जेट एयरवेज की उड़ाने बंद हुए 18 महीने हो गए. नकदी खत्म होने और बैंकों की ओर से नए कर्ज की मनाही के बाद इस एयरलाइंस का कामकाज पूरी तरह बंद हो गया था. इस एयरलाइंस के लिए बोली लगाने वाले समूह की ओर से दिए गए प्लान को एसबीआई के नेतृत्व में बैंकों ने मंजूरी दे दी, जिसके बाद इसके दोबारा शुरू होने की संभावनाएं बनती नजर आ रही हैं. हालांकि इस राह में अभी कई रोड़े हैं. बोली लगाने वाले समूह का नेतृत्व लंदन स्थित एसेस मैनेजमेंट कंपनी कैलरॉक कैपिटल और यूएई इंवेस्टर मुरारी लाल जालान कर रहे हैं.
जेट की दूसरी पारी 'जेट 2.0' के सफल होने के लिए पहले इसे नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (एनसीएलटी) की कसौटी पर खरा उतरना होगा. एनसीएलटी यह सुनिश्चित करेगा कि जेट का प्लान इन्सॉल्वेंसी ऐंड बैंकरप्सी कोड (आइबीसी) के प्रावधानों के हिसाब से है या नहीं. बोली लगाने वाले समूह को सबसे पहले एयरलाइंस के सभी कर्ज चुकता करने होंगे. इसके बाद दोबारा कामकाज शुरू हो सके इसके लिए नई पूंजी डालनी होगी. इस साल सितंबर तक जेट एयरवेज पर करीब 40,259 करोड़ रुपए का कर्ज था. इसमें बैंकों, कर्मचारियों का बकाया आदि शामिल है.
कैलरॉक-जालान के अलावा एक और समूह ने भी एयरलाइंस को खरीदने में दिलचस्पी दिखाई है. इस कन्सोर्टियम में अबु धावी का इम्पीरियल कैपिटल इन्वेस्टमेंट, हरियाणा का एक उड़ान तकनीक केंद्र और मुंबई का एक बड़ा चार्टर शामिल है. जेट एयरवेज के पूर्व चेयरमैन नरेश गोयल और उनकी पत्नी अनीता ने कंपनी के बोर्ड से मार्च 2019 में इस्तीफा दिया था. इस्तीफे की शर्त कर्ज देने वालों की ओर से वेलआउट प्लान में शामिल थी. इसके अलावा गृह मंत्रालय से लुकआउट नोटिस जारी करने के बाद गोयल को पिछले साल 25 मई को मुंबई एयरपोर्ट पर फ्लाइट पकड़ने रोका गया था. उनके ऊपर कंपनी के पैसे को निकालकर कहीं और लगाने का आरोप है.
जेट एयरवेज को उबारने के लिए प्रयास ऐसे समय में किए जा रहे हैं जो एविएशन सेक्टर के लिए हाल का सबसे कठिन दौर है. इसी साल मई में क्रिसिल की ओर से जारी एक रिपोर्ट के मुताबिक, इस साल एविएनश उद्योग को करीब 25,000 करोड़ की आय का नुकसान होने का अनुमान है.
ग्रांट थोरटन इंडिया के हेड (रिस्ट्रक्चरिंग) आशीष छाबड़िया कहते हैं, ''जेट को दोबारा उड़ान भरने के लिए पहले से ज्यादा दक्ष होना पड़ेगा.'' ग्राहकों की ओर से सौंपे गए प्लान में विमानों का आधुनिकीकरण, कम ईंधन खपत वाले विमानों को शामिल करना है. इसके अलावा बेड़े में मौजूद 12 विमानों को दोबारा शुरू करने के लिए मेंटेनेस की जरूरत होगी. इस सब में एनसीएलटी की कार्यवाही पूरी होने के बाद तीन से चार महीने का समय लग जाएगा.
छावड़िया ने एक साक्षात्कार में कहा था कि कर्जदार की दिलचस्पी कंपनी में कर्ज और हिस्सेदारी रखने में होगी. हालांकि इसका एक पहलू यह भी है कि इस जेट को दोबारा उड़ाने के लिए बैंकों को कर्ज माफ (हेयरकट) करना होगा. इसके अलावा कंपनी को प्रीमियम सेग्मेंट में अपनी जगह बनानी होगी जो फिलहाल दूसरी एयरलाइंस के पास हैं.
एक महत्वूपर्ण पहलू कंपनी में कर्मचारियों के रुझान का भी होगा. आइबीसी में जाने से पहले कंपनी में कुल 12,000 कर्मचारी थे, जबकि इससे पहले अधिकतम 20,000 कर्मचारी भी कंपनी में काम कर चुके हैं. छावड़िया कहते हैं कि आइबीसी के प्रावधानों में कर्मचारियों के हितों का ख्याल रखा जाएगा लेकिन नया मैनेजमेंट एक बार में सभी कर्मचारियों को दोबारा रखेगा इसकी उम्मीद कम है. एयरलाइंस के पुराने और अनुभवी कर्मचारियों को प्राथमिकता दी जाएगी.
अनुवादः शुभम शंखधर
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