचिव सनत कौल, जो उड्डयन उद्योग पर नजर रखने वाले एक वैश्विक संगठन-इंटरनेशनल फाउंडेशन फॉर एविएशन, एयरोस्पेस ऐंड डेवलपमेंट के अध्यक्ष हैं, मानते हैं कि किंगफिशर के अध्यक्ष विजय माल्या अपनी ही करतूतों से इतनी गहरी समस्या में फंसे हैं.

कौल कहते हैं, ''वे एक बहुत अमीर हैं लेकिन व्यवस्थित नहीं हैं. बैंक शेयर प्रीमियम पर खरीदें, इसका कोई तार्किक स्पष्टीकरण नहीं है. अगर वे माल्या की खिंचाई करें, सिर्फ तभी हालत बदल सकती है, वरना माल्या उन लोगों में से हैं, जो अपनी भावनाओं को अपने ऊपर हावी हो जाने देते हैं. उन्हें एक ठोस योजना तैयार करनी होगी और फिर उस पर पूरी तरह अमल करना होगा.''

केएफए ने 7,000 करोड़ रु. के अपने कुल ऋण में से 750 करोड़ रु. को इक्विटी में बदल लिया. उसने ऋणदाताओं के समूह को शेयर आवंटित कर दिए. 8 सितंबर को केएफए के शेयर के दाम 28 रु. लगाए गए. इसका मतलब है हरेक शेयर पर 37 रु. का घाटा. किंगफिशर एयरलाइंस के सीईओ, संजय अग्रवाल बैंकों को चूना लगने की सारी बातों को सिरे से ठुकरा देते हैं.

उन्होंने इंडिया टुडे से कहा, ''केएफए में सबसे बड़े शेयरधारक उसके प्रमोटर हैं, उसके बाद बैंकों का नंबर आता है, जो कंपनी के वित्तीय प्रदर्शन पर हर तिमाही के आधार पर नजर रखते हैं. जब प्रदर्शन वास्तव में सुधर रहा है, तो हिस्सेदार ठगा गया महसूस नहीं कर सकते. इसके अलावा, यह अंदाज कोई कैसे लगा सकता है कि अगर कामकाज के माहौल में या सरकार के नीतियों में लाभकारी बदलाव लाने पर शेयर कीमतें नहीं बढ़ेंगी? 2010-11 के वित्त वर्ष की पहली तिमाही में एविएशन टर्बाइन ईंधन की ऊंची कीमतों के कारण सारी एयरलाइंस को घाटा हुआ. केएफए कोई अपवाद नहीं था (देखें साक्षात्कार). अग्रवाल इन कयासों से भी इनकार करते हैं कि रिलायंस इंडस्ट्रीज केएफए में निवेश करने की कोशिश कर रही है.

केएफए को तेज उलटी हवा से मुकाबला करना पड़ रहा है. 14.6 प्रतिशत की बढ़ोतरी के साथ 1,881.64 करोड़ रु. की आमदनी के बावजूद 30 जून, 2011 को खत्म हुई पहली तिमाही में एयरलाइन को 263.54 करोड़ रु. का शुद्ध घाटा हुआ.

ईंधन की ऊंची कीमत, जो  खर्चों का कम-से-कम 40 प्रतिशत होती है, और सस्ती दरों वाले प्रतियोगियों के एक पूरे झुंड के इसके साथ-साथ मंडराने के कारण एयरलाइन के प्रदर्शन का दायरा और कमजोर हो गया है.

हालांकि यहां यह भी देखने वाली बात है कि केएफए ने एक नई लेखांकन विधि अपना ली है, जिसमें बड़ी मरम्मत और रखरखाव की लागत को संपत्ति के जीवन काल की अवधि में बांट दिया जाता है, लेकिन निचोड़ यह है कि एयरलाइन की विशुद्ध हैसियत घट गई है और अब वह विश्वसनीयता के एक गंभीर संकट का सामना कर रही है.

उद्योग पर नजर रखने वाले एक अन्य संगठन सेंटर फॉर एशिया-पैसिफिक एविएशन में भारतीय उपमहाद्वीप और मध्य-पूर्व के मुख्य कार्यकारी कपिल कौल कहते हैं, ''माल्या को हालात बदलने के लिए लगभग 50 करोड़ डॉलर तुरंत चाहिए.

