अर्चना पैन्यूली/लॉकडाउन डायरीः चार
जनवरी अंत से हमने, डेनमार्क में चीन से निर्यात हुआ कोरोना वायरस के बारे में सुनना शुरू किया, तब तक यह चीन के बाहर साउथ कोरिया, जापान, इरान देशों तक फैला था, और हम इसे अपने से बहुत दूर समझते थे, और सोचते थे कि यह हम तक नहीं पहुंचेगा. मगर जब इसने इटली में धावा बोला और वहां कई लोगों को अपनी चपेट में लेलिया तो हमारी आंखे खुली, क्योंकि हम इटली से बहुत दूर नहीं हैं. हमें विश्वास हो गया था कि वह दिन दूर नहीं जब यह उड़ कर डेनमार्क तक आ जायेगा.
फिर फरवरी में 2019-20 कोरोनोवायरस डेनमार्क की मुख्य भूमि तक पहुंच ही गया. हालांकि 27 फरवरी 2020 को डेनमार्क में कोविड-19 का पहला पुष्ट मामला आया था, मगर डेनिश सरकार ने 24 फरवरी से ही इस महामारी का सामना करने की तैयारी शुरू कर दी थी. डेनिश हेल्थ ऑथिरिटी एंव डेनिश नेशनल बोर्ड ऑफ़ हेल्थ ने वेबसाइट्स का निर्माण किया, सभी कार्यालयों को आदेश जारी हुए कि वे अपने कर्मचारियों को जागरूक करें, स्वयं के स्वास्थ्य का ध्यान रखें और दिशानिर्देशों का पालन करके अन्य लोगों की रक्षा करें.
खैर, डेनमार्क में कोरोना का प्रकोप बढ़ता गया, और आठ मार्च से वृद्धि दर घातीय हो गई. नौ मार्च से ग्यारह मार्च तक, यानी दो दिनों में संक्रमित व्यक्तियों की संख्या 90 से बढ़ कर 500 के करीब हो गई. 5.8 मिलियन वाले एक छोटे से देश, डेनमार्क में ये आंकड़े काफी थे. 11 मार्च, रात्रि साढ़े आठ बजे डेनमार्क की प्रधानंत्री मेत्ते फ्रेडरिकसन ने प्रेस कांफ्रेंस बुलाई और डेनमार्क के सभी स्कूल, कार्यालय, लाइब्रेरी, जिम और अन्य स्पोर्ट्स सेंटर्स को 13 फरवरी से 27 फरवरी, दो हफ्ते तक लिए बंद रखने की घोषणा कर दी। मगर सुपरमार्कट, रेस्टोरेंट, परचून की दुकानें चलती रही..
संकट से निपटने और बचने की युक्तियां
जैसे ही लॉकआउट की घोषणा हुई सरकार ने फटाफट लॉकआउट के परिणामों से निपटने के लिए ठोस कदम उठाने शुरू कर दिए. कई मंत्रालय सक्रिय हुए. वेबसाइट्स विकसित की, गाइडलाइंस बनाई, पैकेजस निकाले. रोजगार मंत्रालय के क्षेत्र में रोजगार के प्रयासों और लाभों के लिए दिशानिर्देश जारी हुए. हर नगर पालिका में निजी व्यवसाय करने वाले - दुकानदार, कियोस्क, रेस्टोरेंट, छोटी-बड़ी कम्पनियों के मालिकों और प्रबंधकों को पैकेजस के सन्दर्भ में तत्काल मेल भेजी गई कि अगर उन्हें कोई नुकसान हो रहा है तो सरकार मदद करेगी. बहुत सारे नियम बनाये, सिस्टम चालू हुए. छोटे से छोटे बिजनेसमेन को भी सूचित किया गया कि उन्हें म्युनिसिपेलिटी से किस प्रकार का सहयोग मिलेगा. उन्हें सूचना के साथ-साथ तुरंत दिशानिर्देश मिले और आर्थिक मदद भी.
सरकार ने कोरोना प्रभावित फ्रीलांसरों और कलाकारों की भी सहायता की. कल्चरल मिनिस्ट्री ने गायकों, कलाकारों और लेखकों को उनके प्रोग्राम केंसल होने की वजह से जो उन्हें आर्थिक हानि हुई, उसकी भरपाई की। रेडियों और टीवी चैनलों को आदेश दिए गये कि केवल स्थानीय कलाकारों के ही कार्यक्रम प्रस्तुत करके उन्हें प्रमोशन दे.
बिजनेस के सिलसिले में डेनमार्क आये लोग यहां फंस गये थे. अल्पकालीन रोजगार में लोगों की नौकरियां खतरे में पड़ गई थी. डेनिश सरकार से उन्हें आर्थिक मदद मिल रही हैं। वालंटियर फेसबुक पेज बने, जवान और फिट लोग असाध्य बुजुर्गों की मदद के लिए आगे आये - उनके घरों में राशन इत्यादि भिजावाने का जिम्मा लिया.
