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कोविड के खिलाफ जंग में लगातार बदल रहे तौर-तरीके

कोरोना वायरस के इलाज और रोकथाम के तौर-तरीकों में लगातार बदलाव हो रहे हैं. अब कोरोना वायरस से संक्रमित मरीजों को कोविड-19 के अस्पतालों में ज्यादा दिन तक नहीं रखा जाएगा.

प्रतीकात्मक फोटो
प्रतीकात्मक फोटो
अपडेटेड 27 मई , 2020

जिस तरह कोरोना वायरस का ट्रेंड पूरे देश में बदल रहा है, उसी तरह इसके इलाज और रोकथाम के तौर-तरीकों में लगातार बदलाव हो रहे हैं. पहले कंटेनमेंट जोन का दायरा एक किलोमीटर का था जो अब 250 मीटर और पांच सौ मीटर तक सीमित हो गया है. इसी तरह अब कोरोना वायरस से संक्रमित मरीजों को कोविड-19 के अस्पतालों में ज्यादा दिन तक नहीं रखा जाएगा. कम लक्षण वाले और तीव्र लक्षण वाले कोरोना वायरस संक्रमितों को रिपोर्ट निगेटिव आने के बाद अधिकतम 12 दिन तक कोविड अस्पताल में और सात दिन घर में आइसोलेशन में रहना होगा.

केंद्र सरकार के स्वास्थ्य मंत्रालय की गाइडलाइन के तहत प्रदेश सरकार ने कोरोना वायरस के मरीजों को कोविड अस्पताल से डिस्चार्ज करने के लिए नई पॉलिसी बनाई है. चिकित्सा शिक्षा विभाग के प्रमुख सचिव डा. रजनीश दुबे ने ये दिशा-निर्देश जारी कर दिए हैं. प्रारंभिक लक्षण वाले मरीज़ों का पहला सैंपल, जिसमें मरीज़ कोरोना पॉजिटिव पाया जाता है, उसे 12 दिन तक कोविड-19 के आइसोलेशन बेड पर रखा जाएगा. यह वे मरीज़ हैं जिनको हलकी खाँसी, बुखार, गले में दर्द अथवा गले में खराश जैसे कोरोना वायरस के लक्षण पाए गए हों. जांच पॉजिटिव पाए जाने के बाद 12वें दिन इनकी नमूने की फिर जांच की जाएगी. इसी तरह कोरोना संक्रमित की मौत होने पर उसे शुरू में कोविड मृत्यु के रूप में शामिल कर लिया जाता था. अब संक्रमित की मौत के बाद संबंधित अस्पताल से उसकी पूरी हिस्ट्री का चार्ट अपर निदेशक स्वास्थ्य के पास भेजा जाता है. वहां ऑडिट करने वाली टीम हिस्ट्री को जांचती है और मौत के कारणों को पता करती है.

कोरोना संक्रमित की मौत के बाद यह हैं नियमः-

#यदि किसी की मौत अस्पताल में हुई हो या कोविड 19 मरीज मृत अवस्था में अस्पताल पहुंचा हो तो प्रशासन सिर्फ प्रशिक्षित हेल्थवर्कर को ही शव को पैक करने के काम में लगाएगा.

#अस्पताल ही श्मशान घाट या कब्रगाह तक मृत शरीर को पहुंचाने के लिए शव वाहन देगा, जिससे कि मृत शरीर से संक्रमण ना फैले.

#भारत सरकार की गाइडलाइन को मानते हुए परिजनों को पूरी तरह से पैक की गई डेड बॉडी ही दी जाएगी.

#यदि किसी केस में कोई परिजन नहीं मिलता है तो अस्पताल उसे पैक कर और कीटाणुशोधन कर लाशघर में रख देगा.

#यदि किसी पॉजिटिव की मौत कोविड केयर सेंटर, कोविड हेल्थ सेंटर या कोविड टेस्टिंग सेंटर में होती है तो भी संबंधित अस्पताल प्रशासन को ही उसकी देखभाल करनी होगी. सिर्फ उनके लिए शव वाहन की व्यवस्था डीएम द्वारा की जाएगी.

#यदि किसी कोरोना पॉजिटिव शख्स की मौत हेल्थ केयर से बाहर घर पर होती है तो परिजनों को इसकी जानकारी डीएम को देनी होगी. उसके बाद मृत शरीर को पैक करने और कीटाणुशोधन करने की जिम्मेदारी अस्पताल की होगी और शवदाह गृह या कब्रगाह पहुंचाने की जिम्मेदारी जिलाधिकारी की होगी.

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