नई दिल्ली स्थित थल सेना मुख्यालय में 31 मई को शीर्ष कमांडरों के साथ अपनी पहली बैठक में 25वें सेना प्रमुख 59 वर्षीय जनरल बिक्रम सिंह ने अपने राजनैतिक आकाओं के साथ ही सैनिकों को भी सख्त संकव्त दिए हैं. उनका मिशन हैः ऑपरेशन क्लीन-अप (सफाई अभियान). नए सैन्य प्रमुख ने प्रमुख अधिकारियों की अपनी टीम से कहा, ''यह गर्व की बात है कि हम एक गैर-राजनैतिक सेना हैं. यहां कोई जातिगत भेदभाव नहीं होगा और न ही उत्पीड़न होगा. सैन्य कमांडरों को ऐसा माहौल तैयार करने की जरूरत है जिससे हमारे मूलभूत मूल्य और सैन्य सदाचार मजबूत हों.'' वे अब देश भर में सेना के विभिन्न प्रतिष्ठानों का दौरा करेंगे और ''सेना को पटरी पर वापस लाएंगे.''
वे चाहते हैं कि यह संदेश सेना के एक-एक जवान तक पहुंच जाए. करीब 26 माह के कार्यकाल के बाद उनके पूर्ववर्ती जनरल वी.के. सिंह अपने पीछे एक असंतुष्ट सेना छोड़कर गए हैं. 2010 की सर्दियों से ही सेना जनरल वी.के. सिंह के जन्मतिथि विवाद को लेकर हलकान है. वे सेना के इतिहास के ऐसे पहले प्रमुख रहे जिन्होंने सरकार के खिलाफ वैधानिक शिकायत दर्ज की. 16 जनवरी, 2012 को वे सरकार को सुप्रीम कोर्ट में घसीटने वाले पहले सेना प्रमुख भी बन गए.
उन्होंने अपने साथी अधिकारियों को भी नहीं बख्शा. उन्होंने सेना के अतिरिक्त महानिदेशालय (सार्वजनिक सूचना) की ओर से प्रेस को 5 मार्च को जारी एक बयान में डिफेंस इंटेलीजेंस एजेंसी के पूर्व महानिदेशक ले. जनरल तेजिंदर सिंह पर आरोप लगाया कि उन्होंने सेना को 'घटिया' टाट्रा ट्रकों की आपूर्ति मंजूर करने के लिए उन्हें 14 करोड़ रु. की घूस की पेशकश की थी. फिर 19 मई को उन्होंने जनरल ऑफिसर कमांडिंग (3 कोर) ले. जनरल दलबीर सिंह सुहाग (जिन्हें जनरल बिक्रम सिंह के उत्तराधिकारी के तौर पर देखा जा रहा है) पर आरोप लगाया कि उन्होंने अपनी जिम्मेदारियों को नहीं निभाया और उस अधिकारी के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की जिसने मीडिया में सेना विरोधी खबरें 'प्लांट' की थीं.
इंडिया टुडे को जनरल वी.के. सिंह द्वारा ले. जनरल सुहाग को भेजे कारण बताओ नोटिस को देखने का मौका मिला है और जनरल वी.के. सिंह के गुस्से को नोटिस के बिंदु डी को देखकर समझ जा सकता है. 19 मई को भेजे गए इस नोटिस में जनरल वी.के. सिंह ने कहा है, ''यह भी पता चला है कि 3 कोर इंटेलीजेंस ऐंड सर्विलांस यूनिट (सीआइएसयू) के सीओ यूनिट से छुट्टी के दौरान खुद को दिल्ली में कमांड सेना मुख्यालय की केंद्रीय खुफिया इकाई के सीओ रूप में पेश कर रहे थे और मीडिया में सेना विरोधी खबरें प्लांट कर रहे थे.
लगातार कई घटनाओं से यह संकव्त मिलता है कि 3 सीआइएसयू का संचालन बेहद गैर पेशेवर और ढीले-ढाले तरीके से किया जा रहा था और 3 कोर के जीओसी समेत कमान की पूरी चेन ने अपनी जिम्मेदारियों का निर्वाह नहीं किया.''
ले. जनरल सुहाग को नोटिस का जवाब देने के लिए सिर्फ सात दिन का समय दिया गया था. अपनी बीमार मां की देखभाल में लगे ले. जनरल सुहाग ने तुरंत ही इस नोटिस को रिसीव किया, लेकिन उन्होंने जवाब के लिए समय मांगा. फिर 29 मई को सेना प्रमुख ने उन्हें जवाब के लिए 10 दिन की और मोहलत दे दी.
हालांकि जनरल वी.के. सिंह इस बात से इनकार करते हैं कि ले. जनरल सुहाग को दिया गया नोटिस उत्तराधिकार के क्रम को बदलने का कोई प्रयास था. दिल्ली में एक पुस्तक के विमोचन के मौके पर जनरल वी.के. सिंह ने इस बारे में एक सवाल के जवाब में कहा, ''सेना में उत्तराधिकार का कोई क्रम नहीं है. सेना में तरक्की कुछ निर्धारित कसौटियों के आधार पर होती है. इसमें उत्तराधिकार के लिए कोई निश्चित क्रम नहीं है.''
