भारत दुनिया के उन देशों में है जहां रेस्तरां का कारोबार करना बेहद पेचीदा है. कारोबारी सहूलियत के मामले में भारत ने भले ही बड़ी छलांग लगा ली हो लेकिन आज भी यहां कोई बिजनेस करना आसान नहीं है. भारत ने कारोबारी सहूलियत (ईज ऑफ डूइंग बिजनेस) में 2014 के 142 वें स्थान से 2019 में 63 वें स्थान की छलांग जरूर लगा लगी है लेकिन यह ऊंट के मुंह में जीरे जैसा है.
आर्थिक सर्वेक्षण 2019-20 के मुताबिक, भारत में रेस्तरां शुरू करने के लिए 16 लाइसेंस लगते हैं जबकि सिंगापुर और चीन में सिर्फ चार लाइसेंस की जरूरत होती है.
भारत में 61 अरब डॉलर (करीब 4.27 लाख करोड़ रु.) का रेस्तरां बाजार है जबकि चीन में ये 815 अरब डॉलर यानी भारत के मुकाबले 13 गुना ज्यादा. बार और रेस्तरां दरअसल नौकरियां पैदा करने वाला महत्वपूर्ण सेक्टर है. सर्वे में नेशनल रेस्तरां एसोसिएशन ऑफ इंडिया के हवाले से बताया गया है कि बेंगलूरू में रेस्तरां खोलने के लिए 36, दिल्ली में 26, मुंबई में 22 तरह की मंजूरियां चाहिए होती हैं.
सबसे ज्यादा 45 तरह के दस्तावेज दिल्ली पुलिस से लाइसेंस लेने में लगते हैं.
विरोधाभास देखिए, दिल्ली पुलिस से हथियार का लाइसेंस लेने के लिए 19 और आतिशबाजी का लाइसेंस लेने के लिए महज 12 तरह के दस्तावेज लगते हैं. भारत में सिर्फ रेस्तरां खोलने के लिए आवश्यक लाइसेंस की सूची ही आपको सरकारी वेबसाइट पर मिलेगी. दूसरी ओर, न्यूजीलैंड में ऑकलैंड काउंसिल की वेबसाइट में अनुमति, फीस और रेस्तरां खोलने की समय सूची भी आपको ऑनलाइन मिलती है. यही नहीं वेबसाइट में रेडी टु यूज बिजनेस प्लान भी मिल जाते हैं जिनसे कारोबार करने का खाका खींचा जा सकता है. यह विरोधाभास ही सरकर के नियंत्रण और सरकार के मददगार होने की नीयत दिखाता है.
चीन, न्यूजीलैंड, ब्राजील और इंडोनेशिया के मुकाबले भारत में कोई कारोबार करना अब भी टेढ़ी खीर है. प्रॉपर्टी रजिस्ट्रेशन, टैक्स भुगतान और मंजूरियां लेने में कारोबारी को पसीना छूट जाता है.
आर्थिक सर्वेक्षण 2019-20 के मुताबिक, भारत में बिजनेस शुरू करने में अब औसतन 18 दिन लगते हैं जबकि 2009 में ये अवधि 30 दिन थी. जबकि न्यूजीलैंड में सिंगल विंडो सिस्टम है और बिजनेस शुरू करने में आधे दिन का वक्त और काफी कम पैसे लगते हैं. भारत में टैक्स चुकाने में साल के करीब ढाई सौ घंटे लगते हैं जबकि न्यूजीलैंड में ये अवधि 140 घंटे लगते हैं. यह बताना दिलचस्प है कि न्यूजीलैंड में 2009 के मुकाबले 2019 में ये अवधि दोगुनी बढ़ गई है यानी 2009 में साल के 70 घंटे लगते थे.
भारत में भारी भरकम सरकारी प्रक्रियाएं मैन्युफैक्चरिंग शुरू करने की सबसे बड़ी बाधा हैं. आर्थिक सर्वे में फिक्की के आंकड़ों के हवाले से बताया गया है कि मैन्युफैक्चरिंग वाला उद्य़ोग शुरू करने में भारत में 51 तरह के कानूनों में धाराओं और नियमों को मिला दिया जाए तो 6796 प्रावधानों का पालन करना होता है. इसमें भी हर राज्य का शॉप ऐंड स्टैबलिशमेंट एक्ट अलग-अलग है.
यहां उल्लेख कर देना जरूरी है कि हर नियम और कानून सभी उद्योगों पर लागू नहीं होता है जैसे पेट्रोलियम एक्ट, मोटर व्हीकल ऐक्ट कुछ खास उद्योगों पर ही लागू होते हैं.

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