भले ही सुनने में यह आश्चर्यजनक लगे कि 12 वर्ष 10 माह की कम उम्र में ही कोई बच्चा आइआइटी-जेईई जैसी कठिन परीक्षा पास कर ले. लेकिन यह सच है. इसे बिहार में भोजपुर जिले के एक छोटे-से गांव बखोरापुर के रहने वाले सत्यम ने सच कर दिखाया है. उसने कोटा में रहकर एक कोचिंग संस्थान से आइआइटी की कोचिंग ली थी. सत्यम ने देशभर में 8,137वां रैंक हासिल किया है. सत्यम कोटा में अपने चाचा रामकुमार सिंह के साथ 2007 से रह रहा है.
सत्यम जब आठवीं की परीक्षा बिहार बोर्ड से देना चाहता था तो कम उम्र होने के कारण बोर्ड ने इनकार कर दिया. इस पर उसके चाचा उसे अपने साथ कोटा ले आए. यहां 'डाइट' की विशेष अनुमति पर सत्यम ने 8 वर्ष की उम्र में आठवीं की परीक्षा दी थी. उसने जब 10 वर्ष की उम्र में 10वीं की परीक्षा देनी चाही तो फिर यही समस्या सामने आ गई. सीबीएसई की एक टीम ने यहां आकर उसका टेस्ट लिया जिसमें पास होने के बाद उसे परीक्षा में शामिल होने की इजाजत दी गई.
सत्यम ने इस साल कोटा के एक प्राइवेट स्कूल से 12वीं की परीक्षा दी है. आइआइटी में मौजूदा रैंक से वह खुश नहीं है. उसका कहना है, 'रैंक सुधारने के लिए दोबारा से तैयारी करूंगा.' सत्यम को इस मुकाम तक ले जाने में कोटा के एक कोचिंग संस्थान के संचालक की अहम भूमिका रही जिन्होंने कोटा आने के बाद सत्यम की विलक्षण प्रतिभा को पहचानते हुए उसे अपने संस्थान में निशुल्क कोचिंग दिलवाई और सारा खर्च भी खुद ही उठाया.
कोटा में सत्यम के साथ दादी, बुआ और चाचा रहते हैं. उसके पिता सिद्धनाथ सिंह और माता प्रमिला देवी खेती करते हैं. बाढ़ प्रभावित क्षेत्र होने के कारण उनकी आर्थिक हालत भी कुछ खास अच्छी नहीं हैं. उसके पिता अपने समय में तीन बार 10वीं की परीक्षा देने के बाद भी पास नहीं हो सके जबकि मां प्रमिला देवी दसवीं पास हैं.
सत्यम ने आइआइटी के साथ इंडियन स्पेस साइंस ऐंड रिसर्च सेंटर की प्रवेश परीक्षा आइसेट की भी परीक्षा दी है. जिसका नतीजा जल्द ही आने वाला है. आइआइटी-जेईई के बारे में सत्यम बताता है, 'पहला पेपर तो आसान रहा था लेकिन दूसरा मुश्किल आया था.' उसकी चाहत आइआइटी-कानपुर से कंप्यूटर साइंस कोर्स करने की है. लेकिन इस बार रैंक अच्छा नहीं होने के कारण पसंद की ब्रांच नहीं मिलेगी.
सत्यम को आइएएस बनना है लेकिन यहां भी उम्र बाधक बन सकती है क्योंकि 21 वर्ष की उम्र से पहले वह परीक्षा नहीं दे सकता. पांच वर्ष की उम्र में सत्यम को रामायण और गीता जैसे महाकाव्य कंठस्थ हो गए थे और छुटपन से ही साइंस की किताबें पढ़ने का शौक है. स्कूल जाने से पहले ही वह जटिल गणना कर देता था. सत्यम को बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने दिसंबर, 2006 में 'बिहारी हो तो ऐसा' अवार्ड से नवाजा था.

