गांधी टोपी और कई अनशनों के बावजूद, अण्णा हजारे कहते हैं कि उनकी तुलना राष्ट्रपिता से करना गलत है. उनके भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन को लोगों की सामूहिक हताशा ने आवाज दी है. अनशन और चेतावनियों के बीच, हजारे सीनियर एडिटर प्रिया सहगल को बता रहे हैं कि आखिर क्यों वे नेताओं के साथ कभी समझौता नहीं करेंगे.
28 दिसम्बर 2011: तस्वीरों में देखें इंडिया टुडे
- आप अपनी रॉकस्टार जैसी अपील के बारे में क्या कहेंगे?
रॉकस्टार? (उलझन में नजर आते हैं)
हीरो...
(हंसते हैं और सिर हिलाते हैं) यह हीरो की बात अलग है. लेकिन मेरा सामाजिक कार्य और मेरा संघर्ष लोगों को अपनी ओर खींचता है.
- सरकार आपकी कुछ मांगों को पूरा कर रही है. क्या आप किसी भी चीज को लेकर समझौता करेंगे?
किसी भी चीज को लेकर कौन तैयार हुआ है? बरसों से हम संघर्ष कर रहे हैं. वे यही कहते आए हैं, 'हां, हम मजबूत लोकपाल लाएंगे, एक प्रभावी बिल पेश करेंगे.' लेकिन उन्होंने इस बारे में कुछ भी नहीं किया है. तीन मुख्य मसले हैं: लोकायुक्त बिल, सिटिजंस चार्टर और निचली अफसरशाही. पंतप्रधानजी (प्रधानमंत्री) ने मुझे (अगस्त में) लिखित आश्वासन दिया था कि मुझे अपना अनशन खत्म कर देना चाहिए. इन तीनों मांगों को लेकर संसद में सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित करा लिया जाएगा. मैंने अनशन खत्म कर दिया. लेकिन उन्होंने अभी तक इस बिल को कानून में तब्दील नहीं किया है. यह संसद का अपमान है...उन्हें लोकपाल के दायरे में न्यायपालिका को भी लाना चाहिए.
21 दिसम्बर 2011: तस्वीरों में देखें इंडिया टुडे
- फिर ज्यूडिशियल एकाउंटेबिलिटी बिल का क्या होगा?
मुझे अलग बिल को लेकर कोई आपत्ति नहीं है. लेकिन यह मजबूत बिल होना चाहिए. अगर सरकार ड्राफ्ट तैयार करती है, तो यह बिल मजबूत नहीं होगा. लोकपाल बिल के लिए जैसे हमारे पास सांसदों और सिविल सोसायटी की संयुक्त समिति है, इसी तरह की एक समिति होनी चाहिए. वे अलग से एक व्हीसलब्लोअर एक्ट भी लाना चाहते हैं. इसे लोकपाल के तहत लाने में हर्ज क्या है? वे सभी मुख्य बिंदुओं को लोकपाल से अलग करके उनसे जुड़े कमजोर कानून बनाना चाहते हैं. यह लोकपाल को कई हिस्सों में बांट कर रख देगा.
इन सभी कानूनों को नियंत्रित कौन करेगा? सरकार? हम चाहते हैं कि सरकार इन चीजों से बाहर हो जाए...सीबीआइ की तरह. सीबीआइ सरकार के नियंत्रण में है, इसी कारण भ्रष्टाचार बढ़ रहा है. अगर, आज सीबीआइ लोकपाल के दायरे में होती तो पी. चिदंबरम जेल में होते. वे सिर्फ इसलिए आजाद हैं क्योंकि सीबीआइ सरकार के नियंत्रण में है.
- कौन से मंत्री सबसे ज्यादा आपकी मांगों के पक्ष में हैं?
पूरी तरह तो नहीं, लेकिन एक हद तक सलमान खुर्शीद हमारा समर्थन करते हैं.
14 दिसंबर 2011: तस्वीरों में देखें इंडिया टुडे
07 दिसंबर 2011: तस्वीरों में देखें इंडिया टुडे
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- लोकपाल के खिलाफ सबसे बड़ा खलनायक कौन है?
यह क्या नाम है उसका..क़पिल सिब्बल. वह शुरू से इसके खिलाफ है. वह इस तरह व्यवहार करता है जैसे हम अपने लिए कुछ मांग रहे हैं. अरे, यह तो सरकार का कर्तव्य है कि वह अच्छे कानून बनाए. लेकिन जब लोकपाल जैसे अच्छे कानून बनाए जाते हैं, तो आप उनका समर्थन नहीं करते हैं. सरकार की नीयत साफ नहीं है.
- क्या आप समझौता करने के पूरी तरह से खिलाफ नहीं हो रहे हैं?
हमने उन्हें बताया था, 'आओ आमने-सामने बैठते हैं, और बात करते हैं.' वे तैयार नहीं हैं.
- उन्होंने ड्राफ्टिंग कमेटी में ऐसा ही किया, क्या ऐसा नहीं किया?
हां, हमने बात की थी. लेकिन क्या हुआ? वे बात से ही पलट गए.
