मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ प्रयागराज में 30 जनवरी को माघ मेले के चौथे स्नानपर्व वसंत पंचमी पर गंगा पूजा करने के बाद सर्किट हाउस में जब अधिकारियों के साथ बैठक कर रहे थे, उसी वक्त उन्हें केरल में देश के पहले कोरोना संक्रमित मरीज के सामने आने की जानकारी मिली.
मुख्यमंत्री ने फौरन प्रदेश के मुख्य सचिव राजेंद्र कुमार तिवारी से इस बीमारी के बारे में विस्तृत जानकारी जुटाने का निर्देश दे दिया था. अगले दिन मुख्यमंत्री योगी कानपुर में पांच दिवसीय गंगा यात्रा के समापन मौके पर मौजूद थे और यहां से लौटते ही वह सीधे लोक भवन पहुंचे.
मुख्य सचिव राजेंद्र कुमार तिवारी ने मुख्यमंत्री को कोरोना संक्रमण से निबटने के लिए विदेशों में हुए प्रयासों, विश्व स्वास्थ्य संगठन और “इंडियन काउंसिल फॉर मेडिकल रिसर्च” (आइसीएमआर) में उपलब्ध सूचनाओं की जानकारी दी. मुख्यमंत्री ने इन जानकारियों को समेटते हुए सभी जिलों को कोरोना संक्रमण से जागरूक करने के लिए एक विस्तृत निर्देश मुख्य सचिव को भेजने को कहा.
इसके बाद मुख्य सचिव राजेंद्र कुमार तिवारी का लोकभवन के एक ब्लाक के पहले तल पर मौजूद दफ्तर हरकत में आ गया. देर शाम तक मुख्य सचिव कार्यालय से सभी जिलों को कोरोना से बचाव की दिशा में जागरूक करने का पहला निर्देश जारी हो गया. इसके बाद राजेंद्र केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय और प्रदेश सरकार के बीच की एक कड़ी बन गए. स्वास्थ्य मंत्रालय से भेजे जाने वाली सभी गाइडलाइन को जिलों तक पहुंचाने में मुख्य सचिव दफ्तर ने पूरा जोर लगा गया.
अबतक तीन दर्जन से अधिक निर्देश जिलाधिकारियों को भेजे जा चुके हैं. इन आदेशों को लागू कराते हुए इसपर कार्रवार्र कराना और फॉलोअप करने की जिम्मेदारी भी राजेंद्र की है.
मार्च के पहले हफ्ते में आगरा में अचानक एक परिवार के कई लोगों के कोरोना संक्रमति पाए जाने के बाद राजेंद्र की सक्रियता और बढ़ गई. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर राजेंद्र लगातार आगरा के कमिश्नर और जिलाधिकारी के संपर्क में थे. संक्रमित इलाके को सील कर एक हॉटस्पॉट में तब्दील करने की पूरी प्रक्रिया की मुख्य सचिव कार्यालय लगातार निगरानी कर रहा था.
देश भर में 22 मार्च को जनता कर्फ्यू के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने यूपी के 16 जिलों में लॉकडाउन लगाने की घोषणा की थी. मुख्यमंत्री के निर्देश पर राजेंद्र ने 22 मार्च की रात में ही लॉकडाउन की एक विस्तृत गाइडलाइन तैयार कर सभी जिलों को भेज दी थी.
हालांकि, दूसरे प्रदेशों के कुछ जिलों में भी लॉकडाउन घोषित हुआ था लेकिन सबसे पहले लॉकडाउन की गाइडलाइन तैयार कर उसे लागू कराने वाला यूपी पहला था.
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जब 24 मार्च को अपनी टीम-11 की घोषणा की तो राजेंद्र को इसके एक सेनापति के रूप में अग्रणी भूमिका मिली. सभी विभागों के प्रशासनिक मुखिया और केंद्र सरकार के साथ समन्वय बनाकर कोरोना की रोकथाम से जुड़े निर्देशों को लागू कराने की जिम्मेदारी राजेंद्र को मिली.
मुख्यमंत्री के साथ रोज होने वाली टीम-11 की बैठक में लिए गए निर्णयों को उसी दिन लागू कराने की पूरी जिम्मेदारी राजेंद्र की है. इसके बाद इन्होंने प्रदेश में कोरोना संक्रमण की रोकथाम और उसके इलाज से जुड़े चिकित्सकीय तंत्र को मजबूत करने पर फोकस किया.
चिकित्सा शिक्षा विभाग, स्वास्थ्य विभाग, वित्त के प्रमुख सचिवों के साथ लगातार समन्वय बनाकर यूपी में कोरोना संक्रमण के इलाज के लिए मजबूत ढांचा खड़ा करने में पूरा योगदान मुख्य सचिव कार्यालय ने दिया. इसी टीमवर्क के चलते दो महीने से कुछ अधिक समय में यूपी में कोविड की जांच करने की क्षमता सौ से बढ़कर सात हजार से अधिक पहुंच गई है. राजेंद्र ने अपने कार्यालय में तैनात सभी अधिकारियों को विभागवार जिम्मेदारी बांट दी है. ये अधिकारी विभागवार आने वाली सूचनाओं को संकलित कर रोज रात आठ बजे तक इसकी एक रिपोर्ट मुख्य सचिव को सौंपते हैं.
