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चुनाव 2012: इंटरनेट पर पार्टियों का चुनावी जंग

फेसबुक, ट्विटर जैसी सोशल नेटवर्किंग साइट और इंटरनेट सियासी पार्टियों के नए चुनावी हथियार. नौजवान बड़ी तादाद में सोशल मीडिया से जुड़े हैं. उत्तर प्रदेश चुनाव में चार करोड़ से ज्यादा युवा वोटर चुनाव में फैसला करेंगे.

अखिलेश यादव
अखिलेश यादव
अपडेटेड 30 जनवरी , 2012

अमेरिका में राष्ट्रपति चुनाव में फेसबुक और ट्विटर जैसी इंटरनेट साइट खासा असर दिखाती हैं. यहां तक कहा गया कि ओबामा ने अपना चुनाव इंटरनेट पर जीता. उत्तर प्रदेश अमेरिका तो नहीं है, लेकिन इस मामले में अमेरिका से बहुत पीछे भी नहीं है. 2012 के विधानसभा चुनाव में सियासी पार्टियां जिस तरह इंटरनेट की ताकत का इस्तेमाल कर रही हैं, उससे तो कम से कम यही लगता है.


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प्रदेश के युवाओं और पढ़े-लिखे मतदाताओं पर सबकी नजर है. यह वही वोटर है, जो इंटरनेट से जुड़ा है. वर्चुअल दुनिया में हमेशा अव्वल रहने वाली भारतीय जनता पार्टी की प्रदेश शाखा ने फेसबुक पर अपने कई पेज बना रखे हैं. 'बीजेपी एज 2012, इलेक्शन इन यूपी' में 1,000 से ज्यादा लोग जुड़े हैं. इस पेज पर ज्‍यादातर टिप्पणियां कांग्रेस विरोधी हैं.

एक जगह कांग्रेस को 'इंडियन नेशनल कम्युनल पार्टी' कहा गया है और भाजपा को वोट देने की अपील की गई है. प्रदेश भाजपा अध्यक्ष सूर्यप्रताप शाही और चुनाव अभियान समिति के अध्यक्ष कलराज मिश्र समेत प्रदेश के कई नेता फेसबुक पर अपने एकाउंट खोल चुके हैं. प्रचार के साथ ही भड़ास निकालने में भी फेसबुक लोगों को खूब रास आ रहा है.

बाबूसिंह कुशवाहा प्रकरण की आलोचना करने पर भाजपा से निकाले गए पार्टी के पूर्व प्रदेश महामंत्री आइ.पी. सिंह वर्चुअल दुनिया में प्रदेश अध्यक्ष शाही पर गोलीबारी कर रहे हैं. सिंह की टिप्पणी है, ''कुशवाहा को भाजपा में शामिल करने के मुद्दे पर शाही ने पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष को भ्रमित किया है.'' इंडिया शाइनिंग के जमाने से वर्चुअल दुनिया में सक्रिय भाजपा 24 घंटे संपर्क में रहने के लिए सभी उम्मीदवारों को इंटरनेट डाटा कार्ड के साथ लैपटॉप देने का फैसला कर चुकी है.

उधर, लैपटॉप और आइपैड बांटने वाले घोषणापत्र के जरिए साइबर दुनिया में पहली बार कदम रखने वाली समाजवादी पार्टी (सपा) भी साइबर जाल फेंक रही है. आइपैड लेकर फोटो खिंचाते पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष अखिलेश यादव इस मोर्चे के कमांडर हैं.  अखिलेश अपने ब्लैकबेरी फोन के जरिए नेताओं और कार्यकर्ताओं से सीधे जुड़े हैं और अपने फेसबुक खाते को अपडेट रखना नहीं भूलते.

पार्टी का पूरा प्रचार अभियान बसपा सरकार के कथित भ्रष्टाचार और डॉक्युमेंटरी उम्मीद की साइकिल पर चल रहा है. इसके अलावा पार्टी के दो और पेज भी फेसबुक पर हैं. सपा के फेसबुक पेज पर दरश यादव लिखते हैं, ''मैंने एक सभा में मुलायम सिंह यादव को यह घोषणा करते हुए सुना था कि सपा की सरकार आने पर बिजली मुफ्त में मुहैया होगी. जब कंपनियां ही बिजली मुफ्त देने को राजी नहीं हैं, तो आप कैसे दे सकते हैं. इससे राज्य का खजाना खाली होगा, जो किसी के हित में नहीं.''

फेसबुक पर प्रदेश कांग्रेस के भी तीन पेज हैं. कांग्रेस के पेज पर विपक्षी दलों की लानत-मलामत की बजाए राहुल-गान चल रहा है. उत्तर प्रदेश यूथ कांग्रेस के पेज पर राहुल गांधी के कार्यक्रमों, भाषणों और दौरों की जानकारी है. हालांकि टिकट बंटवारे से असंतुष्ट लोगों ने फेसबुक को भी माध्यम बनाकर हाइकमान तक अपनी बात पहुंचाने की कोशिश की है.

उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी के पेज पर विजय द्विवेदी लिखते हैं, ''कांग्रेस चकिया ही नहीं, पूरे प्रदेश में हार रही है. चकिया में कांग्रेस ने एक जीते हुए प्रत्याशी को टिकट न देकर अपनी जीती हुई सीट गवां दी है.'' कांग्रेस की प्रदेश अध्यक्ष रीता बहुगुणा-जोशी और विधानमंडल दल के नेता प्रमोद तिवारी के एकाउंट भी फेसबुक पर हैं. लखनऊ उत्तरी विधानसभा क्षेत्र से कांग्रेस प्रत्याशी नीरज बोरा अपना फेसबुक और ट्विटर एकाउंट अपडेट रखते हैं.

दिलचस्प बात यह है कि सत्ताधारी दल बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के समर्थन में फेसबुक पर दो पेज ऐसे हैं, जो मायावती को देश का प्रधानमंत्री बनाने का अभियान चला रहे हैं. 'सुश्री कुमारी मायावती' के नाम से एक फेसबुक एकाउंट भी है, लेकिन इसे अपडेट नहीं किया गया है.

छोटे दल भी पीछे नहीं. फेसबुक पर इंडियन जस्टिस पार्टी के पेज को पसंद करने वालों की संख्या 3,500 पार कर चुकी है. इसके अध्यक्ष उदित राज पार्टी के पेज पर लिखते हैं, ''उत्तर प्रदेश में मतदाताओं की संख्या तकरीबन 12.58 करोड़ है और इनमें इंटरनेट इस्तेमाल करने वालों की संख्या दस लाख से ऊपर है.''

इंटरनेट की सियासी उपयोगिता के सवाल पर राजनैतिक विश्लेषक अभय कुमार कहते हैं, ''सोशल नेटवर्किंग साइट का उपयोग करने से प्रत्याशियों को दो फायदे हैं. प्रचार चुनाव आयोग की निगरानी के दायरे में नहीं आता और युवा वोटर बड़ी तादाद में सोशल मीडिया से जुड़े हैं.'' प्रदेश में चार करोड़ से ज्यादा युवा वोटर मौजूद हैं. प्रदेश के निर्वाचन कार्यालय के विशेष कार्याधिकारी सी.एम. मिश्र की मानें तो सोशल मीडिया पर प्रचार पर रोक नहीं है.

इंटरनेट पर वर्चुअल चुनाव प्रचार की यह तेजी बता रही है कि आने वाले दिनों में इंटरनेट से वोट डालने की मांग फिर जोर पकड़ेगी. लेकिन फिलहाल तो नेट से वक्त निकालकर पोलिंग बूथ तक जाना ही होगा.

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