आरुषि तलवार की हत्या के मामले में सीबीआइ ने एक ही सबूत पर आधारित दो परस्पर विरोधी रिपोर्टें दाखिल की हैं. संयुक्त निदेशक अरुण कुमार के नेतृत्व में पहली सीबीआइ जांच जून 2008 और अप्रैल 2009 के बीच हुई.
अरुण कुमार ने अपनी जांच मई 2009 में उपनिदेशक नीलाभ किशोर के नेतृत्व वाली टीम को सौंप दी. अरुण कुमार की टीम ने जहां आरुषि के पिता राजेश तलवार को बरी कर दिया और तीन नौकरों पर संदेह जाहिर किया, वहीं दूसरी टीम ने नौकरों को बरी करते हुए तलवार की ओर उंगली उठाई. सीबीआइ टीमों के परस्पर विरोधी दोनों निष्कर्ष सही नहीं हो सकते. एकमात्र संदिग्ध तलवार कहते हैं कि मामले को दोबारा खोला जाए.
तो 16 मई, 2008 को आरुषि की हत्या किसने की? अरुण कुमार की टीम के मुताबिक, हत्या वाली रात को तीन घरेलू नौकर-कृष्णा, राजकुमार और विजय मंडल हेमराज के कमरे में शराब पीते हुए आरुषि के बारे में बात कर रहे थे, शराब के नशे में वे आरुषि के कमरे में गए, उसका मुंह बंद कर दिया और किसी भोथरी चीज से उसके सिर पर वार किया.{mospagebreak}
अरुण कुमार के मुताबिक, ''उन्होंने आरुषि के साथ जबरन संबंध बनाने की भी कोशिश की.'' इससे उनमें झगड़ा होने लगा. इस डर से कि शोर सुनकर उसके माता-पिता न जाग जाएं, वे छत पर गए, जहां राजकुमार और कृष्णा का हेमराज से झगड़ा हुआ और उन्होंने हेमराज की हत्या कर दी.
फिर कृष्णा और राजकुमार आरुषि के कमरे में वापस आए और उसकी गर्दन रेत दी. अरुण की टीम ने नौकरों का नारको टेस्ट कराया लेकिन तलवार दंपती को झूठ पकड़ने वाली मशीन से परखने के बाद छोड़ दिया.
किशोर की जांच हत्या वाले दिन हत्या वाली रात की घटनाओं का इससे एकदम विपरीत ब्यौरा देती है. उसके मुताबिक, आरुषि की हत्या के वक्त तीनों नौकर तलवार दंपती के घर पर नहीं थे. घर में तलवार दंपती ही थे. इस जांच का दावा है कि आरुषि की हत्या के बाद उसके निजी अंगों को साफ कर दिया गया, खून के धब्बों और छत की ओर जाने वाली सीढ़ियों पर खरोंचे जाने के निशान को भी साफ कर दिया गया.{mospagebreak}
उनका मानना है कि हेमराज को बेडशीट में लपेटकर छत तक ले जाया गया. डाइनिंग टेबल पर स्काच व्हिस्की की बोतल, जिस पर मरने वाले दोनों व्यक्तियों के खून के निशान थे, की मौजूदगी इशारा करती है कि हत्यारे ने अपराध के बाद हो सकता है, शराब पी हो. आरुषि का मोबाइल गायब था, जो हत्या के 14 महीने बाद सितंबर 2009 में मिला, उसकी मेमोरी पूरी तरह मिटा दी गई थी.
अरुण कुमार की टीम के उलट किशोर ने तलवार दंपती का नारको टेस्ट कराया. क्लोजर रिपोर्ट में कहा गया है ''नौकरों के खिलाफ कोई सबूत नहीं है, सिवा नारको टेस्ट के, जिस पर विश्वास नहीं किया जा सकता.'' इसी रिपोर्ट में एजेंसी कहती है कि तलवार दंपती पर किए वैज्ञानिक टेस्टों से ''स्पष्ट पता नहीं चलता कि अपराध में उनका हाथ है.'' सीबीआइ का नतीजा हैः नौकर निर्दोष, तलवार संदिग्ध.
