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योगी के डिजिटल हथियारों के सामने बेबस कोरोना

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की पहल पर कोरोना मरीजों की निगरानी, कांटैक्ट ट्रेसिंग और कोविड जांच की जानकारी देने के लिए अलग-अलग मोबाइल ऐप लॉन्च हुए. सभी जिलों में बने इंटीग्रेटेड कमांड सेंटर को विश्व स्वास्थ्य संगठन ने भी सराहा है.

कोरोना काल में मुख्यमंत्री याेेगी भी सरकारी कामकाज पर लैपटाप के जरिए नजर रख रहे हैं
कोरोना काल में मुख्यमंत्री याेेगी भी सरकारी कामकाज पर लैपटाप के जरिए नजर रख रहे हैं
अपडेटेड 27 जनवरी , 2021

लखनऊ में लोकभवन से डेढ़ किलोमीटर दूर लालबाग गर्ल्स कॉलेज के सामने बना इंटीग्रेटेड कोविड कंट्रोल रूम जिले में कोविड पाजिटिव मरीजों पर 24 घंटे नजर रख रहा है. मार्च में कोरोना संक्रमण फैलने के बाद मरीजों की निगरानी और कांटैक्ट ट्रेसिंग के लिए लखनऊ समेत सभी जिलों में इंटीग्रेटेड कोविड कंट्रोल रूम स्थापित किया गया था. ‘फैसिलिटी एलाटेड डेस्क’, ‘होम आइसोलेशन डेस्क’, एंबुलेंस डेस्क, ‘पब्लि‍क ग्रिवांस डेस्क’, ‘सिम्टम टेकिंग डेस्क’, ‘डाक्टर सपोर्ट डेस्क’ से लैस लखनऊ का इंटीग्रेटेड कोविड कंट्रोल रूम 100 से ज्यादा आपरेटर दिनरात कोविड मरीजों की निगरानी कर रहे हैं. विशेष रूप से तैयार किए गए साफ्टवेयर के जरिए कंट्रोल रूम हर मरीज से लगातार संपर्क बनाए रखता है. जैसे ही इस साफ्टवेयर पर किसी मरीज के गंभीर होने का ब्योरा दर्ज होता है कंट्रोल रूम के मेडिकल यूनिट में बैठे डॉक्टर के कंप्यूटर स्क्रीन पर फ्लैश होने लगता. डॉक्टर तुरंत मरीज से संपर्क कर उसे लक्षण के हिसाब से अस्पतालों में भर्ती करने की व्यवस्था करते हैं. लखनऊ में कितने कोविड मरीज हैं? कितने बेड खाली हैं? कितनी जांच हुई है? ऐसी सभी जानकारियां यहां लगी टीवी स्क्रीन पर निरंतर आती रहती हैं. देश में कोरोना संक्रमण फैलने पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 23 मार्च को अधि‍कारियों को प्रदेश के सभी जिलों में इंटीग्रेटेड कोविड कंट्रोल रूम स्थापित करने के निेर्देश दिए थे. कोरोना महामारी से जंग के नौ महीने से ज्यादा बीतने के दौरान यही कोविड कंट्रोल रूम एक बड़ा हथि‍यार बनकर उभरे हैं. विश्व स्वास्थ्य संगठन और केंद्र सरकार यूपी सरकार की इंटीग्रेटेड कमांड सेंटर की व्यवस्था की तारीफ कर चुके हैं. इसके अलावा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सभी संबंधि‍त विभागों से डिजिटल तौर तरीकों को अपनाकर भी कोरोना की रोकथाम और मॉनीटरिंग पर नजर रखने का आदेश दिया था. योगी के आदेश के बाद कई मोबाइल ऐप कोरोना की रोकथाम में कारगर साबित हुए हैं. ये इस प्रकार हैं.

