छोटी बचत योजनाओं में निवेश करने वाले लोगों के लिए राहत की खबर है. सरकार ने बुधवार के उस फैसले को वापस लेने का आश्वासन दिया है, जिसमें छोटी बचत योजनाओं पर 1.1 फीसद तक की कटौती की गई थी. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने गुरुवार को कहा कि सरकार छोटी बचत योजनाओं पर ब्याज दर घटाने के फैसले को वापस लेगी. ब्याज दरों को वित्त वर्ष 2021 की अंतिम तिमाही के स्तर पर लाया जाएगा.
सरकार ने बुधवार को लोक भविष्य निधि (पीपीएफ) और एनएससी (राष्ट्रीय बचत प्रमाण पत्र) समेत लघु बचत योजनाओं पर ब्याज दरों में 1.1 प्रतिशत तक की कटौती करने का फैसला लिया था. यह कटौती एक अप्रैल से शुरू 2021-22 की पहली तिमाही के लिये की गयी थी. यह उन बचतकर्ताओं के लिए बड़ा झटका था जो बिना जोखिम एक निश्चित आय प्राप्ति के लिए छोटी बचत योजनाओं में निवेश करते हैं.
वित्त मंत्री ने गुरुवार को सुबह ट्वीट किया, ‘‘भारत सरकार की छोटी बचत योजनाओं पर ब्याज दर वही रहेगी जो 2020-2021 की अंतिम तिमाही में थी, यानी जो दरें मार्च 2021 तक थीं. पहले दिया गया आदेश वापस लिया जाएगा.’’
कितनी हुई थी कटौती?
वित्त मंत्रालय की अधिसूचना के अनुसार, पीपीएफ पर ब्याज 0.7 प्रतिशत कम कर 6.4 प्रतिशत जबकि एनएससी पर 0.9 प्रतिशत कम कर 5.9 प्रतिशत कर दी गयी थी. सबसे ज्यादा 1.1 फीसद की कटौती एक साल की सावधि जमा राशि पर की गयी थी. इस पर ब्याज 5.5 प्रतिशत से कम करके 4.4 फीसद करने का फैसला किया गया था. गौरतलब है लघु बचत योजनाओं पर ब्याज तिमाही आधार पर अधिसूचित की जाती है.
अब पुरानी दरें बहाल होने के बाद पीपीएफ और एनएससी पर क्रमश: 7.1 प्रतिशत और 6.8 प्रतिशत की दर से वार्षिक ब्याज मिलता रहेगा. इस तरह सुकन्या समृद्धि योजना के लिए 7.6 प्रतिशत ब्याज मिलता रहेगा, जबकि पहले इसे घटाकर 6.9 प्रतिशत करने की बात कही गई थी.
पांच वर्षीय वरिष्ठ नागरिक बचत योजना के लिए ब्याज दर 7.4 प्रतिशत पर बरकरार रखी जाएगी. वरिष्ठ नागरिकों की योजना पर ब्याज का भुगतान त्रैमासिक आधार पर किया जाता है. बचत जमा पर ब्याज दर चार प्रतिशत होगी, जबकि इसे घटाकर 3.5 प्रतिशत करने का प्रस्ताव था.
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