30 नवंबर 2011: तस्वीरों में देखें इंडिया टुडे
- आपकी अपनी कमेटी का क्या हुआ? कहा जा रहा है कि आप अरविंद केजरीवाल ऐंड कंपनी के हाथों कठपुतली बन गए हैं?
यह बराबर (सही) नहीं है.
- क्या आपके टीम के अन्य लोग आप पर दबाव बनाते हैं?
ये मेरे बाल धूप में नहीं पके हैं. मैं महाराष्ट्र में छह मंत्रियों और 400 अधिकारियों का बोरिया बिस्तर बंधवा चुका हूं...(हंसते हैं).
- यह सब खत्म कैसे होगा?
अगर वह नहीं करते हैं तो हमारी तैयारी है.
- क्या आपके भ्रष्टाचार विरोधी अभियान में अब पहले जैसी आग नहीं है?
(उनकी आंखें चमक उठती हैं और वे अपना हाथ हिलाते हैं) क्या आप ने नहीं देखा? जब मैं जंतर मंतर पर बैठा हुआ था, तो आपने नहीं देखा कितने लोग वहां आए थे? आप 27 (दिसंबर) को देखेंगी, जब हमारा अनशन शुरू होगा. हम आपको दिखाएंगे कि हमारे 'जेल भरो आंदोलन' के दौरान कितने लोग जेल जाते हैं. सरकार उस समय देखेगी कि लोगों की संख्या बढ़ रही है या घट रही है. सरकार जो कह रही है, उसका यकीन कतई मत करो.
- आप राहुल और सोनिया गांधी पर निजी रूप से हमला क्यों कर रहे हैं?
यह निजी नहीं है. हम सभी सांसदों के घरों के बाहर प्रदर्शन करने जा रहे हैं. मैं भी जाऊंगा और उनके वहां प्रदर्शन करूंगा.
- सोनिया गांधी को खाद्य सुरक्षा बिल को कैबिनेट से मंजूर कराने के चलते मुश्किल दौर से गुजरना पड़ा?
सरकार चलाने वालों को इस बात का एहसास होना चाहिए कि वे सेवक हैं, मालिक नहीं. जनता मालिक है, जिसने इन सेवकों को सरकार में भेजा है.
- आपने राहुल गांधी से ज्यादा शरद पवार पर हमला साधा है. आपके प्रचार शुरू करने के बाद भी वे आपके अपने राज्य में स्थानीय चुनावों में लगातार जीत हासिल कर रहे हैं?
आप हमला शब्द का इस्तेमाल क्यों कर रही हैं.
- आपने क्यों पूछा, ''सिर्फ एक थप्पड़?'' यह तो गांधीवादी नहीं है
मैंने अपने ब्लॉग में बता दिया है कि मैंने ऐसा क्यों कहा (उन्होंने कहा कि झापड़ मारने के कारण की जांच की जानी चाहिए).
- आपके अनशन के बावजूद महाराष्ट्र में पवार की जीत को किस तरह परिभाषित करेंगे
इससे मेरा क्या लेना-देना है? मेरा काम लोगों को यह बताना है कि सच क्या है और झूठ क्या है. चुनावों से मेरा कोई सरोकार नहीं है. जनता को ही इस बात का चयन करने दें कि उन्हें कौन पसंद है.
- क्या लोग आपको नहीं सुन रहे हैं? आपने हाल ही में कहा है कि पवार जैसे लोग अच्छे इंसान नहीं हैं. फिर भी आम आदमी उन्हीं को वोट दे रहा है
मैंने ऐसा कभी नहीं कहा कि वे अच्छे नहीं हैं. मैंने सिर्फ यही कहा कि सिर्फ एक ही झापड़ क्यों. मैंने ऐसा कभी नहीं कहा कि वे बुरे हैं, उन्हें वोट मत दो.
23 नवंबर 2011: तस्वीरों में देखें इंडिया टुडे16 नवंबर 2011: तस्वीरों में देखें इंडिया टुडे
- फिर आप टीम अण्णा के हिसार में प्रचार को किस तरह व्याख्यायित करेंगे
(मुस्कराते हैं) इनको एक नमूना दिखाना था कि हम लोग के विरोध करने से आपकी सीट जा सकती है.
- उत्तर प्रदेश का क्या
मैं चुनाव के दौरान सभी पांच राज्यों में प्रचार के लिए जाऊंगा.
9 नवंबर 2011: तस्वीरों में देखें इंडिया टुडे2 नवंबर 201: तस्वीरों में देखें इंडिया टुडे
- कांग्रेस के खिलाफ
मैं मतदाताओं से कहुंगा कि वे हर उस उम्मीदवार के खिलाफ वोट करें जो जन लोकपाल के खिलाफ हैं.
- मायावती आपके जन लोकपाल का समर्थन करती हैं लेकिन क्या भ्रष्टाचार के मामले में उनकी छवि कांग्रेस से बेहतर है?
हमारा मुख्य मुद्दा मजबूत लोकपाल है. वे सब जो इसका विरोध करते हैं, उन्हें जिताकर वापस संसद नहीं भेजा जाना चाहिए.

