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अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए काम कर रही है महाराष्ट्र सरकार

कोरोना प्रकोप को रोकने के साथ अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने की दिशा में महाराष्ट्र सरकार ने उपमुख्यमंत्री और वित्त मंत्री अजित पवार के नेतृ्त्व में सात सदस्यीय उप समिति की आयोजित बैठक में 11 सदस्यीय एक विशेषज्ञ समिति का गठन किया. यह समिति 30 अप्रैल तक सरकार को अपनी रिपोर्ट सौंपेगी.

कोरोना संकट के बीच अर्थव्यवस्था सुधारने के प्रयास
कोरोना संकट के बीच अर्थव्यवस्था सुधारने के प्रयास
अपडेटेड 14 अप्रैल , 2020

मुंबई. कोरोना के कारण लॉकडाउन लंबा खिंच जाने से राज्य की बिगड़ती अर्थव्यवस्था को लेकर महाराष्ट्र सरकार की परेशानी बढ़ गई है. इसलिए कोरोना प्रकोप को रोकने के साथ अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने की दिशा में राज्य सरकार काम करने लगी है. मंगलवार को राज्य के उपमुख्यमंत्री और वित्त मंत्री अजित पवार के नेतृ्त्व में सात सदस्यीय उप समिति की आयोजित बैठक में 11 सदस्यीय एक विशेषज्ञ समिति का गठन किया गया जो 30 अप्रैल तक सरकार को अपनी रिपोर्ट सौंपेगी. इस रिपोर्ट के आधार पर राज्य की अर्थव्यवस्था को सुधारने की कोशिश की जाएगी.

हालांकि, इस बैठक से पहले उद्योग मंत्री सुभाष देसाई भी राज्य में उद्योग-धंधे को चालू करने के लिए एक ब्लू प्रिंट तैयार करवा रहे हैं जिसकी मदद से राज्य की अर्थव्यवस्था को सुधारा जा सके और किसानों एवं मजदूरों को भी राहत दी सके. सूत्रों का कहना है कि लॉकडाउन ने राज्य सरकार की अर्थव्यवस्था को चरमरा दिया है जिससे राज्य सरकार की चिंता बढ़ी हुई है.

लॉकडाउन की वजह से खासकर छोटे-मंझोले उद्योग-धंधे बंद हैं. मजदूर जगह-जगह फंसे हुए हैं जिससे उनके सामने रोजी-रोटी का समस्या पैदा हो गई है. इधर मजदूर नहीं मिलने से किसानों की करोड़ों की फसल बर्बाद हो रही है. कोरोना का प्रकोप भी पूरे राज्य को अपने चपेट ले लिया है. लेकिन राज्य के कुछ जिले हैं जहां कोरोना ने अपने पांव नहीं फैलाए हैं जिससे राज्य सरकार को उन जिलों से आस बनी हुई है कि वे जिले फिलहाल राज्य की बिगड़ती अर्थव्यवस्था को सुधारने में सहयोग कर सकते हैं.

पिछले हफ्ते राज्य सरकार ने कोरोना वायरस के कारण उत्पन्न स्थिति से निपटने और राज्य की अर्थव्यवस्था को फिर से पटरी पर लाने के लिए उप समिति का गठन किया था. इस उप समिति की बैठक में मजदूरों को तारणहार के रूप में देखा गया. क्योंकि, जब तक मजदूरों को उद्योग-धंधों और खेतों में शामिल नहीं किया जाएगा तब तक अर्थव्यवस्था को सुधारना मुश्किल होगा. इस बैठक के बाद राज्य के लोक निर्माण मंत्री अशोक चव्हाण ने कहा है कि राज्य की वित्तीय स्थिति को पुनर्जीवित करने के लिए उन जिलों पर फोकस किया जा सकता है जो कोरोना संकट में ग्रीन जोन में हैं यानि उन जिलों में कोरोना वायरस का प्रकोप नहीं है. इन जिलों में सीमित तरीके से उद्योग-धंधों और आजीविका के साथ कृषि कार्यों के लिए अनुमति दी जा सकती है.

इस बात पर ध्यान रखा जाएगा कि यहां कोरोना का प्रसार न हो. यहां उचित स्वास्थ्य चिकित्सा के साथ काम करने के लिए मजदूरों को इजाजत दी जा सकती है. चव्हाण ने साफ संकेत दिया कि ग्रीन जोन में 30 फीसद मजदूरों के सहारे राज्य की बिगड़ी अर्थव्यवस्था को ठीक करने में मदद मिल सकती है.

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