कोरोना संकट के बीच लॉकडाउन की वजह से संसदीय समितियों की बैठक ठप है. ज्यादातर गैर भाजपाई दल बैठक शुरू करने के पक्ष में हैं. लोकसभा अध्यक्ष पर इसके लिए लगातार दबाब बना रहे हैं. खासकर वित्त संबंधी समितियों की बैठक की अनिवार्यता को देखते हुए बैठक आहूत करने पर फैसला जल्द हो सकता है.
लोकसभा सचिवालय से मिली जानकारी के मुताबिक लोकलेखा समिति, इस्टिमेट कमेटी तथा पब्लिक अंडरटेकिंग कमेटी की बैठक आहूत बुलाने का आग्रह ज्यादातर सदस्य कर रहे हैं. लेकिन संवैधानिक दिक्कत यह है कि समितियों की बैठक कैमरे में नहीं हो सकती. इसलिए वीडियों कांफ्रेंसिंग के जरिए यह बैठक आहूत नहीं किया जा सकता है.
लोकसभा सचिवालय ने यह पहले ही स्पष्ट कर दिया था. इसके बाद बीजद के नेता भर्तृहरि माहताब ने लोकसभा अध्यक्ष को इस बावत पत्र लिख कर कहा है कि वह कैमरे में समितियों की बैठक नहीं किए जाने के प्रावधान को संशोधित करने का विचार करें. उन्होंने कई देशों का उदाहरण देते हुए कहा है कि कोरोना के दौरान दुनिया के कई देशों में वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए इस तरह की बैठक हो रही है.
सूत्रों का कहना है कि भाजपा के कुछ नेताओं ने यह तर्क रखा है कि यदि वीडियों कांफ्रेंसिंग के जरिए बैठक करना संभव नहीं है तो फिर इन बैठकों को जरूरी श्रेणी में रखते हुए सदस्यों को बैठक में शामिल होने के लिए आने की अनुमित दी जा सकती है और उनके परिवहन की व्यवस्था भी की जानी चाहिए.
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला इन सभी सुझावों पर विचार कर रहे हैं और उम्मीद है कि कोई फैसला जल्द ही लेंगे. विदित हो कि संसदीय व्यवस्था में 50 समितियां हैं जिनमें लोक लेखा समिति सबसे प्रमुख है. यह सरकार के विभिन्न विभागों के खर्च का परीक्षण करती है और अपनी रिपोर्ट संसद में पेश करती है.
***

