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‘सरकार चाहे तो वह मोदी का पासपोर्ट रद्द कर सकती है’

ललित मोदी इंग्लैंड से अपने ट्वीट और ब्लॉगों के जरिए हमारा यह सोचकर मजाक उड़ा रहे हैं कि भारत में क्रिकेट को वे अब भी नियंत्रित कर सकते हैं.

नारायणस्वामी श्रीनिवासन
नारायणस्वामी श्रीनिवासन
अपडेटेड 9 अक्टूबर , 2011

लगभग 65 वर्ष के नारायणस्वामी श्रीनिवासन कई विवादों के घेरे में हैं. आखिर वे दुनिया में क्रिकेट के सबसे अमीर और सबसे ताकतवर बोर्ड बीसीसीआइ, जिस पर सबसे ज्‍यादा सवाल उठते रहे हैं, के अध्यक्ष जो बनाए गए हैं. उन्होंने इंग्लैंड के शर्मनाक दौरे की जांच कराए जाने की मांग ठुकरा दी है, कोच्चि टस्कर्स के संकट को दूर करने के लिए कानूनी सलाह मांगी है और भारत-पाकिस्तान क्रिकेट संबंधों को दोबारा शुरू करने की मांग कर रहे पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड के अध्यक्ष एजाज भट्ट की अनगिनत फोन कॉलों को अनसुना कर दिया है.

आइपीएल की टीम चेन्नै सुपरकिंग्स की मुख्य निवेशक इंडिया सीमेंट्स के अध्यक्ष श्रीनिवासन इलिनोइस इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी से केमिकल इंजीनियर होने के साथ-साथ चार्टर्ड एकाउंटेंट भी हैं. वे 3,800 करोड़ रु. के कारोबार वाली इंडिया सीमेंट्स के चेन्नै दफ्तर में बैठे हैं, मेज पर उनके पोते-पोतियों और नाती-नातिनों की तस्वीरें रखी हैं, तस्वीरों के अलावा महात्मा गांधी की मिट्टी की मूर्ति और चरखे का छोटे-सा मॉडल भी रखा है. वे अध्यक्ष के तौर पर अपने तीन साल के कार्यकाल में बीसीसीआइ में आमूल-चूल बदलाव के लिए कृतसंकलप हैं.

5 अक्‍टूबर 2011: तस्‍वीरों में देखें इंडिया टुडे अंक 

28 सितंबर 2011: तस्‍वीरों में देखें इंडिया टुडे अंक

21 सितंबर 2011: तस्‍वीरों में देखें इंडिया टुडे अंक
वे कहते हैं, ''मुझे बीच का रास्ता बिल्कुल पसंद नहीं है, जहां आपको हर किसी को खुश रखना पड़ता है. ललित मोदी का मुद्दा लटका हुआ है, उसे खत्म करना होगा. मैं चाहूंगा कि इंटरनेशनल क्रिकेट काउंसिल (आइसीसी) के सदस्य क्रिकेट के विभिन्न मुद्दों को मजबूती से उठाएं और साथी सदस्यों को भी इसमें शामिल करें. आइसीसी की बागडोर सबसे काबिल आदमी को सौंपें.'' वे गोल्फ को अब कम समय दे पाते हैं, पहले वे रोज गोल्फ खेला करते थे, लेकिन अब हफ्ते में एक बार ही खेल पाते हैं. उन्होंने अखिल भारतीय शतरंज संघ के अध्यक्ष का पद भी छोड़ दिया है, ताकि बीसीसीआइ को ज्‍यादा समय दे सकें.

उनके पास काफी कुछ करने को है. वित्त मंत्रालय का कहना है कि 2010 में आइपीएल फ्रेंजाइजी फीस और विज्ञापन की जगह की बिक्री पर सर्विस टैक्स के बतौर बोर्ड पर 160 करोड़ रु. का बकाया है. बदतर तो यह कि कभी उनके गुरु और बीसीसीआइ के पूर्व अध्यक्ष ए.सी. मुथैया सुप्रीम कोर्ट से बीसीसीआइ और आइपीएल में सर्वोच्च पदों पर निवासन की नियुक्ति के खिलाफ रोक लगाने की मांग कर रहे हैं. अदालतों ने श्रीनिवासन पर रोक लगाने से इनकार कर दिया है. वे कहते हैं कि वे चेन्नै सुपरकिंग्स के मालिक नहीं हैं, और इसे पेशेवर लोगों की टीम चलाती है.

