चढ़ गुंडन की छाती पर, मुहर लगा दे हाथी पर.' बीते विधानसभा चुनाव के दौरान बसपा के इस नारे ने मुलायम सिंह यादव सरकार की अराजकता और बिगड़ी कानून-व्यवस्था के खिलाफ जनता का ऐसा ध्यानाकर्षण किया कि बसपा पूरे बहुमत के साथ विधानसभा पहुंच गई. यह बात दीगर है कि उस समय बसपा के हाथी पर ऐसे नेता भी सवार थे जिन पर अपराधी और माफिया का ठप्पा लगा हुआ था जबकि मायावती उन्हें गरीबों का मसीहा घोषित कर रही थीं. चार साल से ज्यादा समय तक उन दागी विधायकों को सत्ता का सुख देने के बाद उन पर और ऐसे दूसरे दागी नेताओं पर बसपा के हाथी की नजरें टेढ़ी हो गईं और अब वह उन्हें कुचलने पर आमादा है ताकि अगले चुनाव से पहले पार्टी की छवि दुरुस्त कर ली जाए.
28 दिसम्बर 2011: तस्वीरों में देखें इंडिया टुडे
ताजा मामला जौनपुर से बसपा सांसद धनंजय सिंह का है. मायावती सरकार बनने के बाद से सत्ता के गलियारों में उनकी तूती बोलती थी. धनंजय सिंह का एक लंबा आपराधिक रिकॉर्ड रहा है जिस पर कुछ रोज पहले तक सत्तारूढ़ दल का परदा चढ़ा हुआ था. छात्र राजनीति से ही दबंगई का ककहरा सीखने वाले धनंजय के खिलाफ जौनपुर के लाइन बाजार, सिकरारा, बक्शा और सुजानगंज कोतवाली, लखनऊ के हसनगंज, अलीगंज, गाजीपुर, हुसैनगंज और हजरतगंज कोतवाली में दो दर्जन से अधिक मुकदमे दर्ज हैं.
21 दिसम्बर 2011: तस्वीरों में देखें इंडिया टुडे
1998 में 50,000 रु. के इनामी बदमाश रहे धनंजय सिंह का नाम लखनऊ में स्वास्थ्य विभाग के पूर्व महानिदेशक बच्चीलाल और इंजीनियर गोपालशरण श्रीवास्तव से लेकर दो सीएमओ तथा जेल में डिप्टी सीएमओ की हत्या में शामिल था. पूर्व परिवार कल्याण मंत्री बाबू सिंह कुशवाहा से धनंजय की नजदीकी भी जगजाहिर है. कुशवाहा ने ही उन्हें बसपा का टिकट दिलवाया था और वे सांसद चुने गए. यही नहीं, इसके बाद खाली हुई विधानसभा सीट पर उन्होंने अपने पिता को टिकट दिलाया और यह सीट उनके परिवार के पास ही रही.
हालांकि इसी वर्ष अप्रैल माह में सीएमओ डॉ. बी.पी. सिंह की हत्या और उसके बाद एनआरएचएम घोटाला सामने आने के बाद मायावती ने कुशवाहा को पार्टी में हाशिए पर ढकेल दिया था और यहीं से बसपा में धनंजय सिंह की ढलान की शुरुआत हुई. आखिरकार, ठेकेदारी को लेकर बीते साल जौनपुर में हुए दोहरे हत्याकांड मामले में धनंजय सिंह को जेल भेज दिया गया.
14 दिसंबर 2011: तस्वीरों में देखें इंडिया टुडे
07 दिसंबर 2011: तस्वीरों में देखें इंडिया टुडे
धनंजय की तरह ही बीकापुर से बसपा के विधायक रहे जीतेंद्र सिंह बबलू ने भी चार साल से अधिक समय तक सत्तारूढ़ दल में शामिल होने का पूरा आनंद लिया. वे प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष रीता बहुगुणा-जोशी का घर जलाने के मुख्य आरोपी के तौर पर जेल भी गए. पार्टी ने जब दागियों से दूरी बनानी शुरू की तो वे किनारे ढकेल दिए गए. फिर उन्होंने पीस पार्टी का हाथ थाम लिया. लेकिन अदालत से गैर-जमानती वारंट और एक व्यापारी को धमकाने के आरोप में बबलू 6 दिसंबर को जेल भेज दिए गए. धनंजय के साथ बबलू पर भी गैंगेस्टर एक्ट लगा दिया गया है. भाजपा के वरिष्ठ नेता विजय बहादुर पाठक कहते हैं, ''बसपा नेता पार्टी में रहते हुए अपराध करते हैं और जब मायावती नाराज होती हैं तो उनकी करतूतों को जाहिर कर कार्रवाई करती हैं.''