स्कूल, कॉलेज के विद्यार्थियों के लिए डिजिटल प्लेटफार्म पर ऑनलाइन टीचिंग की व्यवस्था की गई. अध्यापक तीन-चार डिजिटल प्लेटफोर्म पर अपने विद्यार्थियों को रिमोट टीचिंग दे रहें हैं, बच्चे और उनके माता-पिता अपना पूरा सहयोग दे रहें हैं. माइक्रोसोफ्ट टीम्स का बहुत अधिक उपयोग हो रहा है.
आजकल डिजिटलीकरण से यह लाभ है कि लोग घर बैठे कर ऑनलाइन काम कर सकते हैं, फिर डेनमार्क में लोग बड़े पैमाने पर कंप्यूटर या अन्य डिजिटल उपकरणों का उपयोग करते हैं. इससे सौ फीसदी तो नहीं मगर एक तिहाई, स्कूलों की टीचिंग चल रही है और ऑफिसों का काम हो रहा है. बस और ट्रेन की आवृत्ति बहुत अच्छी है, जिससे कम से कम भीड़ स्टेशनों और वाहनों में होती है. साथ में सरकार की तरफ से सुझाव, दिशानिर्देश नियमित पारित होते रहते हैं. सरकार की एक वेबसाईट पर सारे मंत्रालयों की सूचनाएं हर दिन अपडेट होती रहती हैं, ताकि लोगों को एक वेबसाईट पर ही सारी जानकारी मिल जाए.
सरकार नागरिकों को सतर्क करती रहती हैं कि वे अनावश्यक यात्रायें न करें. शारीरिक संपर्क सीमित करें, सफाई का ध्यान दें, सामाजिक दूरी बना कर रखें. पौष्टिक भोजन, कसरत वगैरह करके अपनी रोग प्रतिरोधक शक्ति दुरुस्थ रखें. दिन में एक बार खुली हवा में जरुर निकले. डेनमार्क भीड़-भड़क्का वाला देश नहीं है. चौड़ी-खुली सड़कें, साइकिल पथ, पार्क-उपवन से देश लेस है, इसलिए लोग दिन में एक बार बाहर निकल ही जाते हैं, एक दूसरे से प्रयाप्त दूरी बनाये रखते हैं. सुपरमार्कट पर सेनीटाईजर्स लगे हैं, काउन्टर पर ग्राहकों को एक दूसरे से दूरी रखने लिए, फर्श पर लाल टेप चिपके हैं.
लोग यहाँ स्वयं भी बहुत जागरूक हैं, खुद ही बहुत सचेत रहते हैं। जिन परिवारों के बच्चों को लॉकआउट की वजह से दूसरे देशों से लौट कर अपने घर आना पड़ा, उनके माता-पिता ने उन्हें 14 दिनों तक कोरांटीन में रखा. "सॉरी", मानाकि तुम हमारे बच्चे हो, लेकिन हमें अपनी हिफाजत करनी है. एक तरफ छोटे बच्चों के वर्किंग माता पिता को अपने बच्चों के साथ समय बिताने अगर यह एक अवसर है तो दूसरी तरफ घर से बच्चों के साथ काम करना चुनौतीपूर्ण भी है.
खैर अन्य देशों की तरह डेनमार्क में भी कोविड-19 अपना प्रभाव दिखाता रहा और थमने का नाम नहीं लिया तो डेनिश सरकार ने 23 मार्च को लॉकडाउन की अवधि बढ़ा कर 13 अप्रेल तक कर दी. अब रेस्टोरेंट वगैरह भी सब बंद, केवल आवश्यक सुपरमार्कट खुले रहेंगे. लोग अपने घरों में कैद कोरांटीन में रह रहें हैं, कुछ एक चक्कर बाहर का काट आते हैं.
अगर किसी को बीमारी के लक्षण उभर आते हैं तो वह सीधे अस्पतान नहीं जा सकता. उसे अपने डॉक्टर को फोन करना पड़ता है. अधिकतर मामलों में डॉक्टर सलाह देते है कि हॉस्पिटल आने की जरूरत नहीं, घर में ही रह कर कोरांटीन कर लो. हां, अगर किसी की ज्यादा तबियत खराब हो जाती है तो वह फोन पर अपॉइंटमेंट लेकर ही अस्पताल जाए, उन्हें अलग से देखा जाएगा, ताकि वे वहां अन्य मरीजों को संक्रमित न करें.
29 मार्च तक, डेनमार्क में 2,395 लोग कोरोना से संक्रमित हो चुके हैं, बहत्तर मौतें हो चुकी हैं. मगर आशा की बात यह है कि संक्रमण का प्रसार 13 मार्च से, जबसे लॉकडाउन शुरू हुआ अपेशाकृत कम दर से बढ़ रहा है. आशा है जल्द ही यह ग्राफ समतल हो जाएगा और हम अपनी सामान्य दिनचर्या में लौट आयेंगे.
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