महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार का 28 जनवरी को प्लेन क्रैश में निधन हो गया. उनका विमान लैंडिंग के वक्त हादसे का शिकार हो गया, जिसके बाद अजित समेत कुल छह लोगों की मौत हो गई. अजित पवार का प्लेन लैंडिंग स्ट्रिप के बगल वाले इलाके में गिर गया था. लैंडिंग करते वक्त ही विमान का कंट्रोल गड़बड़ हो गया था. चश्मदीदों ने बताया कि लैंडिंग की कोशिश करते वक्त विमान लड़खड़ाया और पल भर में हादसे का शिकार हो गया. क्रैश होने के बाद करीब पांच धमाके हुए और विमान आग का गोला गोला बन गया. हादसे के बाद प्लेन पूरी तरह से जल कर नष्ट हो गया और इसमें सवार सभी लोगों की मौत हो गई. अजित पवार की विमान हादसे में मौत पर ये ज़रूरी 9 सवाल जो पूछे जा रहे हैं -
अजीत पवार किस विमान में यात्रा कर रहे थे?
महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजीत पवार जिस विमान में यात्रा कर रहे थे वह एक बिज़नेस जेट था. इस विमान का नाम Learjet 45 है और यह कोई कमर्शियल एयरलाइन का विमान नहीं बल्कि चार्टर और वीआईपी मूवमेंट के लिए इस्तेमाल होने वाला जेट है.
Learjet 45 का इस्तेमाल आमतौर पर राजनेताओं, वरिष्ठ अधिकारियों और कॉरपोरेट यात्राओं के लिए किया जाता है, क्योंकि यह कम समय में उड़ान भर सकता है और छोटे एयरपोर्ट्स पर भी उतरने में कारगर होता है.
Learjet 45 क्या है और इसकी खासियत क्या है?
Learjet 45 को कनाडा की कंपनी Bombardier Aerospace ने बनाया था, और इसे 1998 में सेवा में उतारा गया था. यह मिड-साइज़ बिज़नेस जेट की कैटेगरी में आता है. इस विमान में आमतौर पर 6 से 8 पैसेंजर सफर कर सकते हैं, और इसे उड़ाने के लिए दो पायलट होते हैं. इसकी रफ्तार करीब 800 से 850 किलोमीटर प्रति घंटा तक होती है और ये करीब 3000 किलोमीटर की दूरी बिना रुके तय कर सकता है.
हादसा किस तरह हुआ और इसमें क्या सामने आया?
इस उड़ान से जुड़ी घटना के बाद सवाल उठे कि क्या मौसम की स्थिति, रनवे की लंबाई या तकनीकी कारणों ने इसमें भूमिका निभाई? अब तक एविएशन विशेषज्ञों ने जो बताया उसके मुताबिक छोटे बिज़नेस जेट्स में मौसम का असर अपेक्षाकृत ज्यादा होता है. खासकर तेज़ हवा, कम विज़िबिलिटी और बारिश जैसी परिस्थितियों में टेक ऑफ और लैंडिंग के दौरान जोखिम बढ़ जाता है. हालांकि कहा ये भी जा रहा है कि किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले विमान की तकनीकी जांच, फ्लाइट डेटा और पायलट रिपोर्ट का एनालिसिस जरूरी होता है.
क्या Learjet 45 जैसे विमान सुरक्षित माने जाते हैं?
Learjet 45 को सामान्य तौर पर एक भरोसेमंद विमान माना जाता है और दुनिया भर में ये लंबे समय से इस्तेमाल में बना रहा है. इसमें मॉडर्न नेविगेशन सिस्टम, ऑटोपायलट और जरूरी सेफ्टी फीचर्स मौजूद होते हैं, लेकिन विशेषज्ञ ये भी कहते हैं कि सुरक्षा सिर्फ विमान पर नहीं बल्कि उसके मेंटेनेंस और ऑपरेशन पर भी निर्भर करती है. नियमित मेंटेनेंस, सही प्रशिक्षण और मौसम से जुड़ी सावधानियां इस तरह के विमानों के लिए बेहद अहम मानी जाती हैं.
हादसे के बाद किन सवालों पर चर्चा तेज हुई?
इस घटना के बाद ये बहस फिर से तेज हो गई कि वीआईपी मूवमेंट में इस्तेमाल होने वाले विमानों की सुरक्षा जांच कितनी सख्त हो. ये भी सवाल उठा कि क्या सभी सरकारी और चार्टर विमानों पर एक जैसे सुरक्षा मानक लागू होते हैं या नहीं? और क्या छोटे एयरपोर्ट्स पर संचालन के दौरान अतिरिक्त सावधानी बरती जाती है?
सरकारी विमान नीति क्या कहती है?
भारत में वीआईपी और सरकारी यात्राओं के लिए विमानों के इस्तेमाल को लेकर एक तय नीति मौजूद है. इसके तहत मुख्यमंत्री, उपमुख्यमंत्री और अन्य वरिष्ठ संवैधानिक पदों पर बैठे लोगों के लिए चार्टर या सरकारी विमान उपलब्ध कराए जा सकते हैं. इन विमानों के संचालन के लिए DGCA के नियम लागू होते हैं जिनमें पायलट की योग्यता, विमान का मेंटेनेंस और फ्लाइट से पहले की सुरक्षा जांच शामिल होती है.
क्या चार्टर विमानों पर नियम अलग होते हैं?
एविएशन नियमों के जानकारों के मुताबिक चार्टर और प्राइवेट जेट्स पर भी DGCA के वही बुनियादी सुरक्षा मानक लागू होते हैं जो अन्य विमानों पर होते हैं. हालांकि संचालन का तरीका अलग हो सकता है क्योंकि ये विमान कमर्शियल शेड्यूल से बंधे नहीं होते और अक्सर कम भीड़ वाले एयरपोर्ट्स से उड़ान भरते हैं.
वीआईपी मूवमेंट में जोखिम क्यों बढ़ जाता है?
विशेषज्ञों का कहना है कि वीआईपी यात्राओं में समय का दबाव अक्सर ज्यादा होता है. कई बार मौसम या अन्य परिस्थितियों के बावजूद यात्रा पूरी करने का दबाव बनता है. ऐसे हालात में निर्णय लेने की प्रक्रिया बेहद अहम हो जाती है और यही वजह है कि एविएशन से जुड़े नियम समय पर उड़ान रद्द करने या बदलने की भी अनुमति देते हैं.
इस हादसे से क्या सबक लिए जाने चाहिए?
इस तरह की घटनाएं याद दिलाती हैं कि चाहे विमान छोटा हो या बड़ा, सुरक्षा मानकों से कोई समझौता नहीं किया जा सकता. हादसे की जांच से ही ये स्पष्ट होगा कि ये कोई तकनीकी चूक थी, मानवीय गलती या परिस्थितियों का असर. लेकिन साथ ही ये दुर्घटना सरकारी और वीआईपी विमान नीति की समीक्षा की जरूरत को भी अंडरलाइन करती है.