# “मेरा कोविड केंद्र” मोबाइल ऐप: कोरोना के संदिग्ध लक्षण वाले मरीज अपने घर के निकट मौजूद नि:शुल्क कोविड जांच केंद्रों के बारे में “मेरा कोविड केंद्र” मोबाइल ऐप से जानकारी हासिल कर सकते हैं. फिलहाल 1260 निःशुल्क कोविड जांच केंद्रों का ब्यौरा इस ऐप में उपलब्ध है. “मेरा कोविड केंद्र” ऐप आसपास के पांच किमी के दायरे में स्थित कोविड जांच केंद्र के बारे में अपडेट देगा. जांच केंद्र का नक्शा भी ऐप पर प्रस्तुत होगा. ऐप पर संबंधित कोविड केंद्र के लैब टेक्नीशियन व केंद्र प्रभारियों के नंबर,खुलने, बन्द होने का समय भी उपलब्ध है. इसके अलावा, अपने 05 किमी दायरे से बाहर के कोविड केंद्र के बारे में जानकारी पाने की सुविधा भी इस ऐप में है. सभी कोरोना जांच केंद्रों की जियो टैगिंग की गई है. स्वास्थ्य विभाग के फील्ड वर्कर और जिला प्रशासन इसमें नए कोरोना जांच केंद्रों को समय-समय पर ऑनलाइन जोड़ सकेंगे. इसे यूपी के चिकित्सा एवं परिवार कल्याण विभाग ने तैयार कराया है.

# “आयुष कवच कोविड” मोबाइल ऐप: लोगों में कोरोना के प्रति ‘इम्यूनिटी बूस्टिंग’ और इससे जुड़ी जरूरी जानकारियां एक प्लेटफार्म पर देने के लिए यूपी के आयुष विभाग ने “आयुष कवच कोविड” मोबाइल ऐप तैयार किया है. इसमें उन आयुर्वेदिक दवाओं के उपयोग की जानकारी है जो आसानी से घर में या फिर किचेन गार्डन में मौजूद हैं, या फिर गांव के परिवेश में दिखने वाली जैसे नीम, बेल, शहजन या गिलोए पर फोकस किया गया है. इसमें प्रचलित और परंपरागत आसन की जानकारी देने की बजाय लक्षणों के अनुसार प्रभावी योग और आसन को शामिल किया गया है. इसमें सुबह आठ बजे से एक्सपर्ट का मुफ्त लाइव सेशन कराने की व्यवस्था है. आपदा प्रबंधन का कंट्रोलरूम 1070, सीएम हेल्पलाइन 1076 और एक स्वास्थ्य विभाग के टोलफ्री नंबरों को इस मोबाइल ऐप के जरिए एक साथ एक प्लेटफार्म पर “इन ऐप कनेक्टिविटी” दी गई है.

# “माई कोविड टेस्ट लैब रिपोर्ट ऐप”: कोरोना संक्रमण फैलने के दौरान संदिग्ध मरीज की जांच के बाद कोविड पाजिटिव मरीजों को स्वास्थ्य विभाग की तरफ से फोन करके जानकारी दी जाती है. ऐसे लोगों को अपनी जांच रिपोर्ट मालूम करने में काफी दिक्कतें आती थीं जिनकी रिपोर्ट निगेटिव होती थी. ऐसे लोगों की मदद के लिए स्वास्थ्य विभाग ने “माई कोविड टेस्ट लैब रिपोर्ट” ऐप तैयार किया है. इसमें लोग अपने रजिस्टर्ड मोबाइल पर कोविड जांच रिपोर्ट पा सकते हैं और उसका प्र‍िंट निकाल कर उपयोग भी कर सकते हैं. अब तक 30 लाख लोग अपनी कोरोना जांच की रिपोर्ट घर बैठे ही ऑनलाइन हासिल कर चुके हैं.

