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मध्यप्रदेश में कैदियों की जेल बदलने से पहले लेनी होगी कोर्ट की मंजूरी

हाईकोर्ट ने सरकार को निर्देश दिया कि बगैर कोर्ट की मंजूरी के कैदियों को दूसरी जेलों में शिप्ट न किया जाए. राज्य में कई जिले कोरोना मुक्त हैं. ऐसा करना अगर बहुत आवश्यक हो तो सरकार को इसके लिए कोर्ट की पूर्व अनुमति लेनी होगी.

कैदी
कैदी
अपडेटेड 14 अप्रैल , 2020

नई दिल्ली. मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर खंडपीठ ने चार कैदियों को जबलपुर और सतना से भोपाल के सरकारी अस्पताल में शिफ्ट करने का आदेश दिया है जहां कोविड-19 का इलाज हो रहा है. साथ ही कैदियों को दूसरी जेल भेजने से पहले अदालत की मंजूरी लेना अनिवार्य कर दिया है. इन कैदियों को सतना भेजे जाने का भारी विरोध पूरे विंध्याचल में हो रहा था. रीवा के आठ विधायकों और सांसद ने रासुका के तहत निरुद्ध इन कैदियों को बाहर भेजने की मांग की थी. रीवा में तो दवा दुकानदारों ने विरोध में एक दिन दुकानें तक बंद रखी थीं. दरअसल, इंदौर पूरे मध्यप्रदेश में सबसे ज्यादा कोरोना मरीजों और मौतों वाला शहर है और वहां के नागरिकों तक को दूसरे जिलों में घुसने नहीं दिया जा रहा है.

रासुका में निरुद्ध सलीम, जावेद को इंदौर से जबलपुर सेंट्रल जेल और समीर और इमरान को सतना सेंट्रल जेल भेजा. इनमें से जावेद, समीर और इमरान कोविड-19 पॉजिटिव निकले. इन लोगों पर इंदौर में पुलिस पर पत्थरबाजी करने का आरोप है.

दरअसल, रीवा-सतना में कोरोनावायरस का कोई मरीज नहीं मिला था और इन कैदियों के पहुंचने के साथ ही वहां पर कोरोनावायरस मरीजों का खाता खुला था. बहरहाल, हाईकोर्ट के आदेश के बाद यह राजनीतिक तूफान थमने के आसार दिख रहे हैं.

हाईकोर्ट ने सरकार को निर्देश दिया कि बगैर कोर्ट की मंजूरी के कैदियों को दूसरी जेलों में शिप्ट न किया जाए. राज्य में कई जिले कोरोना मुक्त हैं. ऐसा करना अगर बहुत आवश्यक हो तो सरकार इसके लिए कोर्ट की पूर्व अनुमति ले. न्यायाधीश एस.सी. शर्मा और शैलेंद्र शुक्ला ने वीडियो कांफ्रेंसिंग से सुनवाई करते हुए इस मसले पर सरकार से 4 हफ्ते में विस्तृत जवाब दाखिल करने को भी कहा है. साथ ही राज्य सरकार से आइसीएमआर की ओर से निर्धारित प्रोटोकाल के पालन की बात भी अदालत ने कही है. इस मामले में कैदियों के परिजनों ने अदालत का दरवाजा खटखटाया था.

हाईकोर्ट ने कहा कि इन कैदियों को अलग से एंबुलेंस में भोपाल ले जाया जाए और इन्हें ले जा रहे स्टाफ से फासले पर बैठाया जाए और बाद में उनकी उचित जांच-पड़ताल की जाए.

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