सेना के कुछ प्रमुख अधिकारियों की पदोन्नत्ति में एक साल से ज्यादा का विलंब हुआ है और कुछ की पदोन्नत्ति अब भी रुकी पड़ी है. खाली पड़े प्रमुख महत्वपूर्ण पद हैं: योल (हिमाचल प्रदेश) स्थित 9 कोर में करीब पांच महीने से कोई जीओसी नहीं है. पिछले कई महीनों से कोलकाता स्थित ईस्टर्न कमांड और दीमापुर स्थित 3 कोर में चीफ ऑफ स्टाफ नहीं हैं.
असम राइफल्स भी मुखिया विहीन है क्योंकि इसके लिए कोई महानिदेशक नियुक्त नहीं किया जा रहा. कई महत्वपूर्ण सैन्य प्रतिष्ठानों में मुखिया या वरिष्ठ अधिकारी नहीं हैं जिससे उनका कामकाज सुचारू तरीके से नहीं चल पा रहा है.
बिग्रेडियर से लेकर मेजर जनरल तक के 1979, 1980 और 1981 बैच के अधिकारियों के लिए प्रमोशन बोर्ड की बैठक में देरी हुई है. 1979 बैच के इन अधिकारियों के लिए प्रमोशन बोर्ड की बैठक अक्तूबर, 2010 में बुलाई जानी थी. आखिरकार एक साल बाद अक्तूबर, 2011 में यह बैठक हो सकी. नतीजे अप्रैल, 2012 में घोषित किए गए. इसी तरह 1980 बैच के लिए प्रमोशन बोर्ड की बैठक अप्रैल, 2011 में होनी थी, लेकिन यह अभी तक नहीं हो सकी है.
ए.वी. सिंह समिति ने सैन्य कमांडरों को अपेक्षाकृत युवा रखने की वकालत की है, लेकिन सभी सीनियर रैंकों पर प्रमोशन में देरी की वजह से आलम यह है कि कमांड प्रमुख बनते समय सभी अधिकारी अपनी तय उम्र से एक या दो वर्ष ज्यादा के हो चुके होंगे.
हालांकि जनरल वी.के. सिंह ने कई अच्छे काम भी किए हैं. उन्होंने ऐसे समय में कमान संभाली थी जब सेना की छवि घोटालों से तार-तार हो रही थी. सुकना और आदर्श घोटालों के बाद अपने पूर्ववर्ती जनरल दीपक कपूर के तीस माह के कार्यकाल के दौरान जनरल वी.के. सिंह को भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ने वाले योद्धा के रूप में देखा जाता था.
ईस्टर्न कमांड के सैन्य कमांडर के रूप में अपने कार्यकाल के शुरुआती दौर में जनरल वी.के. सिंह ने एक महत्वपूर्ण दस्तावेज लिखा-ट्रांसफॉर्मेशन ऑफ इंडियन आर्मी (भारतीय सेना का कायापलट).
जनरल वी.के. सिंह तीसरी पीढ़ी के फौजी हैं और उन्होंने सैन्य कमांडर के रूप में सुकना भूमि घोटाले में शामिल ताकतवर जनरलों के खिलाफ कार्रवाई की. जब वे सेना के 24वें प्रमुख बने तो पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने इस बात पर जोर दिया था कि उनकी पहली प्राथमिकता सेना की आंतरिक सेहत में सुधार करने की होगी और इसकी शुरुआत वे शीर्ष से करेंगे. सुकना की 71 एकड़ जमीन के स्वामित्व हस्तांतरण में भूमिका पाए जाने पर 33 कोर के कमांडर ले. जनरल पी.के. रथ और सैन्य सचिव ले. जनरल अवधेश प्रकाश का कोर्ट मार्शल कर दिया गया और उन्हें बरखास्त कर दिया गया था.
ले. जनरल प्रकाश की बरखास्तगी पर सेना प्रमुख ने पिछले हफ्ते ही मुहर लगाई है. उन्हें एक निजी बिल्डर को जमीन देने के लिए सुकना स्थित 33 कोर के अधिकारियों पर दबाव बनाने के मामले में दोषी पाया गया है. बरखास्तगी के बाद अब वे अपने सैन्य रैंक का इस्तेमाल करने का अधिकार खो चुके हैं और उन्हें पेंशन और अन्य सैन्य फायदों से भी वंचित होना पड़ेगा.
जनरल वी.के. सिंह ने सरकार को भी नहीं बख्शा. 25 मई को उन्होंने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री को भेजी उनकी चिट्ठी के लीक होने में रक्षा मंत्रालय की भूमिका है. इस चिट्ठी में उन्होंने प्रधानमंत्री को कई रक्षा सौदों में भारी गड़बड़ियों की जानकारी दी थी. एक टीवी चैनल पर इंटरव्यू में जब जनरल सिंह से इस चिट्ठी के बारे में पूछा गया तो उन्होंने आरोप लगाया, ''यह सारी कवायद ऐसा आभास देने के लिए है कि यह वी.के. सिंह है जो इसे लीक कर रहा है. इसके पीछे किसी व्यक्ति का अपना कुछ एजेंडा था.'' जब उनसे पूछा गया कि यह व्यक्ति सरकार के भीतर का ही है या कोई बाहरी तो उन्होंने जवाब दिया, ''सरकार के भीतर का ही है, बाहर का कौन हो सकता है?''
