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उत्तर प्रदेश सरकार से अन्नदाताओं की आस

समाजवादी पार्टी (सपा) को बहुमत मिलने की खबर प्रसारित होते ही ललितपुर जिले के पुराखुर्द के किसान झूम उठे. वजहः सपा सरकार बैंकों से लिए गए 50,000 रु. तक के कर्ज माफ कर देगी. सपा प्रमुख मुलायम सिंह यादव ने अपनी सभी रैलियों में किसानों का कर्जा माफ करने की घोषणा की थी.

अपडेटेड 11 मार्च , 2012

समाजवादी पार्टी (सपा) को बहुमत मिलने की खबर प्रसारित होते ही ललितपुर जिले के पुराखुर्द के किसान झूम उठे. वजहः सपा सरकार बैंकों से लिए गए 50,000 रु. तक के कर्ज माफ कर देगी. सपा प्रमुख मुलायम सिंह यादव ने अपनी सभी रैलियों में किसानों का कर्जा माफ करने की घोषणा की थी. उनकी घोषणा के बाद से ही राज्‍य के विभिन्न जिलों के किसानों ने कर्ज की किस्तें रोक दीं.

पुराखुर्द गांव में रहने वाले 27 किसानों ने इस बार जाड़े में बैंक से कर्ज लेकर अदरक की खेती की. भीषण जाड़े के चलते पूरी फसल तबाह हो गई. किसान हरिराम बताते हैं कि पिछले साल ग्रामीण बैंक से लिए गए 50,000 रु. के कर्ज को अब चुकाने का समय आ गया था. वे कहते हैं, ‘जनवरी में जब यह सुना कि सपा सरकार बनने पर किसानों का कर्ज माफ हो जाएगा तो इस आस में बैंक के नोटिस का जवाब नहीं दिया.’

झांसी के चिरागांव निवासी रामप्रसाद पर भी 60,000 रु. का कर्ज है और उन्होंने ‘पहली किस्त भी जमा नहीं की है. हमीरपुर और झंसी के जिला कृषि अधिकारी कार्यालयों के मुताबिक, करीब एक लाख से अधिक किसानों ने बैंकों से कर्ज ले रखा है. बहराइच में तरनपुर के कई किसानों ने भी बैंकों को अपने कर्ज की किस्तें रोक दी हैं. किसान सरवर खान बताते हैं, ‘समाजवादी पार्टी ने सरकार बनने के बाद कर्ज माफी की बात कही है ऐसे में जनवरी और फरवरी के महीने की किस्तें नहीं जमा की हैं.’ बहराइच के सहकारी समितियां के सहकारी निबंधक ए.के. सिंह बताते हैं कि वहां किसानों को कर्ज के रूप में करीब 6 करोड़ रु. बांटे गए हैं.

कानपुर के रौतापुर निवासी किसान अशोक कुमार अवस्थी, पुखरायां निवासी अनूप सचान और चौबेपुर निवासी सिद्घनाथ उन हजारों किसानों की सूची में शामिल हैं जिन्होंने किस्तें देनी बंद कर दी हैं. इसी तरह महाराजगंज के कोलहुई स्थित स्टेट बैंक ऑफ इंडिया की शाखा से कर्ज लेने वाले किसान राजेंद्र कुमार और प्रदीप ने भी कर्ज अदायगी रोक दी है.

लखनऊ के जिला कृषि अधिकारी ओ.पी. मिश्र बताते हैं कि बीते एक वर्ष के दौरान लखनऊ के 40,324 किसानों को 92.17 करोड़ रु. का कर्ज बांटा गया है. लेकिन पिछले दो महीने में दूसरे जिलों की तरह यहां भी डिफॉल्टर किसानों की संख्या में 20 गुना से अधिक का इजाफा हो चुका है.

किसान नेता सुनील सिंह कहते हैं कि पिछली सरकारों के उदाहरणों ने भी किसानों में कर्ज माफी की आस जगा दी है. सुनील के मुताबिक 1993 की सपा सरकार और 2007 में केंद्र सरकार ने प्रदेश में किसानों का 78,000 रु. तक का कर्ज माफ कर दिया था. कर्ज माफी की घोषणा से एक ओर जहां किसानों को राहत मिली है वहीं दूसरी ओर बैंकों की दिक्कतें बढ़ गई हैं. कानपुर में स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के स्टाफ एसोसिएशन के जोनल मंत्री सुशील पांडेय कहते हैं कि रिकवरी के आखिरी महीने में कर्ज माफी के वादे से बैंकों को नुकसान हो सकता है.

असल में सपा सरकार के लिए किसानों का कर्ज माफ करना इतना आसान नहीं होगा. राज्य के कृषि निदेशालय में तैनात एक उच्च अधिकारी बताते हैं कि राज्य में करीब 30 लाख किसान ऐसे हैं जिन्होंने विभिन्न सहकारी समितियों, सहकारी और राष्ट्रीयकृत बैंकों से फसली ऋण, खाद और उपकरण खरीदने के लिए कर्ज लिए हैं. यदि इन किसानों के 50,000 रु. तक के ऋण माफ होते हैं तो करीब 15,000 करोड़ रु. का इंतजाम करना होगा. नई सरकार को 19,000 करोड़ रु. का राजकोषीय घाटा पिछली सरकार से उपहार के तौर पर मिला है. लेकिन सपा के प्रदेश प्रवक्ता राजेंद्र चौधरी बताते हैं कि पार्टी प्रदेश की माली हालत से वाकिफ है और घोषणापत्र में ऐसी बातें नहीं कही गईं जिसे पूरा नहीं किया जा सके. किसानों का कर्ज हर हाल में माफ होगा.

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