लॉकडाउन से देश को जल्द ही राहत मिलने के आसार फिलहाल नहीं दिख रहे हैं.संक्रमण के हालत काबू के उस स्तर तक अभी नहीं हैं, जिसे लॉक डाउन खोलने के संतोषजनक माना जाए. अंतिम फैसला तीन मई को प्रधानमंत्री लेंगे लेकिन मंत्रियों के समूह (जीओएम) का फिलहाल आंकलन यह है कि 3 मई के बाद राज्य सरकारों को अपने यहां की स्थिति का आंकलन करने के बाद लॉकडाउन हटाने या जारी रखने का फैसला लेने की छूट दी जाए.
जीओएम की बैठक में शामिल एक मंत्री का कहना है कि लॉकडाउन की वजह से लोगों को जो समस्याएं आई हैं उसकी समीक्षा के बाद लगातार उनकी तकलीफों को दूर करने की कोशिश की गई है. सरकार काफी हद तक लोगों की तकलीफ दूर करने में सफल भी रही है और कोशिश लगातार जारी है.
कुछ कमियां जरूर दिख रही है लेकिन उन्हे भी दूर किया जा रहा है. खासकर दिहाड़ी मजदूरों और स्वरोजगार में लगे गरीबों की दिक्कत को प्राथमिकता के आधार पर दूर करने की कोशिश की जा रही है.
क्या एसी स्थिति बन रही है जिसके आधार पर यह माना जाए कि 3 मई के बाद लॉक डाउन समाप्ति की घोषणा सरकार करेगी? मंत्री ने बताया कि अभी यह कहना जल्दबाजी है. कोशिश यह है कि संक्रमण तीसरे स्टेज तक नहीं पहुंचे और उम्मीद है कि हम इसमें सफल होंगे. लेकिन इस बात की संभावना बिल्कुल नहीं है कि अचानक से लॉक डाउन को हटा लिया जाए. सभी राज्यों के हालात अलग-अलग हैं.
कुछ राज्यों में कोरोना के नए मामले नहीं हैं, लेकिन लॉक डाउन पूर्ण रूप से हटाने पर लोगों की आवाजाही बेरोकटोक होगी तो जो राज्य मुक्त हैं उनमें दोबारा कोरोना का संकट खड़ा हो सकता है.
कोरोना की लड़ाई सभी राज्य और केंद्र मिल कर लड़ रहे हैं. पहली प्राथमिकता लोगों को इस महामारी से बचाने की है. ऐसे में 3 मई के बाद राज्यों को यह तय करना होगा कि वह लॉक डाउन बढ़ाने के पक्ष में हैं या खत्म करने के. जब 21 दिनों के लिए पहली बार लॉक डाउन लगाया गया था तो 21 दिन पूर्ण होने से पहले ही कई राज्यों ने अपने यहां लॉक डाउन बढ़ाने का फैसला किया था. 3 मई के बाद भी राज्य ऐसा करने के लिए स्वतंत्र होंगे.
इसमें केंद्र से जो सहयोग चाहिए वह केंद्र संबंधित राज्यों को अवश्य देंगे. जहां तक बाद ट्रेनों और बसों के परिचालन को लेकर है तो ऐसा करने से लोगों की अंतरराज्जीय आवाजाही शुरू हो जाएगी. इसलिए राज्य सरकारों से सलाह के बाद ही इस बारे में कुछ फैसला लिया जा सकता है.
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