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लॉकडाउन की वजह से हरिद्वार में गंगा का पानी हुआ साफ, शुद्ध हुई आबोहवा

वैज्ञानिकों के अनुसार गंगा के साफ़ पानी की वजह, इसके पानी में घुले डिसॉल्वड सॉलिड की मात्रा में आई 500 प्रतिशत की कमी आई है. तीर्थ नगरी में मौजूद धर्मशाला, होटल-लॉज से आने वाले सीवर और अन्य प्रदूषकों में कमी की वजह से ऐसा हुआ है. पानी की गुणवत्ता में आया असर साफ़ दिखाई दे रहा है. ऋषिकेश में इस पानी को डिसइंफेक्ट कर पिया जा सकता है.

साफ हुई नैनीताल झील
साफ हुई नैनीताल झील
अपडेटेड 15 अप्रैल , 2020

अखिलेश पांडे

लॉकडाउन की वजह से पैदा हुईं कई दिक्कतों के बीच प्रदूषम का घटा हुआ स्तर पूरे देश में लगातार चर्चा में है. देश के प्रमुख तीर्थ हरिद्वार और ऋषिकेश में गंगा जल पानी पीने योग्य बन गया है. वैज्ञानिकों के अनुसार गंगा के साफ़ पानी की वजह, इसके पानी में घुले डिसॉल्वड सॉलिड की मात्रा में आई 500 प्रतिशत की कमी आई है. तीर्थ नगरी में मौजूद धर्मशाला, होटल-लॉज से आने वाले सीवर और अन्य प्रदूषकों में कमी की वजह से ऐसा हुआ है. पानी की गुणवत्ता में आया असर साफ़ दिखाई दे रहा है. ऋषिकेश में इस पानी को डिसइंफेक्ट कर पिया जा सकता है. हरिद्वार में ये नहाने योग्य है और कुछ ट्रीटमेंट के बाद पीने योग्य भी इसे आसानी से किया जा सकता है. उत्तराखंड पर्यावरण प्रदूषण बोर्ड के द्वारा किए गए अध्ययन भी यहां के प्रदूषण में आई गिरावट की पुष्टि कर रहे हैं.

उत्तराखंड के प्रमुख पर्यटन शहर हों या फिर इस देवभूमि के धार्मिक महत्व के तीर्थ या फिर आध्यत्मिक नगर इन सबमे भी लाक डाउन के चलते यहां के पर्यावरण पर अनुकूल असर दिखा है. अप्रैल मई और जून के महीनों में यहां लगभग सभी शहरों कस्बों में लोगों की भीड़ लगी रहती थी लेकिन इन दिनों लॉकडाउन से यहां सन्नाटा पसरा हुआ है. झील नगरी नैनीताल समेत भीमताल, नौकुचियाताल, सातताल सभी में झीलों का पानी न केवल पारदर्शी और निर्मल दिखाई दे रहा है बल्कि इन झीलों की ख़ूबसूरती भी काफी बढ़ गई दिखती है.

साथ ही पिछले कई सालों से झील के जलस्तर में जो गिरावट दिखती थी वह भी अब इस बार नहीं दिख रही. शहर की सड़कों को साफ़ सुथरा और चमकदार देखा जा सकता है. कुमाऊं, विश्वविद्यालय में वनस्पति विज्ञान विभाग के प्रोफेसर ललित तिवारी के अनुसार यह सब शहर के होटलों में लटके तालों रेस्तौरेंट्स के बंद होने से उनसे छोड़े जाने वाली गंदगी में आई कमी के कारण हुआ है । झील के पानी में मछलियों का झील की सतह पर आकर अठखेली करना भी देखते बन रहा है.

लॉकडाउन से सन्नाटा इस कदर इन पर्यटक शहरों में छाया है कि दिन दोपहर तेंदुए के शावक शहर की ठंडी रोड में खुले आम छल कदमी करते दिखे. हरिद्वार में जो कि राजाजी टाइगर रिजर्व से लगा है में गजराज के हर की पौड़ी में आ धमकने से लोग हैरान हैं. पिछले 7अप्रैल को सुबह सवेरे गजराज हर की पौड़ी घाट में स्नान करने आ धमके उसके बाद उन्होंने मुख्य शहर का फेरा लगाया लाक डाउन के चलते ड्यूटी में लगे पुलिस कर्मी इस मंजर को देख सहम गए किसी तरह सायरन बजाकर गजराज को विदा किया गया.

वैज्ञानिकों के अनुसार हरिद्वार में हर की पौड़ी घाट, जहां रोज लाखों श्रद्धालुओं का आना-जाना होता था, लॉकडाउन के कारण उनका आना बंद है।पानी की गुणवत्ता में 40-50 प्रतिशत सुधार हुआ.

गंगा आज स्वच्छ और शुद्ध होती दिख रही है. जिस स्वच्छता और निर्मलता के लिए सरकारें करोड़ों रूपये खर्च करके परिणाम नहीं ला स्की वह परिणाम लाक डाउन ने स्वत दे दिए. मछली और अन्य जीव पानी में साफ दिखाई देते हैं. घाट पूरी तरह से साफ हैं. एक अन्य पुजारी ने कहा कि हम गंगा को इसी तरह साफ देखना चाहते हैं, लॉकडाउन के कारण ऐसा हो सका है लेकिन हमें खुशी होगी अगर श्रद्धालुओं के आने के बाद भी गंगा का पानी इसी तरह स्वच्छ रहे. विशेषज्ञों के अनुसार, पहले की तुलना में गंगा के पानी की गुणवत्ता में 40-50 प्रतिशत सुधार हुआ है.

पर्यावरणीय तौर पर इस कारण हवा भी इतनी शुद्ध है कि शहरों से पहाड़ों की चोटियाँ साफ़ दिख रही हैं. उत्तराखंड स्पेस अप्लिकेशन सेंटर के निदेशक डॉ. एमपीएस बिष्ट के अनुसार हिमालय की धवल चोटियाँ साफ़ दिखने लगी है. उनके अनुसार गंगा के घाटों में भी रमणीकता दिखाई देने का यही कारण है कि वहां तीर्थयात्रियों की आवाजाही बंद होने से जहां साफ़ सफाई बढी वहीं गंगा घाटों के मंदिर भी बंद होने से उनसे उत्पन्न कचरे में स्वयं रोक लगने से जहां गंगा घाट साफ़ और सुंदर हो गए गंगा भी निर्मल हो गई.

इतना ही नहीं स्वच्छता का आलम हर कहीं दिखने लगा है नीला आसमान हर जगह से दिखने लगा है. बाग बगीचे सुंदर हो गए हैं पक्षियों के मधुर स्वर भी लौट आए हैं ।कहीं शोरोगुल नहीं सुनाई दे रहा. चारधाम बर्फ से लदे हुए इतनी चमक बिखेर रहे हैं कि वहन पहुँच सूर्य की रोशिनी आँखों को चौधिया देती है.

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