अखिलेश सरकार ने 22 जून को अपनी सरकार के 100 दिन पूरे किए तो इसी सरकार के कद्दावर मंत्री शिवपाल सिंह यादव ने अपने विभाग में कार्यरत भ्रष्ट अधिकारियों को निलंबित करने का आंकड़ा 100 तक पहुंचा दिया. सिलसिला इसके बाद भी जारी है. लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी), सिंचाई और सहकारिता विभाग के अब तक निलंबित अधिकारियों की संख्या 125 तक पहुंच चुकी है.
मायावती सरकार के बीते पांच साल के दौरान जहां एक ओर मुलायम सिंह यादव और अखिलेश यादव पार्टी संगठन को मजबूत कर रहे थे तो दूसरी ओर मुलायम के छोटे भाई शिवपाल बहुजन समाज पार्टी (बीएसपी) सरकार में हो रहे भ्रष्टाचार पर पैनी निगाह रख रहे थे. भ्रष्टाचार से जुड़े दस्तावेज जुटाने और उन्हें मीडिया के सामने उजागर करने का जिम्मा शिवपाल ने ही संभाला. ऐसे में सरकार बनते ही तय हो गया कि पिछली सरकार में हुई गड़बड़ियों के खिलाफ शिवपाल काफी मुखर होंगे.
19 मार्च से लोक निर्माण और सिंचाई मंत्री के रूप में काम शुरू करने के साथ उन्होंने अपने इरादे साफ कर दिए. अपने पहले ही आदेश में उन्होंने बीएसपी सरकार के दौरान लखनऊ और नोएडा में बने पार्कों और स्मारकों में लगाई गई मूर्तियों को बार-बार तोड़ने के बारे में अफसरों से रिपोर्ट तलब कर भ्रष्टाचार के खिलाफ मुहिम का आगाज कर दिया. 13 अप्रैल यानी आंबेडकर जयंती के एक दिन पहले शिवपाल ने लखनऊ के आंबेडकर पार्क समेत मायावती के सभी ड्रीम प्रोजेक्ट से जुड़े जनरल मैनेजर, प्रोजेक्ट मैनेजर, मैनेजर समेत 50 दागी इंजीनियरों को हटाकर उन्हें मुख्यालय से संबद्ध कर दिया. अगले ही दिन शिवपाल ने लखनऊ में लोक निर्माण विभाग द्वारा बनाई गई सड़कों का निरीक्षण किया और लखनऊ-कानपुर तथा हरदोई-सीतापुर रोड निर्माण में गड़बड़ी के आरोपी 15 इंजीनियरों को एक साथ निलंबित कर दिया. समाजवादी पार्टी (सपा) की सरकार बनने के बाद यह पहला मौका था, जब इतनी बड़ी संख्या में अधिकारी एक साथ निलंबित किए गए. फिर तो निलंबन का सिलसिला चल पड़ा. शिवपाल कहते हैं, ''बीएसपी की सरकार में अधिकारी इतने ताकतवर हो गए थे कि इन पर किसी का अंकुश नहीं था. इन्होंने जहां चाहा, वहां भ्रष्टाचार किया, जमीन ही नहीं, नदी को भी नहीं बख्शा.'' नोएडा के पास यमुना नदी के कैचमेंट एरिया में अवैध रूप से फार्म हाउस बना डाले गए. शिवपाल कहते हैं, ''बीएसपी सरकार के दौरान हो रही गड़बड़ियों पर सपा की नजर थी और हर जिले से कार्यकर्ता भ्रष्टाचार की शिकायत कर रहे थे. अब इन सभी की जांच कराई जा रही है.'' (देखें: बातचीत).
सिंचाई विभाग के एक अधिकारी शिवपाल सिंह की कार्यप्रणाली की तुलना बीएसपी सुप्रीमो मायावती से करते हैं. जिस तरह मायावती जिलों का औचक निरीक्षण कर मौके पर ही अधिकारियों को निलंबित करती थीं, उसी तरह शिवपाल ने भी अब तक एक दर्जन से अधिक परियोजनाओं का औचक निरीक्षण कर 50 से अधिक अधिकारियों को मौके पर ही निलंबित किया है. मिसाल के तौर पर इलाहाबाद और मिर्जापुर स्थित बाणसागर परियोजना को ही लें. 10 मई को सिंचाई मंत्री अचानक 1,800 करोड़ रु. की इस परियोजना का निरीक्षण करने पहुंच गए. अधिकारियों से परियोजना से जुड़े दस्तावेज मंगाए तो पता चला कि वर्ष 2007 से 2012 के बीच परियोजना पर 1,286 करोड़ रु. खर्च हुए, लेकिन कोई काम नहीं हुआ. शिवपाल ने अनियमितता के आरोप में नौ इंजीनियरों को निलंबित कर दिया और छह की पेंशन रोकने का आदेश दे दिया. सपा के वरिष्ठ नेता और प्रदेश प्रवक्ता राजेंद्र चौधरी कहते हैं, ''शिवपाल सिंह यादव एक निर्भीक नेता हैं. वे कड़े-से-कड़े फैसले लेने में देर नहीं करते.''
