अर्थव्यवस्था में सुस्ती का असर कंपनियों की ओर से जारी किए जाने वाले तिमाही नतीजों पर भी देखने को मिल रहा है. मंगलवार के सत्र में टाटा मोर्टस ने वित्त वर्ष 2019 की चौथी तिमाही के नतीजे जारी किए. कंपनी का मुनाफा पिछले साल की तुलना में 49 फीसदी गिरकर 1,108 करोड़ रुपए रहा. कमजोर तिमाही नतीजों के बाद कंपनी के शेयर में बिकवाली देखने को मिली और शेयर दिन के दौरान 8 फीसदी तक टूट गया. टाटा मोटर्स की ही तरह पूरे ऑटो सेक्टर में तिमाही नतीजों में लगभग यही रुझान दिखा. ऑटोमोबाइल सेक्टर में बिक्री लगातार 10 महीनों से घट रही है. यह अर्थव्यवस्था में खपत घटने का सीधा संकेत है.
जापान की वित्तीय सेवा प्रदाता फर्म नोमुरा की ओर से जारी रिपोर्ट के मुताबिक, अर्थव्यवस्था में खपत के घटने का कंपनियों के तिमाही नतीजों पर नकारात्मक असर पड़ा है. ऑटो कंपनियों के मार्जिन में बीते एक साल में 128 बेसिस प्वाइंट की कमी का अनुमान है. ऑटो की ही तरह एफएमसीजी कंपनियों पर भी आर्थिक गतिविधियों में सुस्ती का असर पड़ा है. पहली तिमाही में जीएसटी और नोटबंदी के असर से उभरने के बाद कंपनियों ने अच्छे नतीजे पेश किए थे, लेकिन खपत प्रभावित होने से कंपनियों के वॉल्यूम पर चोट पहंची है.
रिपोर्ट के मुताबिक आने वाली तिमाहियों में खपत में सुधार चुनौतीपूर्ण होगा. सातवें वेतन आयोग की सिफारिशों के बाद सरकारी कर्मचारियों की सैलरी में धीमी बढ़ोतरी, कच्चे तेल की कीमतों में उछाल, एफबीएफसी संकट के कारण उपभोक्ता कर्ज में गिरावट और निजी निवेश न बढ़ने से खपत प्रभावित रहेगी.
कैपिटललाइन के आंकड़ों के मुताबिक वित्त और एनर्जी क्षेत्र के अलावा जनवरी-मार्च तिमाही में 564 कंपनियों की ओर से जारी किए गए नतीजों में शुद्ध मुनाफा सालाना आधार पर 10.3 फीसदी कम हो गया. जबकि इन कंपनियों की कुल बिक्री 9 फीसदी बढ़ी. बिक्री बढ़ने की यह रफ्तार बीती 6 तिमाहियों में सबसे कम रही. हालांकि बैंकिंग सेक्टर को जोड़कर देखें तो 670 कंपनियों का मुनाफा 26.4 फीसदी बढ़ गया है. इसकी मुख्य वजह बैंकिंग सेक्टर में आइ अच्छी रिकवरी है.
कार्वी स्टॉक ब्रोकिंग के हेड (रिसर्च) रवि सिंह कहते हैं, "अर्थव्यवस्था की बड़ी पिक्चर देखेंगे तो निश्चित तौर पर कंपनियों के लिए यह बेहतर तिमाही नहीं रही लेकिन क्षेत्र विशेष की बात करें तो बैंकिंग सेक्टर में कुछ सुधार के संकेत जरूर मिले हैं.’’ बैंकों की एसेट क्वालिटी में सुधार आया है और एनपीए भी कम हुए हैं. चुनिंदा एनबीएफसी कंपनियों मसलन, एलआइसी हाउसिंग, इंडियाबुल्स ने अच्छे तिमाही नतीजे पेश किए हैं.
आइटी और फॉर्मा सेक्टर के लिए यह तिमाही बहुत बेहतर नहीं रही है. फॉर्मा सेक्टर पर यूएसएफडीए के आदेशों का असर दिखा तो आइटी कंपनियों की भी गाइडेंस कमजोर दिखी. रवि सिंह आगे कहते हैं, ‘’तेल-गैस क्षेत्र के लिए अगली तिमाही चुनौतीपूर्ण रह सकती है. इसकी वजह कच्चे तेल की कीमतों में आया उछाल है.’’
वहीं, एक्सकॉर्ट सिक्योरिटी के हेड (रिसर्च) आसिफ इकबाल कहते हैं, ‘’तमाम आर्थिक संकेत अर्थव्यवस्था में सुस्ती की ओर इशारा कर रहे हैं.’’ जीडीपी ग्रोथ, आइआइपी, पीएमआइ जैसे तमाम आंकड़े फैक्ट्रियों में उत्पादन घटने का संकेत दे रहे हैं.’’ उत्पादन गतिविधियों में आई गिरावट का असर ऑटो, ऑटो एंसलरी, टेक्सटाइल जैसे सेक्टर्स पर दिखना लाजमी है. कमजोर मानसून भी अर्थव्यवस्था के लिए बड़ी चुनौती है. इसका असर ऑटो, एफएमसीजी, एग्रीकल्चर से जुड़ी कंपनियों, जेम्स एंड ज्वैलरी जैसे सेक्टर्स पर देखने को मिल सकता है.
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