रात में नौ बजते ही विक्रमादित्य मार्ग पर मौजूद मुख्य सचिव के कैंप आफिस की सक्रियता बढ़ जाती है. राजेंद्र रात नौ बजे से लेकर १२ बजे तक तीन घंटे केवल जिलों के डीएम और पुलिस अधीक्षकों से बात करते हैं. इसमें ये न केवल खराब काम कर रहे जिलाधिकारियों और पुलिस अधिकारियों को चेताते हैं बल्कि उनसे फीडबैक भी लेते हैं.
जिलों से मिली सभी जानकारियों को वह खुद नोट भी करते हैँ. इसके बाद कैंप आफिस में ही ये जानकारियां एक दस्तावेज की शक्ल ले लेती हैं. अगले दिन सुबह मुख्यमंत्री के साथ होने वाली बैठक में राजेंद्र इस रिपोर्ट को पेश करते हैं. राजेंद्र सभी विभाग के प्रमुख सचिव, जिलाधिकारियों, दूसरे राज्यों के मुख्य सचिवों के साथ अलग-अलग व्हाट्सएप ग्रुप के जरिए निरंतर संपर्क बनाए रहते हैं.
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर राजेंद्र ने 16 वरिष्ठ आइएएस अधिकारियों और इतने ही पुलिस अधिकारियों को अलग- अलग प्रदेशों में रह रहे प्रवासियों को लॉकडाउन में हर संभव मदद दिलाने के लिए तैनात किया था. यह सभी अधिकारी सीधे राजेंद्र कुमार तिवारी को ही रिपोर्ट करते हैं. इनके जरिए राजेंद्र ने दूसरे प्रदेशों से यूपी आने वाले प्रवासी मजदूरों के मूवमेंट की पल-पल की रिपोर्ट ली जा रही है.
केंद्रीय रेल मंत्रालय से संपर्क कर प्रवासी मजदूरों को यूपी लाने के लिए रेलगाड़ियों का इंतजाम करने में राजेंद्र की महत्वपूर्ण भूमिका थी.
यूपी के प्रशासनिक मुखिया की कुर्सी संभाल रहे राजेंद्र कुमार तिवारी बुंदेलखंड में आल्हा-ऊदल की वीर भूमि महोबा जिले के रहने वाले हैं. इसके पिता शिक्षक थे जो प्रधानाचार्य के पद से रिटायर हुए थे. बचपन से ही राजेंद्र बहुमुखरी प्रतिभा के धनी थे.
पढ़ाई में अव्वल रहने के साथ ही सांस्कृति कार्यक्रमों में बढ़चढ़ कर हिस्सा लेते थे. यह बहुत अच्छे तबलावादक थे. इंडियन इंस्टीट्यूट आफ टेक्नोलाजी (आइआइटी) कानपुर से इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में बीटेक करने के बाद वर्ष 1985 में राजेंद्र का चयन 22 साल की उम्र में भारतीय प्रशासनिक सेवा में हो गया.
प्रशिक्षु अफसर के तौर राजेंद्र की पहली पोस्टिंग रायबरेली में हुई. पहली बार वर्ष 1994 में पिथौरागढ़ के जिलाधिकारी बने. इसके बाद बाराबंकी, मिर्जापुर, आगरा में डीएम रहने के बाद कमिश्नर गोरखपुर भी रहे. सात वर्ष तक केंद्र सरकार में अलग-अलग पदों पर तैनात रहे. केंद्र सरकार में संयुक्त सचिव रहने के दौरान राजेंद्र ने सहकारी समितियों पर हुए 97वें संविधानिक संशोधन को कराने में मुख्य भूमिका निभाई थी.
नौकरी के दौरान ही इन्होंने यूनिवर्सिटी आफ ससेक्स यूके से गवर्नेंस एंड डेवलेपमेंट स्टडीज विषय में मास्टर्स किया. जुलाई 2016 में राजेंद्र को श्रम विभाग के प्रमुख सचिव की जिम्मेदारी मिली. यूपी में जब भाजपा सरकार बनी उस वक्त राजेंद्र श्रम विभाग के साथ कामर्शियल टैक्स विभाग में अपर मुख्य सचिव के रूप में तैनात थे.
प्रदेश में जीएसटी का कानून बनाकर उसे प्रदेश में लागू करने वाले राजेंद्र ही थे. श्रम विभाग में रहने के दौरान इन्होंने 15 श्रम कानूनों को संशोधित करके श्रम सुधार के क्षेत्र में अभूतपूर्व काम किया था.
अप्रैल, 2018 से पंचायती राज विभाग के अपर मुख्य सचिव के रूप में काम करते हुए राजेंद्र ने एक साल से भी कम समय में स्वच्छ भारत मिशन के तहत एक करोड़ से अधिक शौचालय बनवाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. उच्च शिक्षा विभाग में अतिरिक्त मुख्य सचिव के पद पर तैनाती के दौरान राजेंद्र ने निजी विश्विविद्यालयों के संचालन का एक “अम्ब्रेला एक्ट” बनाया.
50 से अधिक निजी विश्वविद्यालय स्थापित करने के प्रस्ताव प्राप्त किए और इनमें से 28 प्राइवेट यूनिवर्सिटी को “लेटर आफ इंटेंड” भी दिए गए. इस वर्ष फरवरी में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने राजेंद्र कुमार तिवारी को प्रदेश का नियमित मुख्य सचिव बनाया. लाकडाउन के संकट और उसके बाद की चुनौतियों से निबटने के लिए राजेंद्र जुट चुके हैं.
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