उन्नीस वर्षीया हरप्रीत कौर 'रोजी' ने 20 अप्रैल, 2000 को दम तोड़ दिया, जबकि उसी रोज उनसे उनके प्रेमी कमलजीत सिंह के साथ उनकी शादी का वादा किया गया था. तब कमलजीत की उम्र 22 साल थी. पटियाला स्थित सीबीआइ की विशेष अदालत ने 30 मार्च को रोजी की मां को दोषी ठहराते हुए पांच साल के सश्रम कारावास की सजा सुनाई. पंजाब की सबसे प्रभावशाली महिला नेताओं में से एक बीबी जागीर कौर को प्रकाश सिंह बादल की पुनर्निर्वाचित सरकार में 14 मार्च को कैबिनेट मंत्री के रूप में शामिल किया गया था.
अदालत ने उन्हें अपनी किशोर बेटी का अपहरण करने, उसे गैरकानूनी तरीके से बंदी बनाने और गर्भपात के लिए दबाव डालने का दोषी पाया. ये घटनाएं रोजी की मौत का कारण बनी थीं. जागीर की मदद करने वाले तीन अन्य लोगों-सब-इंस्पेक्टर निशान सिंह, परमजीत रायपुर और दलविंदर कौर ढेसी को भी पांच साल के सश्रम कारावास की सजा सुनाई गई.
जागीर ने 1997 में भोलाठ से विधानसभा चुनाव जीता था और पंजाब की पर्यटन मंत्री बनी थीं. बाद में उन्हें शिरोमणि गुरद्वारा प्रबंधक कमेटी की पहली महिला अध्यक्ष बनाया गया. कमलजीत ने इंडिया टुडे को बताया, 'जागीर अपनी बेटियों के लिए जिंदगी बेहतर चाहती थीं.' छोटे किसान के बेटे कमलजीत और रोजी पहली बार 1996 में मिले थे. उस समय दोनों बेगोवाल के एक स्कूल में पढ़ते थे. रोजी ने 6 सितंबर, 1999 को चंडीगढ़ में चुपचाप सगाई कर ली. उस समय वह गर्भवती थीं. कुछ महीने बाद, वह जागीर के बहलाने-फुसलाने पर घर लौट आईं. कमलजीत बताते हैं, 'लेकिन जब रोजी ने अपनी मां को गर्भस्थ शिशु के बारे में बताया तो वे खफा हो गईं.' शादी की तारीख 20 अप्रैल, 2000 तय थी. लेकिन इस दिन बेगोवाल में आनन-फानन में रोजी का अंतिम संस्कार कर दिया गया.
कमलजीत तब तक मुकदमा लड़ते रहे जब तक कि उन्हें अपनी प्रेमिका के लिए न्याय नहीं मिला. उन्हें यकीन है कि जागीर और बाकी लोग रोजी की मौत के लिए सीधे जिम्मेदार हैं. वे कहते हैं, 'उन लोगों ने उसे मार डाला.' वे कोर्ट के फैसले को चुनौती देने वाले हैं.