# "यूपी कोविड 19 ट्रैक्स” पोर्टल: कोविड पाजिटिव मरीजों की मॉनिटरिंग करने के लिए उत्तर प्रदेश सरकार ने यूपी कोविड 19 ट्रैक्स” पोर्टल तैयार कराया है. किसी भी व्यक्त‍ि की कोरोना जांच पाजिटिव आने पर इस पोर्टल के जरिए मरीज का एक यूनीक आइडेंटि‍टी नंबर जनरेट हो जाता है. इसके बाद कोविड पाजिटि‍व मरीज की पहचान इस नंबर से ही होती है. इलाज करने वाले डाक्टर पोर्टल पर मरीज का यूनीक नंबर डालकर उसके बारे में पूरी जानकारी हासिल कर सकते हैं. इस पोर्टल पर दर्ज जानकारियों के चलते ही एल-1, एल-2, से एल-3 अस्पताल में कोविड मरीज को ट्रासफर करने पर उसके साथ कोई भी कागज नहीं भेजा जाता.

इसके साथ ही मुख्यमंत्री योगी के निर्देश पर आइसीयू की निगरानी के लिए चिकित्सा शि‍क्षा विभाग ने वर्चुअल आइसीयू का सिस्टम बनाया है. लखनऊ के संजय गांधी इंस्टीट्यूट आफ मेडिकल साइंसेज (एसजीपीजीआइ) के पल्मोनरी मेडिसिन विभाग और इमरजेंसी मेडिसिन विभाग के प्रमुख रोज शाम 4 बजे से 5 बजे तक वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए प्रदेश के किसी भी मेडिकल कॉलेज के आइसीयू का वर्चुअल निरीक्षण करते हैं. इस दौरान वह देखते हैं कि आइसीयू में मरीजों के इलाज में किसी प्रकार की दिक्क्त तो नहीं आ रही है. कोई समस्या होने पर तुरंत वर्चुअल आइसीयू व्यवस्था के नोडल आफीसर उसे शासन के संज्ञान में लाकर दूर कराते हैं. 20 जनवरी तक कुल सात हजार से अधि‍क बार आइसीयू का वर्चुअल नि‍रीक्षण किेया जा चुका था. दूरदराज के कोविड अस्पतालों में भर्ती मरीजों को इलाज संबंधी परामर्श देने के लिए चिकित्सा शि‍क्षा विभाग ने “इलेक्ट्रानिक कोविड केयर सिस्टम” (इसीसीएस) भी लागू किया है. 5 अगस्त से शुरू हुए इस सिस्टम में फोन के जरिए लेवल-1 से लेवल-3 तक में भर्ती मरीजों का इलाज करने वाले सीधे मेडिकल कॉलेज या इससे बड़े संस्थान के विशेषज्ञ डॉक्टरों से फोन पर संपर्क कर सकते हैं. 20 जनवरी तक 8 हजार से अधि‍क मरीजों को इसीसीएस के जरिए विशेषज्ञ डॉक्टरों ने परामर्श दिया है.

वैक्सीनेशन की ट्रैकिंग के लिए केंद्र सरकार ने एक COWIN पोर्टल बनाया है. यूपी सरकार वैक्सीनेशन की निगरानी के लिए इस पोर्टल का बखूबी उपयोग कर रही है. इसमें लाभार्थी की सभी जानकारी दर्ज की जाती है. इस पोर्टल पर रजिस्टर्ड होते ही लाभार्थी को पास का वैक्सीन सेंटर एलॉट हो जाता है. लाभार्थी को उसके रजिस्टर्ड मोबाइल पर मैसेज के जरिए जानकारी मि‍लती है कि उसे वैक्सीनेशन साइट पर कब और कितने बजे पहुंचना है. पंजीकृत लाभार्थी की जानकारी सभी जिलों में बने कोविड कंट्रोल रूम में भी दे दी जाती है. कोविड कंट्रोल रूप से लाभार्थी को फोन करके वैक्सीनेशन साइट पर पहले और 28 दिन बाद दूसरे टीकाकरण के लिए समय से पहुंचने की जानकारी दी जाएगी.

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