उन्हें एक साफ नजर आने वाली व्यक्तिगत पूंजी प्रतिबद्धता दिखानी होगी कि वे कंपनी से फायदा नहीं लेंगे. इसमें उन्हें खुद पहल करनी होगी, जिसका मतलब होता है कि उन्हें कम से कम आधा पैसा खुद लगाना होगा. बाकी पैसा बैंकों और विदेशी संस्थागत निवेशकों से आना होगा, जो माल्या के साथ अच्छी तरह तालमेल बैठाकर काम करें. उन्हें कंपनी बोर्ड की हाल ही में हुई बैठक में प्रस्तावित 2000 करोड़ रु. के राइट्स इश्यू खरीदने होंगे. मैं नहीं सोचता कि व्यक्तिगत रूप से उनके पास पैसा नहीं है, लेकिन यूनाइटेड ब्रुवरीज के नजरिए से पैसे की यह प्रतिबद्धता नहीं आ सकती. मैं जानता हूं कि शराब के क्षेत्र में उनके पास अधिग्रहण करने की भारी-भरकम योजना है.''

हालात सुधारने के लिए पैसा जुटाना केएफए की समस्याओं को दूर करने का सिर्फ एक हिस्सा है. इसके अलावा इस हवाई सेवा कंपनी की दूसरी प्राथमिकता है एयरलाइन को लगातार रिसाव से रोकना. ऊंची ब्याज लागत और वेंडर भुगतानों की लंबी कतार हालात में बदलाव को ज्‍यादा से ज्‍यादा मुश्किल बना रही है. लेकिन माल्या इधर कुआं, उधर खाई के बीच फंसे हो सकते हैं.

मौजूदा परिस्थितियों में इस एयरलाइन में जान फूंकने के लिए अपनी निजी संपत्ति से 25 करोड़ डॉलर लगाना और शराब के वैश्विक बाजार में सिर पर आ चुका एक अरब डॉलर का अधिग्रहण करना. 25 अगस्त को, एक बोर्ड बैठक के बाद, केएफए ने घोषणा की कि बोर्ड ने राइट्स इश्यू के जरिए 2,000 करोड़ रु. जुटाने के एक प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है. जिन शेयर धारकों ने इक्विटी बाजार में मार खाई है, क्या वे राइट्स इश्यू खरीदने को तैयार होंगे?

अग्रवाल तुरंत बचाव करते हैं, ''बोर्ड का फैसला हमें राइट्स इश्यू जारी करने की इजाजत देने वाले एक प्रस्ताव के तौर पर ज्‍यादा है. जाहिर सी बात है कि ऐसा कोई भी इश्यू आकर्षक दरों पर होगा. ऐसे कई निवेशक हैं, जो समझ्ते हैं कि अच्छी-खासी सकारात्मक बातों के साथ निवेश करने का यह सही समय हो सकता है.''

वे यह भी कहते हैं, ''केएफए का कामकाजी और वित्तीय प्रदर्शन सुधर रहा है और इसमें और ज्‍यादा सुधार लाने के लिए एक स्पष्ट योजना लागू की जा रही है. विमानों के ईंधन की कीमतों में जरा भी कमी से केएफए का शुद्ध लाभ सीधे सुधर जाएगा.''

ऋण समायोजन के अलावा केएफए ने 800 करोड़ रु. नकदी सुविधा के तौर पर बैंकरों से हासिल किए हैं, जिसका इस्तेमाल वह कामकाजी पूंजी के तौर पर कर सकती है. लेकिन सबसे बड़ी राहत मिली है ब्याज की घटी दरों से. इसकी औसत ब्याज दर अब घटकर 11 प्रतिशत रह गई है, जिससे इसे हर साल 500 करोड़ रु. बचाने में मदद मिलेगी.

जनवरी से जब केएफए के शेयर ने 66.85 रु. के स्तर से  गिरना शुरू किया,  यह चिंता का विषय बना हुआ है. उड्डयन क्षेत्र पर नजर रखने वाले एक विशेषज्ञ ने की भविष्यवाणी की है, अगर केएफए कर्ज चुकाने में समर्थ नहीं रह जाएगा, तो उसे कर्ज देने वालों के पास हवाई जहाज गिरवी रखने पड़ेंगे. गेंद माल्या के पाले में है. बड़ा सवाल यह है कि वे खेल में बने भी रहेंगे या नहीं.

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