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पंजाब में बूट पॉलिश राज खत्म

वीआइपी घरों में काम कर रहे पुलिसकर्मियों को सुखबीर सिंह ने वापस बुलाया.

सुखबीर सिंह
सुखबीर सिंह
अपडेटेड 5 जून , 2012

समूचे पंजाब के वीआइपी घरों में रसोइया, ड्राइवर, माली और यहां तक कि मालिश करने का काम कर रहे करीब 2,800 पुलिसकर्मियों (तीन बटालियन के बराबर) को अपनी बैरकों में वापस जाने का आदेश दिया गया है. पंजाब के उप-मुख्यमंत्री सुखबीर सिंह बादल को जब सुरक्षा के नाम पर तैनात इन प्रशिक्षित पुलिसकर्मियों के भारी दुरुपयोग की जानकारी मिली तो उन्होंने तत्काल इन्हें वापस बुलाने का आदेश दिया.

राज्‍य में '80 के दशक के शुरुआती दौर (जब राज्‍य में आतंकवाद ने जड़ें जमा ली थीं) के बाद यह सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा का अब तक का सबसे बड़ा कदम है. राज्‍य के गृह मंत्री की भी जिम्मेदारी संभाल रहे बादल ने कहा कि 1,800 पुलिसकर्मी अब तक वापस बुलाए जा चुके हैं. उन्होंने 23 मई को इंडिया टुडे को बताया, ''मैंने 1,000 और पुलिसकर्मियों की वापसी के आदेश पर कुछ समय पहले ही हस्ताक्षर किए हैं.''

बादल ने 6 मार्च को राज्‍य के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) सुमेध सिंह सैनी से वीआइपी सुरक्षा की समीक्षा करने को कहा था. उन्हें पता चला कि 8,000 से ज्‍यादा पुलिसकर्मी (राज्‍य के 70,000 की संख्या वाले मजबूत पुलिस बल के दसवें हिस्से से भी ज्‍यादा) लोगों और परिवारों की सुरक्षा के लिए तैनात हैं. आइजी (सुरक्षा) संजीव कालरा ने बताया कि राज्‍य में 2,000 से ज्‍यादा 'प्रोटेक्टीज' (पुलिस सुरक्षा हासिल करने वाले लोग) हैं.

बादल ने कहा, ''मुझे ऐसा लगा कि इन लोगों को अब सुरक्षा बंदोबस्त की कोई जरूरत नहीं है.'' उन्होंने सैनी से कहा है कि जो पुलिसकर्मी ऐसे निजी सुरक्षा बंदोबस्त से वापस आ रहे हैं, उनके लिए दो माह का रिफ्रेशर कोर्स चलाया जाए. उधर कांग्रेस के पूर्व विधायक सुखपाल खैरा, जिनका गनर वापस बुला लिया गया है, का आरोप है कि अकाली-भाजपा सरकार इस मामले में मुंहदेखी कर रही है.

बादल ने पूर्व कांग्रेसी मंत्री हरनाम दास जौहर के साथ ही भाजपा नेता और पूर्व मंत्री तीक्षण सूद, अकाली दल के नेताओं सरबजीत मक्कड़ और बिक्रमजीत खालसा के भी सुरक्षा बंदोबस्त में कटौती की है.

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