शिवपाल को मुख्यमंत्री अखिलेश यादव का पूरा समर्थन हासिल है. व्यस्तता के कारण अखिलेश यादव ने सहकारिता विभाग शिवपाल सिंह को दे दिया और उन्होंने यह पद संभालते ही गड़बड़ियों की जांच के आदेश दे दिए. इस विभाग में अनियमितता बरतने, गेहूं खरीद केंद्रों पर कार्यभार नहीं ग्रहण करने और गेहूं खरीद में रुचि न लेने के आरोप में अब तक 45 अफसरों को निलंबित किया जा चुका है. भले ही सहकारिता, पीडब्ल्यूडी और सिंचाई विभाग के सवा सौ अफसरों को सस्पेंड किया जा चुका हो, लेकिन इतने ही दागी अधिकारियों पर जांच की तलवार अब भी लटकी हुई है.
विरोधी पार्टियां शिवपाल की इस कार्रवाई को दूसरे नजरिए से देख रही हैं. बीएसपी के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष और विपक्ष के नेता स्वामी प्रसाद मौर्य कहते हैं कि शिवपाल अफसरों में निलंबन का एक हौवा खड़ा कर रहे हैं ताकि बाद में वसूली की जा सके. मौर्य कहते हैं, ''यदि कोई अफसर वाकई दोषी है तो उसकी जांच और फिर कार्रवाई होनी चाहिए. बिना जांच के निलंबित करना सवाल खड़े करता है.''
शिवपाल सिंह का निजी आवास लखनऊ में विक्रमादित्य मार्ग पर है और मंत्री के तौर पर उन्हें सरकारी बंगला 8, कालीदास मार्ग पर आवंटित हुआ है. इन दिनों शिवपाल की दिनचर्या की शुरुआत सरकारी आवास से होती है. सुबह ठीक 9 बजे वे अपने निजी आवास से सरकारी आवास पहुंचते हैं. बाहर मुलाकातियों की भीड़ है. भीड़ चाहे कितनी भी हो, शिवपाल दूसरे जिलों से आने वालों को निराश नहीं करते. स्वयं ही फरियादियों के प्रार्थनापत्र लेते है और तत्काल उनकी समस्याओं का निबटारा कर देते हैं. सपा के वरिष्ठ नेता भगवती सिंह शिवपाल की सांगठनिक क्षमता की प्रशंसा करते हैं. वे कहते हैं, ''शिवपाल सिंह यादव की सबसे खास बात यह है वे कार्यकर्ताओं में भेदभाव नहीं करते. आम कार्यकर्ता हो या बड़ा नेता, वे सभी की बातों को भरपूर अहमियत देते हैं. शिवपाल का मिलनसार स्वभाव उन्हें लोकप्रिय बनाता है.''
सपा के युवा मुख्यमंत्री अखिलेश यादव भले ही आज तकनीकी पसंद नेता के रूप में उभरे हों, लेकिन पार्टी के भीतर इसकी नींव शिवपाल सिंह ने ही रखी थी. वर्ष 2006 में जब सभी पार्टियां फोन और फैक्स के जरिए अखबारों या अन्य जगहों से संपर्क साधा करती थीं उस समय बतौर कार्यकारी अध्यक्ष शिवपाल ने सपा के राज्य मुख्यालय के मीडिया सेंटर को इंटरनेट, कंप्यूटर से लैस किया. मीडिया सेंटर के प्रभारी आशीष यादव बताते हैं, ''सभी राजनैतिक पार्टियों में सपा का मीडिया सेंटर पहला सेंटर था, जिसने संचार की आधुनिक तकनीक का उपयोग सबसे पहले शुरू किया.''
क्या सपा सरकार में मुख्यमंत्री अखिलेश यादव और संसदीय कार्यमंत्री आजम खान को मिल रहे महत्व के आगे शिवपाल की शख्सियत खो-सी गई है? सपा के वरिष्ठ नेता और बेसिक शिक्षा विभाग के कैबिनेट मंत्री राम गोविंद चौधरी कहते हैं, ''शिवपाल सिंह सपा के सरदार पटेल हैं. पटेल की तरह शिवपाल भी अपने दृढ़निश्चय और निर्णय लेने की क्षमता के लिए जाने जाते हैं. सपा सरकार और पार्टी में उनकी यही शख्सियत उन्हें एक अलग पहचान देती है.''

