अयोध्या में कारसेवकपुरम में श्रीरामजन्मभूमि न्यास कार्यशाला में तराशे गए पत्थरों की सफाई का काम शुरू हो गया है. दिल्ली की कंस्ट्रक्शन कंपनी केएलए को कार्यशाला में रखे पत्थरों की सफाई का जिम्मा सौंपा गया है. श्री रामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने मंदिर निर्माण को लेकर तकनीकी रूप से तैयारी लगभग पूरी कर ली है. काफी लंबे समय से कारसेवकपुरम की कार्यशाला में रखे पत्थरों पर काई जम जाने से वे काले हो गए हैं. कंपनी ने इन पत्थरों को साफ करने के लिए कई विशेषज्ञों को अयोध्या भेजा है. मंदिर निर्माण कार्यशाला में रखे पत्थरों को साफ करने के लिए कई प्रकार के केमिकल का प्रयोग किया जा रहा है. इनमें स्टोन क्लीनिक के साथ कई तरह के रिमूवर प्रयोग में लाए जा रहे हैं. स्टेन, एल्बो सीमेंट, डस्ट रिमूवर और पेंट रिमूवर जैसे केमिकल का भी प्रयोग किया जा रहा है.
केएलए कंपनी के प्रोजेक्ट मैनेजर संजय जेडिया ने बताया कि पत्थरों की सफाई के लिए मुख्य रूप से पानी का प्रयोग किया जा रहा है. इसके बावजूद अगर पत्थर पर जमी धूल और काई साफ नहीं होती तो केमिकल का प्रयोग किया जाता है. जेडिया ने बताया कि कंपनी ने पत्थरों की सफाई का काम पांच श्रमिकों के साथ शुरू किया था. अब दस और श्रमिक दिल्ली से बुलाए गये हैं. लंबे समय से रखे पत्थरों पर डस्ट जमने की वजह से इन को साफ करने में काफी मशक्कत करनी पड़ रही है. सभी पत्थरों की सफाई करने में तीन से चार महीने का समय लग सकता है.
वर्ष 1992 में श्री रामजन्मभूमि न्यास की ओर से मंदिर निर्माण कार्यशाला अयोध्या में स्थापित की गई थी, जहां रामलला का मंदिर बनाने के लिए पत्थरों के तराशने का काम चल रहा था. उधर, 26 जून को कारसेवकपुरम में विश्व हिंदू परिषद के पदाधिकारियों की बैठक दो सत्रों में हुई. इसमें कोरोना के कारण राम जन्मभूमि मंदिर के निर्माण की शुरुआत को लेकर मंथन हुआ.
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