वर्षों तक नजरबंद रहीं म्यांमार की लोकतंत्र समर्थक नेत्री आंग सू की ने 2012 का उपचुनाव जीतने के तुरंत बाद कहा कि वे दिल्ली स्थित अपने कॉलेज लेडी श्रीराम कॉलेज (एलएसआर) फॉर विमेन का दौरा करना चाहती हैं. जैसे ही उन्होंने यह बात कही उनके कॉलेज (जहां से उन्होंने 1964 में राजनीतिशास्त्र में बीए किया था) में हलचल बढ़ गई. उनकी जीत का उल्लास मनाने वाले बैनरों से सजे कॉलेज ने उनके सम्मान में कई व्याख्यान आयोजित किए और फिल्म भी दिखाई गई.
एलएसआर की प्रिंसिपल मीनाक्षी गोपीनाथ ने कहा, ''एलएसआर में हम अपनी पूर्व छात्राओं के उपलब्धि के हर कमाल पर गर्व करते हैं, इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि उपलब्धि कितनी बड़ी है. दुनिया के कई प्रख्यात नेताओं को सलाह देने का हमारा लंबा इतिहास रहा है.''
लाल ईंटों वाली दीवारों और हरे-भरे बगीचों वाले एलएसआर परिसर से निकली शिक्षकों, राजनीतिज्ञों, समाजशास्त्रियों, कॉर्पोरेट प्रमुखों, पत्रकारों और अर्थशास्त्रियों की सूची पर यदि नजर डालें तो इस बात पर कम ही अचरज होगा कि यह कॉलेज इंडिया टुडे-नीलसन सर्वे में भारत के सर्वश्रेष्ठ आर्ट कॉलेजों की सूची में लगातार तीसरे साल पहले रैंक पर बरकरार है.
गोपीनाथ कहती हैं, ''पिछले कुछ वर्षों से हमारा मुख्य रूप से जोर तय पाठ्यक्रम की निरंकुशता को तोड़ने पर रहा है. हम इस बात पर काफी समय देते हैं कि हमारी छात्राओं को इंटरनेशनल एक्सपोजर और स्टडी एक्सपीरिएंस हासिल हो.'' इस लिहाज से ही कॉलेज ने हेनरिक बॉल फाउंडेशन के साथ साझेदारी में 2011 में एक ऑटम स्कूल का आयोजन किया. इसके वैश्विक वित्त और मानव सुरक्षा पर आयोजित इंटरेक्टिव सत्रों में बड़ी संख्या में बांग्लादेश, नेपाल, म्यांमार, पाकिस्तान और चीन की अतिथि छात्राएं आईं.
पिछले अकादमिक वर्ष की एक और खासियत एक अंतरराष्ट्रीय कंसोर्शियम रहा जिसमें 32 अमेरिकी विश्वविद्यालय शामिल हुए और इसमें 'शिक्षा के अंतरराष्ट्रीयकरण' पर चर्चा हुई. सामाजिक जागरूकता और सामुदायिक भावना इस कॉलेज की गर्व करने योग्य विशेषताएं हैं. इस कॉलेज की 800 से ज्यादा छात्राएं नेशनल सोशल सर्विस से सक्रियता से जुड़ी हैं, जो इन्फोसिस फाउंडेशन और श्रीराम फाउंडेशन जैसे 22 से ज्यादा एनजीओ के साथ मिलकर काम करता है.
गोपीनाथ कहती हैं, ''मानवता सिर्फ बातों में नहीं बल्कि काम में दिखनी चाहिए. आरटीआइ पहल से लेकर महिलाओं में उद्यमिता के विकास तक हमारी छात्राएं समाज के कई क्षेत्रों में सक्रिय हैं. छात्राओं की एक गतिविधि 'ध्यान' पर मुझे खास तौर पर गर्व है. यह भविष्य की एक इंटरेक्टिव कक्षा है. यहां छात्राएं टकरावों एवं अंतर-धार्मिक संवादों पर चर्चा करती हैं और जनजीवन में नैतिकता एवं विकल्पों के मसलों को समझने की कोशिश करती हैं.''
दूसरे रैंक पर मौजूद सेंट स्टीफंस कॉलेज ने भी सामान्य विश्वविद्यालयी पाठ्यक्रम में कुछ और जोड़ने के लिए कठोर मेहनत की है. कई अंतरराष्ट्रीय विद्वानों को कॉलेज में व्याख्यान देने के लिए आमंत्रित किया जा चुका है. सेंट स्टीफंस के प्रिंसिपल वालसन थम्पू का कहना है, '' अर्थशास्त्र के फुलब्राइट के विद्वानों से लेकर यूनिवर्सिटी ऑफ बोस्टन के अंग्रेजी प्रोफेसरों तक हमने छात्रों को उनके अध्ययन क्षेत्र का समग्र दृष्टिकोण प्रदान करने के लिए अपना सर्वोत्तम प्रयास किया है. हमने सांस्कृ तिक प्रशिक्षण के केंद्र स्थापित किए हैं जिनमें भारतीय उपमहाद्वीप की कला एवं संस्कृति पर वैकल्पिक कोर्स संचालित किए जाते हैं.''
कला विषयों की पढ़ाई की इच्छा रखने वालों के लिए मुंबई का सेंट जेवियर्स कॉलेज भी काफ ी कु छ पेश करता है. देशभर में तीसरे रैंक पर रहने वाला यह कॉलेज अकादमिक और सांस्कृतिक संपर्कों के बीच संतुलन रखना चाहता है जिसमें ऐसी गतिविधियों पर विशेष जोर दिया जाता है जिससे छात्रों में मूल्य निर्माण को बढ़ावा मिले. सेंट जेवियर्स, मुंबई के प्रिंसिपल फ्रे जर मैस्करेनहास एस.जे. कहते हैं, ''हमारा कॉलेज सामजिक विज्ञान और ह्यूमेनिटीज की पढ़ाई में अव्वल है. हम विश्व प्रसिद्ध हेराज इंस्टीट्यूट के माध्यम से भारतीय इतिहास एवं संस्कृति और पाली एवं अरबी जैसी भाषाओं की पढ़ाई में सबसे आगे रहे हैं. सेंट जेवियर्स मुंबई विश्वविद्यालय के तहत पहला और एकमात्र स्वायत्त कॉलेज है. हमें अपना पाठ्यक्रम और शिक्षण मूल्यांकन का तरीका खुद विकसित करने की आजादी मिलने से अध्यापन में निखार आया है और पूछताछ आधारित पढ़ाई से शिक्षण की गुणवत्ता में उत्साहजनक बढ़त हुई है.''
तो आखिर वह क्या चीज है जो एलएसआर को देश के अन्य आर्ट्स कॉलेजों से अलग करती है? गोपीनाथ बताती हैं, ''सामाजिक जवाबदेही के साथ नेतृत्व, जिसके लिए एलएसआर वास्तव में जाना जाता है. हमारी ताकत उस स्वामित्व की भावना से आती है जो हमारी फैकल्टी हर कोर्स में लेकर आती है.''

