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विश्वकोष में कैद होगी दुनिया भर की रामायण पर सामग्री

यूपी की योगी आदित्यनाथ सरकार ने रामायण की पूरी दुनिया में फैली सामग्री को एक विश्वकोष में संकलित करने का निर्णय लिया है. इसे 'ग्लोबल इनसाइक्लोपीडिया ऑफ रामायण' नाम दिया गया है.

अयोध्या शोध संस्थान द्वारा तैयार किया गया राम की यात्रा का मानचित्र
अयोध्या शोध संस्थान द्वारा तैयार किया गया राम की यात्रा का मानचित्र
अपडेटेड 23 मई , 2020

यूपी की योगी आदित्यनाथ सरकार ने रामायण की पूरी दुनिया में फैली सामग्री को एक विश्वकोष में संकलित करने का निर्णय लिया है. कई खंडों वाले इस विश्वकोश में भारत सहित दुनिया के विभिन्न देशों में राम कथा से जुड़ी कथाओं, रामलीलाओं के मंचन, गायन, लोक कथाओं, लोक कलाओं, चित्रकला, मूर्तिकला आदि विभिन्न माध्यमों में उपलब्ध सामग्री को संकलित किया जाएगा. योगी सरकार ने प्रदेश के संस्कृति विभाग को इसका जिम्मा सौंपा है. संस्कृति विभाग के प्रमुख सचिव जितेंद्र कुमार ने प्रदेश सरकार की इस महत्वाकांक्षी योजना को मूर्त रूप देने के लिए एक कार्ययोजना तैयार की है.

रामायण के विश्व भर में फैले दस्तावेजों, सामग्रियों का संकलन करने वाली इस रामायण विश्वकोष परियोजना के लिए उत्तर प्रदेश संस्कृति विभाग की स्वायत्तशासी संस्था अयोध्या शोध संस्थान ने एक कॉन्सेप्ट नोट भी तैयार कराया है. इसमें योजना को 'ग्लोबल इनसाइक्लोपीडिया ऑफ रामायण' नाम दिया गया है. यह योजना पांच साल में पूरी होगी. कान्सेप्ट नोट के मुताबिक, इस योजना का एक प्रमुख उद्देश्य भारत की विदेश नीति में सॉफ्टपॉवर डिप्लोमेसी के रूप में रामायण के सहयोग को प्रमाणिक रूप में प्रस्तुत करते हुए रामायण देशों के समूह (ग्रुप ऑफ रामायण कंट्रीज) की स्थापना का प्रयास करना है.

ग्लोबल इनसाइक्लोपीडिया ऑफ रामायण अथवा रामायण विश्व महाकोष के प्रकाशन के लिए भारत सरकार ने विशेष प्रकोष्ठ डीपीए-4 का गठन किया है. इस विशेष प्रकोष्ठ के गठन का उद्देश्य विदेश में संस्कृति एवं विरासत के सम्बन्ध में योजनाओं का समन्वय एवं आपसी सहयोग से कार्यवाही कराना है. इस प्रकोष्ठ के द्वारा विदेश में संस्कृति एवं विरासत के संरक्षण व प्रदर्शन के अलावा दस्तावेजीकरण में भी सहयोग प्राप्त करना है. इसके अलावा सम्बन्धित देशों से एक सुविज्ञ नोडल अधिकारी नामित करने की भी अपेक्षा की है जिससे योजना के क्रियान्वयन में गतिशीलता आ सके.

अयोध्या शोध संस्थान की ओर से प्रस्तावित रामायण विश्वकोष परियोजना के संदर्भ में विदेश मंत्रालय की इस सकारात्मक पहल से विभागीय अफसर खासे आशान्वित हैं. यही कारण है कि संस्कृति विभाग के प्रमुख सचिव जितेन्द्र कुमार ने अपर सचिव, डेवलपमेंट पार्टनरशिप एडमिनिस्ट्रेशन, एमईए (विदेश मंत्रालय) को भेजे अपने अर्द्ध शासकीय पत्र 59-एएसएस दिनांक 19 मई 2020 में विशेष प्रकोष्ठ के गठन पर प्रसन्नता जताई है. इसके साथ ही अपेक्षा की है कि विदेश स्थित सभी भारतीय दूतावास एवं उच्चायोग रामायण महाविश्वकोष योजना के लिए विशेषज्ञों के चयन किए जाने के सम्बन्ध में निर्देशित करेंगे.

अयोध्या शोध संस्थान के निदेशक डॉ. वाइ.पी. सिंह का कहना है कि ग्लोबल इनसाइक्लोपीडिया ऑफ रामायण की मूल भाषा अंग्रेजी ही होगी. इसके साथ ही इसका प्रकाशन भारत के अलग-अलग प्रांतों की क्षेत्रीय भाषाओं में भी किया जाएगा. इस विश्वकोश को तैयार करने में देश-विदेश के करीब 50 हजार विद्वान, रामायण मर्मज्ञ, संस्कृतिकर्मी और साहित्यकारों का बतौर शोधकर्ता योगदान लिया जाएगा. रामायण पर विश्वकोश का प्रत्येक खण्ड 1100 पृष्ठों का होगा.

इसका डिजिटल संस्करण भी प्रकाशित किया जाएगा. संस्कृति विभाग का दावा है कि भारतीय संस्कृति से जुड़े किसी महाकाव्य पर अपनी तरह का यह पहला विश्वकोश होगा. डॉ. वाइ.पी. सिंह बताते हैं, “यूरोप और अमेरिका के अलावा अफ्रीका खाड़ी के देशों में भी भारतीय वैदिक परम्परा के तमाम ऐतिहासिक साक्ष्य मिलते हैं, जिनमें बोत्सनिया-हर्जेगोविना के बीच रामे नदी, बुल्गारिया में चट्टानों पर उकेरे गए स्वस्तिक व अन्य चिन्ह हाल ही में चर्चा में आए हैं.”

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