2001 में तमिलनाडु क्रिकेट संघ के जिला उपाध्यक्ष पद पर रहने के बाद 2005 में वे शरद पवार की अगुआई वाले बीसीसीआइ में कोषाध्यक्ष बन गए. वे शुरू  से ही अपने साथ जुड़े विवादों से निपटते रहे हैं. डिप्टी एडिटर शांतनु गुहा रे के साथ उनकी बातचीत के अंशः

आपने बीसीसीआइ का अध्यक्ष पद लेने से पहले अपने सितारे ठीक से देख लिए थे.
(हंसते हैं) मैंने देख लिए थे, लेकिन अपने ज्‍योतिषी का नाम नहीं बता सकता, न ही यह कि उन्होंने मेरे भविष्य के बारे में क्या बताया.

बोर्ड के अध्यक्ष के तौर पर आपकी तीन फौरी प्राथमिकताएं क्या होंगी.
मैं खेल के विकास, बेहतर जवाबदेही और पारदर्शिता पर मुख्य रूप से ध्यान दूंगा. एक चौथी प्राथमिकता भी है, लोगों को आइपीएल के पूर्व आयुक्त ललित मोदी के बारे में सचाई मालूम होनी चाहिए. लोगों को मालूम होना चाहिए कि बीसीसीआइ एक ईमानदार संस्था है.

बीसीसीआइ मोदी के प्रत्यर्पण के लिए कोशिश क्यों नहीं कर रही है. उनके खिलाफ आइपीएल के टीवी सौदों में रिश्वत लेने, टीमों की नीलामी में हेराफव्री करने और बीसीसीआइ के दिशा-निर्देशों का उल्लंघन करने के मामलों में प्रवर्तन निदेशालय और आयकर विभाग की जांच चल रही है.
वे इंग्लैंड में अपने ट्वीट के जरिए हमारी खिल्ली उड़ा रहे हैं. वे हमारी न्याय व्यवस्था का मजाक उड़ा रहे हैं. वे समझ्ते हैं कि अपने ट्वीट और ब्लॉग के जरिए अब भी क्रिकेट को नियंत्रित कर सकते हैं. मैं समन जारी नहीं कर सकता, देश की अदालत मेरे हाथ में नहीं है. यहां तमाम जांच एजेंसियां हैं, जो उनके खिलाफ मामलों को देख रही हैं. अगर समनों की अनदेखी की गई तो उसके लिए अदालतें हैं. अगर सरकार चाहे तो वह उनका पासपोर्ट रद्द कर सकती है. सुप्रीम कोर्ट ने मोदी की जांच कर रही बीसीसीआइ की अनुशासन समिति में बदलाव करने की उनकी मांग खारिज कर दी है.

लेकिन कोच्चि का मुद्दा तो चल रहा है और भुगतान न कर पाने के कारण टीम को निलंबित कर दिया गया है. अफवाहें हैं कि कुछ खिलाड़ियों को बोली के लिए पेश किया जा सकता है.
हमने वही किया जो नियमावली में लिखा था. टीम को बार-बार चेतावनी दी गई और उससे अपना बकाया चुकाने के लिए कहा गया. अब कोच्चि टस्कर्स के प्रबंधन ने कानूनी कार्रवाई की धमकी दी है. जहां तक बीसीसीआइ का संबंध है, कोच्चि आइपीएल से बाहर हो चुकी है. इस मामले को हल किए जाने की जरूरत है. मैं जानता हूं कि आगे आप क्या पूछने वाले हैं. इसमें कोई निजी एजेंडा नहीं है. राजस्थान रॉयल्स और किंग्स इलेवन पंजाब को लेकर भी कुछ मुद्दे थे लेकिन उन्हें दूर कर लिया गया है.

खेल के प्रशासन को लेकर आइसीसी का हाल की कोशिशों के बारे में क्या कहना है. मांग है कि एसोसिएट सदस्यों को और ज्‍यादा अधिकार दिए जाएं.
मैं ऐसे नियमों के खिलाफ हूं जो कुछ लोगों को ज्‍यादा अधिकार देते हों. उन्हें बदले जाने की जरूरत है. आखिरकार आइसीसी सदस्यों की है और खेल के संचालन में उन्हें मिलकर भूमिका निभानी होगी.

