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महाराष्ट्र में अब बंटेगा अटल आहार

महाराष्ट्र सरकार ने विस्थापित और परप्रांतीय मजदूरों की व्यवस्था के लिए 45 करोड़ रूपए की निधि मंजूर की

फोटोः लोकसंवाद
फोटोः लोकसंवाद
अपडेटेड 31 मार्च , 2020

महाराष्ट्र सरकार ने लॉकडाउन की वजह से विस्थापित और फंसे हुए परप्रांतीय मजदूरों के लिए काम करना शुरू कर दिया है ताकि वे भूख से नहीं मरें. इनके रहने और खाने की व्यवस्था के लिए 45 करोड़ रूपए की निधि को मंजूरी दे दी गई है. इसके साथ ही राज्य के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने ट्वीट कर जानकारी दी है कि 70,399 परप्रांतीय मजदूरों और बेघर लोगों के लिए पूरे राज्य में 262 रिलीफ कैंप तैयार किए गए हैं जहां उन्हें रहने और खाने की सुविधा मिलेगी. इसके अलावा बांधकाम निर्माण से जुड़े पंजीकृत-गैरपंजीकृत मजदूरों को अटल आहार योजना के तहत भोजन देने की भी व्यवस्था की जा रही है.

कोरोना वायरस को रोकने के लिए लॉकडाउन की घोषणा के बाद राज्य के छोटे उद्योग बंद हो गए. इससे उद्योगों में काम करने वाले मजदूरों और दिहाड़ी मजदूरों के सामने रहने और खाने की समस्या खड़ी हो गई. कोई सुविधा नहीं मिलने से ये मजदूर पलायन करने लगे. इससे सरकार की चिंता बढ़ गई कि कोरोना वायरस विस्तृत रूप से फैल सकता है. दूसरे प्रांतों के कुछ मुख्यमंत्रियों ने उद्धव ठाकरे से अनुरोध किया कि पलायन करने वाले मजदूरों को रोका जाए. ठाकरे इन मजदूरों से जहां हैं वहीं रूकने की अपील की. उन्होंने कहा कि उनके रहने और खाने की सुविधा महाराष्ट्र सरकार करेगी. ठाकरे की अपील का इन मजदूरों पर थोड़ा असर हुआ है.

इधर मुख्यमंत्री ठाकरे ने मजदूरों से किए वादे के बाद सोमवार को कई अहम फैसले लिए. इसमें मजदूरों के रहने, अनाज और खाने की तुरंत व्यवस्था करने के लिए मुख्य सचिव अजोय मेहता की अध्यक्षता में 45 करोड़ रूपए की निधि को मंजूरी दी गई, ये निधि विभागीय आयुक्त कोकण 15 करोड़ और पुणे 10 करोड़ के अलावा नागपुर, अमरावती, औरंगाबाद और नाशिक को 5-5 करोड़ रूपए दिए गए हैं. इसमें राज्य के सभी जिलों को शामिल किया गया है.

राज्य के कामगार मंत्री दिलीप वलसे पाटील के मुताबिक राज्य में जगह-जगह पर बांधकाम मजदूर फंसे हुए हैं और उन्हें भोजन नहीं मिल रहा है. इसलिए उन्हें मोदी आहार योजना के तहत भोजन के अलावा उनके रहने का भी किया जा रहा है. उन्होंने बताया कि लॉकडाउन के कारण उत्तर प्रदेश और बिहार के कई परप्रांतीय मजदूर भी हैं जो वाहन नहीं मिलने से रास्ते में अटक गए हैं. ऐसे मजदूर मुंबई, नई मुंबई, ठाणे, पुणे और नागपुर जिलों में हैं. इस बीच राज्य के आदिवासी विकास मंत्री केसी पाडवी ने विभागीय अधिकारियों और कर्मचारियों को निर्देश दिया है कि राज्य में कई आदिवासी भी फंसे हुए हैं. उनकी तलाश कर उनके रहने-खाने की व्यवस्था की जाए.

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