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अफीम नहीं, अब 'चिया सीड' के लिए जाना जाएगा बाराबंकी

बाराबंकी निवासी रिटायर्ड कर्नल हरिश्चंद्र ने उगाई 'चिया सीड', प्रधानमंत्री मोदी ने 'मन की बात' कार्यक्रम में की तारीफ.

चिया सीड की खेती करने वाले हरिश्चंद्र
चिया सीड की खेती करने वाले हरिश्चंद्र
अपडेटेड 28 फ़रवरी , 2021

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वर्ष 2021 में दूसरी बार अपने "मन की बात" कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश के बाराबंकी जिले का जिक्र करके कभी अफीम के लिए कुख्यात रहे बाराबंकी जिले को चर्चा में ला दिया. बाराबंकी को यह चर्चा दिलाई "चिया सीड" ने. चीन और अमेरिका में सुपर फूड मानी जानी वाली "चिया सीड" को रिटायर्ड कर्नल हरिश्चंद्र ने बाराबंकी की धरती पर उगाया है. एक विदेशी फसल को बिना किसी सरकारी मदद के अपने संसाधनों के जरिये उगाए जाने को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नोटिस किया. फिर प्रधानमंत्री ने मन की बात कार्यक्रम में "चिया सीड" की खेती का जिक्र कर हरिश्चंद्र की मेहनत को सम्मान दिया. पीएम मोदी ने कहा कि ये खेती ना सिर्फ हरिशचंद्र जी की आय बढ़ाएगी, बल्कि आत्मनिर्भर भारत में अपना योगदान भी देगी.

ऐसा ही सम्मान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 31 जनवरी को मन की बात कार्यक्रम में शौर्य और संस्कार की तपती धरती झांसी में स्ट्रॉबेरी उगाने वाली लॉ की छात्रा गुरलीन चावला का जिक्र कर किया था. तब प्रधानमंत्री ने कहा था कि लॉ की छात्रा गुरलीन ने पहले अपने घर पर और फिर अपने खेत में स्ट्रॉबेरी की खेती का सफल प्रयोग कर यह विश्वास जगाया है कि झांसी में भी ये हो सकता है. जो स्ट्रॉबेरी, कभी, पहाड़ों की पहचान थी, वो अब, कच्छ की रेतीली जमीन पर भी होने लगी है, किसानों की आय बढ़ रही है. प्रधानमंत्री की इस सराहना से गुरलीन चावला आज देशभर में प्रसिद्ध हुई. सोशल मीडिया पर भी गुरलीन के प्रयास की खूब तारीफ़ हुई थी.

अब हरिश्चंद्र के प्रयास को सोशल मीडिया जमकर जगह मिल रही है. सेना से आर्टिलरी कर्नल के पद से वर्ष 2015 में रिटायर होने वाले और वर्तमान में सुल्तानपुर के जिला सैनिक कल्याण अधिकारी हरिश्चंद्र इसके लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आभार जताते हैं. वह कहते हैं, "हमारी खेती की सूचना देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तक पहुंच गई, इससे बड़ी बात मेरे लिए क्या हो सकती है. प्रधानमंत्री जी के मन की बात कार्यक्रम में जिक्र होना सम्मान की बात है. और आज मुझे  यह सम्मान मिल गया है." हरिश्चंद्र के इस कथन में दम है. उनकी मेहनत को सही मायने में आज सम्मान मिला है. वह बताते हैं कि सेना से आर्टिलरी कर्नल के पद से वर्ष 2015 में रिटायर होने के बाद मैंने तीन एकड़ जमीन बाराबंकी की हैदरगढ़ तहसील के सिद्धौर ब्लॉक के अमसेरुवा गांव में खरीदी. इस भूमि पर हरिश्चंद्र ने ड्रैगनफ़ूड, ग्रीन ऐपल, रेड ऐपल बेर, काला गेंहू और कई प्रजाति के आलू की खेती करना शुरु किया और बीते साल नवंबर में पहली बार आधा एकड़ भूमि में "चिया सीड" की खेती की.

हरिश्चंद्र के अनुसार, "चिया सीड" की खेती चीन में अधिक होती है. यह मूल रूप से मैक्सिको की फसल है. अमेरिका में इसे खाने के लिए खूब उगाया जाता है. इससे लड्डू, चावल, हलवा, खीर, जैसे व्यंजन बनते हैं. बहुत छोटे से दिखने वाले ये बीज सफेद, भूरे और काले रंग के होते हैं और शरीर को एनर्जी देने के लिए काफी अच्छा एनर्जी स्रोत माना जाता है. इसमें कई पोषक तत्व होते हैं, जिसकी वजह से इनकी मांग काफी ज्यादा है. चिया सीड के इन गुणों और उसकी मांग के आधार पर ही प्रधानमंत्री ने कहा कि ये खेती ना सिर्फ हरिश्चंद्र की आय बढ़ाएगी, बल्कि आत्मनिर्भर भारत में अपना योगदान भी देगी.

हरिश्चंद्र बताते हैं की चिया सीड की खेती से प्रति एकड़ में छह से सात क्विंटल उपज प्राप्त होती है. इसकी खेती में प्रति एक एकड़ में बीस से तीस हजार रुपये तक का खर्चा आता है. आधा एकड़ में बीज के लिए उन्होंने इसे उगाया है. अब इस साल ज्यादा क्षेत्र में इसे उगाने की योजना है. नए प्रयोग कर करते हुए खेती-किसानी से नाम कमाने वाले हरिश्चंद्र ने कभी यह नहीं सोचा था कि उनकी खेती को प्रधानमंत्री के स्तर से सराहना मिलेगी. फिलहाल वह मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मिलने की इच्छा रखते हैं. वह मुख्यमंत्री को बताना चाहते हैं कि किस खेती में किस तरह के नये प्रयोग करते हुए वह काला गेंहू और ड्रैगन फ़ूड और रेड ऐपल बेर तथा ग्रीन ऐपल बाराबंकी की धरती पर उगा रहें हैं. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को वह अपने खेत में उगाए ऐपल और रेड ऐपल बेर देना चाहते हैं.

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