 क्या आप मानते हैं कि अध्यक्ष की नियुक्ति में आइसीसी की आवर्तन प्रणाली बंद होनी चाहिए.

मेरी राय है कि सबसे योग्य आदमी को आइसीसी का संचालन करना चाहिए. हम ऐसी व्यवस्था बना सकते हैं, जहां पेशेवर लोगों को जिम्मेदारी सौंपी जाए.

क्या इसका मतलब है कि अध्यक्ष भारत का होना चाहिए.
नहीं, मेरा मतलब यह नहीं है. वह किसी भी सदस्य देश का हो सकता है.

क्या बीसीसीआइ राष्ट्रीय खेल विकास विधेयक, जिसमें भारत में खेल संगठनों पर नियंत्रण की मांग की गई है, के कारण क्रिकेट के राजनीतिकरण को खत्म करने की आइसीसी की मांग का समर्थन करता है.
क्रिकेट का राजनीतिकरण बंद होना चाहिए. लेकिन जब यह फैसला लिया गया तब मैं कार्यकारी बोर्ड में नहीं था. मैं समझ्ता हूं कि बीसीसीआइ पर आरोप मढ़ना सही नहीं होगा.

राजीव शुक्ल, विलासराव देशमुख और अनुराग ठाकुर जैसे नेता बीसीसीआइ के अहम पदों पर हैं. लगता है, जैसे आप खेल में एक सियासी समस्या (बीसीसीआइ को अपने नियंत्रण में लाने की खेल मंत्रालय की मांग) बन चुके मुद्दे को सुलझाने के लिए राजनैतिक हल खोज रहे हैं.
बीसीसीआइ के राज्‍य संगठनों की सूची को देखें, उसमें राजनीतिकों की भरमार है, सिवा दक्षिण के, जहां क्रिकेट से जुड़े लोग ही इस खेल को चला रहे हैं. इसलिए नेताओं का होना कोई नई बात नहीं है. मैं अपने बचाव में यह बात नहीं कर रहा हूं.

2010 में वित्त पर संसद की स्थायी समिति ने सरकार से आइपीएल फ्रेंजाइजी के फेमा और एफआइपीबी के उल्लंघनों की जांच करने को कहा था. क्या बीसीसीआइ इसमें सहयोग करेगा.

क्या हम सहयोग नहीं कर रहे हैं. मोदी के कार्यकाल के आइपीएल से जुड़े सभी कागजात 2010 में जांच एजेंसियों को सौंप दिए गए थे.

भारतीय क्रिकेट टीम इन दिनों खिलाड़ियों की चोट की समस्या से ग्रस्त है. इंग्लैंड के दौरे में आठ खिलाड़ियों को चोट से बाहर होना पड़ा था. तेज गेंदबाजों की भी कमी है. मुख्य बल्लेबाजों में राहुल द्रविड़, सचिन तेंडुलकर और वी.वी.एस. लक्ष्मण शायद ही आपके तीन साल के कार्यकाल तक खेल पाएं. नए खिलाड़ियों को लाने की क्या योजना है.
हमारे पास एक मजबूत बेंच है. इसीलिए हम वेस्ट इंडीज के लिए टीम भेज सके और इंग्लैंड दौरा पूरा कर सके. यह क्रिकेट है, बच्चों का खेल नहीं. यह अग्निपरीक्षा है. नए खिलाड़ियों को अगर सचिन और राहुल दैसे दिग्गजों की जगह लेनी है तो उन्हें अच्छा प्रदर्शन करना होगा.

क्या क्रिकेट में ज्‍यादा पैसा जुड़ा होने से दूसरे खेलों से ध्यान हट रहा है.
यह गलत आरोप है. भारत में कंपनियां इसलिए पैसा लगाती हैं कि क्रिकेट उन्हें आकर्षक निवेश लगता है. आप दूसरे खेलों की गिरती हालत के लिए क्रिकेट को दोषी नहीं ठहरा सकते. सच तो यह है कि बीसीसीआइ भारत में फुटबॉल जैसे खेल की मदद करता है.

आखिरी सवाल. आप पाकिस्तान के खिलाफ सीरीज कब खेलेंगे.

इसका जवाब राजनीतिक है. आप दिल्ली से इसका जवाब मांगिए.

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