जनरल वी.के. सिंह ने सुप्रीम कोर्ट के कई न्यायाधीशों की भी आलोचना की थी. एक टीवी इंटरव्यू में उन्होंने कहा, ''मुझे पता है कि सुप्रीम कोर्ट में क्या हुआ था. मैं इसकी गहराई में नहीं जाना चाहता. बाद में मुझे एक बारगी यह लगा था कि हमारे पास वास्तव में इस बात की जो जानकारी है कि चीजें कैसे चल रही हैं, वह सब सामने लाना चाहिए. मैं केवल यह कह सकता हूं कि यदि सुप्रीम कोर्ट के इतने वरिष्ठ न्यायाधीश (न्यायमूर्ति आर.एम. लोढ़ा) कहते हैं कि, 'हवा के अनुकूल चलें' तो मैं वास्तव में इस बात के लिए पश्चाताप ही कर सकता हूं कि मैं कोर्ट क्यों गया. यदि हम सबको 'हवा के अनुकूल' चलने को कहा गया तो हम सब लुटेरे हो जाएंगे, हम सब भ्रष्ट हो जाएंगे. हवा तो उस तरफ ही बह रही है तो क्या हम भी उसी तरफ जाएंगे? इसलिए मुझे लगा कि अब यह खत्म करना होगा. जब मेरे वकील ने मुझ्से पूछा तो मैंने उसे मामला वापस लेने को कहा. बहुत हो चुका. मैं अब कोर्ट में नहीं जाना चाहता.''
अपनी विदाई की पूर्व संध्या पर जनरल वी.के. सिंह ने रक्षा मंत्रालय और सेना मुख्यालय के बीच मतभेदों पर परदा डालने की कोशिश की. नेशनल डिफेंस एकव्डमी की पासिंग आउट परेड को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा, ''रक्षा मंत्रालय और सेना मुख्यालय के बीच कोई मतभेद नहीं है. कुछ निहित स्वार्थी तत्व ऐसा कह रहे हैं, लेकिन इसमें कोई सच्चाई नहीं है.''
निश्चित रूप से लोगों की यह जानने में बेहद दिलचस्पी हो सकती है कि जनरल अब आगे क्या करेंगे. फिलहाल तो ऐसा लगता है कि उनकी प्राथमिकता सैन्य विज्ञान में अपनी डॉक्टरेट पूरी करना है. वे मध्य प्रदेश के बरकतुल्ला विश्वविद्यालय से 'वाखान की जियो-स्ट्रेटजी' पर पीएचडी कर रहे हैं. वाखान चीन, पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच स्थित एक क्षेत्र है. 1976 में अमेरिका के फोर्ट बेनिंग से रेंजर्स कोर्स पूरा करने और 1983 में डिफेंस सर्विस स्टाफ कॉलेज से सैन्य विज्ञान में पीजी करने के बाद अब जनरल वी.के. सिंह 'रिकॉर्ड समय' में अपनी पीएचडी पूरी करना चाहते हैं.
उनकी शिक्षण कार्य से भी जुड़ने की योजना है. जनरल वी.के. सिंह के पास भारत और कई दूसरे देशों के विभिन्न विश्वविद्यालयों से सैन्य विज्ञान और सामरिक नीति पढ़ाने के प्रस्ताव हैं. उन्हें कई जगहों से लेक्चर देने के भी आमंत्रण और प्रस्ताव मिल रहे हैं. लेकिन उनके राजनीति में उतरने को लेकर भी काफी कयास लगाए जा रहे हैं.
22 अप्रैल को वे पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर की प्रतिमा का अनावरण करने के लिए उत्तर प्रदेश के बलिया गए थे और उन्होंने वहां कई राजपूत नेताओं से भी मुलाकात की. इसके बाद 14 मई को उन्होंने हरियाणा के झ्द्गजर स्थित पालरा में पूर्व सैनिकों की एक रैली को संबोधित किया. इस बात को लेकर भी जिज्ञासा है कि क्या वे बाबा रामदेव या अण्णा हजारे के साथ जुड़ेंगे?
जनरल वी.के. सिंह के एक करीबी सहयोगी ने बताया, ''जनरल भ्रष्टाचार के खिलाफ अपनी लड़ाई जारी रखेंगे और हथियार लॉबी, जनरलों और सरकारी अफसरों के बीच गठजोड़ को उजागर करते रहेंगे, लेकिन वे न तो किसी राजनैतिक पार्टी से जुड़ेंगे और न ही किसी संगठन का समर्थन करेंगे. हालांकि जनरल वी.के. सिंह के भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाने में जो भी साथ देना चाहता है, उन सभी का स्वागत है.''
जनरल वी.के. सिंह भले ही रिटायर हो गए हैं लेकिन पीछे नहीं हटे हैं.