30 नवंबर 2011: तस्वीरों में देखें इंडिया टुडे
दागियों से पार्टी का पिंड छुड़ाने की मायावती की मुहिम ने बीते एक साल में तेजी पकड़ी है. अब तक चार दर्जन से अधिक दागी मंत्रियों, विधायकों पर विभिन्न आरोपों के चलते कार्रवाई की जा चुकी है. बीते साल 25 दिसंबर को लोकायुक्त जांच में दोषी पाए जाने पर होम्योपैथिक और धर्मार्थ कार्यमंत्री राजेश त्रिपाठी का पद छीनकर मायावती ने सरकार की छवि सुधारने का जो सिलसिला शुरू किया वह अभी तक जारी है.
लोकायुक्त जांच में दोषी पाए जाने पर दुग्ध विकास राज्यमंत्री अवधपाल सिंह यादव, माध्यमिक शिक्षा मंत्री रंगनाथ मिश्र, श्रम मंत्री बादशाह सिंह और आंबेडकर ग्राम विकास मंत्री रतनलाल अहिरवार को पद से हटाया जा चुका है. यही नहीं, आपराधिक गतिविधियों में शामिल होने के आरोप में पुरुषोत्तम नरेश द्विवेदी, राममोहन गर्ग, योगेंद्र सागर, योगेश वर्मा, अशोक दोहरे, भगवान शर्मा उर्फ गुड्डू पंडित और अशोक सिंह चंदेल को पार्टी से निकाला जा चुका है.
23 नवंबर 2011: तस्वीरों में देखें इंडिया टुडे16 नवंबर 2011: तस्वीरों में देखें इंडिया टुडे
बसपा के प्रदेश अध्यक्ष स्वामी प्रसाद मौर्य कहते हैं, ''हमारी सरकार ने लोकायुक्त की सिफारिशों पर जिस तरह से मंत्रियों, विधायकों पर कार्रवाई की उसकी मिसाल देश में दूसरी नहीं है.'' मजेदार बात यह है कि नवंबर में जब विधानमंडल के शीतकालीन सत्र के पहले बसपा को सदन के भीतर अपने संख्या बल को लेकर आशंका हुई तो पार्टी ने आनन-फानन में धनंजय सिंह, उनके पिता राजदेव सिंह, अवध पाल सिंह यादव, शहनवाज राणा और अशोक दोहरे का निलंबन खत्म कर दिया था.
सफाई अभियान पिछले साल उस समय शुरू हुआ जब आंबेडकर जयंती के मौके पर गोंडा में आपराधिक प्रवृत्ति के एक बसपा कार्यकर्ता की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी. इसके बाद मायावती ने सभी जोनल को-ऑर्डिनेटरों को आपराधिक प्रवृत्ति के नेताओं को चिन्हित कर पार्टी से बाहर करने का आदेश दिया था. एक जोनल को-ऑर्डिनेटर बताते हैं, ''अब तक पूरे प्रदेश में 500 से अधिक बसपा नेताओं को बाहर का रास्ता दिखाया जा चुका है.''
9 नवंबर 2011: तस्वीरों में देखें इंडिया टुडे2 नवंबर 201: तस्वीरों में देखें इंडिया टुडे
दामन से दाग छुड़ाने की मायावती की मुहिम को विपक्षी पार्टियां ढकोसला बता रही हैं. समाजवादी पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष अखिलेश यादव कहते हैं, ''बसपा में अपराधियों का पोषण, संवर्धन और महिमामंडन किया गया है. इसी का नतीजा है कि पूरा प्रदेश अपराधियों के अत्याचार से कराह रहा है.'' कांग्रेस की प्रदेश अध्यक्ष रीता बहुगुणा-जोशी उनसे सहमति जताते हुए कहती हैं, ''बसपा सरकार ने बहुमत का दुरुपयोग करते हुए अपराधियों को बढ़ावा दिया.''
लेकिन मायावती का कहना है कि दागी नेता दूसरे दलों से बसपा में आए हैं. वे कहती हैं, ''सरकार ने ऐसे लोगों को जनहित में बिना किसी हिचक के जेल भेजा है. यही नहीं, ऐसे लोगों ने बसपा में आने के बाद पार्टी के पुराने कार्यकर्ताओं को भी खराब कर दिया है.'' कुशवाहा के हश्र को देखते हुए लगता है कि चुनाव से पहले दामन साफ करने की धुन में पड़ी पार्टी में 'खराब' हो चुके पदाधिकारियों की भी खैर नहीं है.