किशोर की टीम ने एक नया सबूत पेश करने का फैसला किया- गोल्फ की एक छड़ी, जिसे उन्होंने वही भोथरी चीज बताया जिससे आरुषि की मौत हुई. आरुषि का गला उसके बाद किसी तेज धारदार चीज से 'पेशेवर' हाथों से रेता गया. हालांकि क्लोजर रिपोर्ट में कहा गया है कि ''हत्या के हथियार गोल्फ छड़ी को अपराध से जोड़ा नहीं जा सकता.''{mospagebreak}
किशोर की टीम की ओर से नौकरों को बरी कर दिया गया, क्योंकि वे प्रत्यक्ष रूप से घर में नहीं थे. फिर वे कहां थे? किशोर की रिपोर्ट के मुताबिक, दुर्रानी (तलवार दंपती के पारिवारिक मित्र) का घरेलू नौकर राजकुमार रात 11.30 से रेलवे स्टेशन पर था क्योंकि वह दुर्रानी की पत्नी को लेने गया था.
दुर्रानी इनकार करते हैं कि उन्होंने सीबीआइ को इस तरह की कोई बात बताई थी. कृष्णा को उत्तर प्रदेश पुलिस ने उसके घर से हिरासत में लिया. तब वह सो रहा था. रिपोर्ट में बताया गया कि इस बात के ''प्रत्यक्ष गवाह'' हैं, (जो कृष्णा के परिवार के सदस्य थे) की हत्या वाली रात वह घर पर अकेला था.
किशोर की टीम ने पोस्टमार्टम करने वाले डॉक्टरों से भी पूछताछ की. नए तथ्यों के मुताबिक सिर पर चोट की जगह पहले की पोस्टमार्टम की रिपोर्ट में बताई जगह से अलग थी. यह भी कहा गया कि ''आरुषि के गुप्तांग की झिल्ली फट गई थी, और पहले से ऐसा था.'' यह बात मूल पोस्टमार्टम रिपोर्ट में नहीं थी.
क्लोजर रिपोर्ट में और भी कई खामियां हैं, जैसे अवकाश प्राप्त पुलिस अधिकारी के.के. गौतम की भूमिका, जिन्होंने आरुषि की हत्या के एक दिन बाद हेमराज की लाश का पता लगाया. रिपोर्ट के मुताबिक, गौतम एक साझा मित्र के जरिए तलवार परिवार से परिचित थे और उनकी सेवा का इस्तेमाल आरुषि की पोस्टमार्टम रिपोर्ट से 'बलात्कार' शब्द हटाने के लिए किया गया.{mospagebreak}
सीबीआइ कहती है कि तलवार दंपती ने पहले हेमराज के शव को पहचानने से इनकार कर दिया, यह शक पैदा करता है. रिपोर्ट कहती है कि गोल्फ की छड़ी साल भर तक छिपाकर रखी गई और उसे अच्छी तरह साफ कर दिया गया. तलवार दंपती ने ही सीबीआइ जांच की मांग की थी.
सीबीआइ ने उस रात की घटनाओं की धुंधली तस्वीर पेश की है. क्लोजर रिपोर्ट का कुल निष्कर्ष हैः ''अपराध में हत्या का स्पष्ट मकसद मौजूद नहीं है और घटनाओं के क्रम की जानकारी पूर्ण नहीं है. इसके अलावा अपराध के एक हथियार को हासिल नहीं किया जा सका है और नौकरों या माता-पिता से उनके संबंधों की भी स्पष्ट जानकारी नहीं है.'' फिर राजेश तलवार अब भी संदिग्ध क्यों हैं?
अंधी सुरंग
हाल के अनसुलझे मामले की जांच को सीबीआइ को बंद करना पड़ा
दिसंबर 2010: आरुषि और हेमराज की हत्या का मामला
नवंबर 2010: रुचिका गिरहोत्रा की आत्महत्या जिसमें हरियाणा के पूर्व डीजीपी एस.पी.एस. राठौर को उकसाने के लिए नामजद किया गया था.
अप्रैल 2010: 1984 में सिखों के खिलाफ दंगों में कांग्रेस नेता जगदीश टाइटलर की भूमिका.
अक्तूबर 2009: इटली के व्यापारी ओत्तावियो क्वात्रोक्कि के फिलाफ बोफोर्स में दलाली का मामला.

