राजनीति के टॉप 10 | ऊंचे और असरदार लोग

यूपीए अध्यक्ष और कांग्रेस अध्यक्ष (1)
रानी मां
क्योंकि वक्त चाहे अच्छा हो या बुरा, कांग्रेस का सोनिया गांधी के बगैर गुजारा नहीं चल सकता. क्योंकि सहयोगी दलों के साथ उनकी सबसे ज्यादा निभती है, जिनके समर्थन के बिना यूपीए सिर्फ एक ख्याली पुलाव होगा.
क्योंकि जब वे ऐसा खाद्य सुरक्षा विधेयक लाने को कहती है, जिससे सब्सिडी का बिल 1 लाख करोड़ रु. बढ़ जाएगा, तो रबड़ स्टांप से लैस होकर मनमोहन सिंह कैबिनेट की विशेष बैठक बुला लेते हैं.

वित्त मंत्री (3)
हर मर्ज की दवा
क्योंकि संकट चाहे जो भी हो, मुख्य संकटमोचक वही होते हैं. तेलंगाना से लेकर एनसीटीसी पर आम सहमति तक, अंधाधुंध संकटों के इस दौर में उनके बिना सरकार का गुजारा नहीं.
क्योंकि वही एक ऐसे राजनेता हैं, जो सोनिया गांधी को चिंता में डाल देते हैं. यही वजह है कि उन्हें मनमोहन सिंह को प्रधानमंत्री और प्रतिभा पाटिल जैसी 'जी हुजूर' को राष्ट्रपति बनाना पड़ता है.
कमाल का कद: पांच फुट तीन इंच के प्रणब की हैसियत कैबिनेट में सबसे ऊंची है.

प्रधानमंत्री (2)
टिकने का करिश्मा
क्योंकि उनके घोषित उत्तराधिकारी राहुल गांधी के उत्तर प्रदेश में पटखनी खाने के बाद उनकी हैसियत बढ़ गई.
क्योंकि 2जी और कॉमनवेल्थ घोटालों, सेना प्रमुख जनरल वी.के. सिंह के हमलावर तेवरों, अण्णा हजारे की साल भर चली घेराबंदी और ममता बनर्जी जैसे हमेशा कुछ-न-कुछ वसूलने वाले गठबंधन साझीदारों के बावजूद उनकी सरकार चलती रही.
क्योंकि दुनिया में उनका कद अधिकांश विश्व नेताओं से कहीं ऊंचा है, देश में उनकी प्रतिष्ठा से भी कहीं ज्यादा.

मुख्यमंत्री, पश्चिम बंगाल (नई)
तूफान एक्सप्रेस
क्योंकि पश्चिम बंगाल में 34 साल तक लगातार बेरोकटोक राज कर चुके वाम मोर्चे को उन्होंने अकेले दम हरा दिया.
क्योंकि वे यूपीए 2 सरकार की सबसे अविश्वसनीय सहयोगी हैं, और इसी वजह से सबसे ज्यादा शक्तिशाली भी हैं.
क्योंकि उन्होंने सत्ता को यह मंजूरी नहीं दी है कि वह उन्हें पैसों के लिहाज से भ्रष्ट कर सके.

सांसद और समाजवादी पार्टी के प्रमुख (नए)
किंगमेकर
क्योंकि उत्तर प्रदेश में एकतरफा जीत ने उन्हें दिल्ली में सबसे शक्तिशाली लोगों में से एक बना दिया है.
क्योंकि जब वे उत्तर प्रदेश में पार्टी कार्यकर्ताओं से आम चुनावों के लिए तैयार रहने को कहते हैं, तो बाकी सभी पार्टियां उम्मीदवार तलाशना शुरू कर देती हैं.

विपक्ष के नेता, राज्यसभा (9)
संवाद में महारत
क्योंकि उन्होंने भ्रष्टाचार, महंगाई, एनसीटीसी और लोकपाल विधेयक पर परेशानी में डालने वाले सवाल उठाकर संसद में यूपीए-2 को लगातार दबाव में बनाए रखा है.
क्योंकि वे भाजपा के उदार चेहरे के प्रतिनिधि हैं.
क्योंकि अच्छी तरह तैयारी करके, तथ्यों और आंकड़ों से लैस होकर जब वे बोलने के लिए खड़े होते हैं, तो संसद सुनती है.

मुख्यमंत्री, बिहार (6)
विकास पुरुष
क्योंकि वे संभावित प्रधानमंत्रियों की सूची में हैं.
क्योंकि अटलबिहारी वाजपेयी की तरह उन्हें भी हर हलके में स्वीकार किया जाता है. वे दक्षिणपंथियों, वामपंथियों और संघवाद समर्थकों के नए उभरते कुनबे के पसंदीदा हैं.
क्योंकि बिहार में उन्होंने सफलता की कहानी लिखी है और उसे देश के सबसे तेजी से विकास कर रहे राज्यों में बदल डाला है.

तमिलनाडु की मुख्यमंत्री (नई)
दक्षिण की ताकत
क्योंकि वे जब चाहें, राष्ट्रीय नीति को प्रभावित कर सकती हैं, जैसा कि संयुक्त राष्ट्र में श्रीलंका के खिलाफ भारत के मतदान के मामले में हुआ.
क्योंकि अगले चुनाव में यूपीए को हराने की इच्छा रखने वाले उभरते हुए विपक्षी मोर्चे की धुरी वे हैं.
क्योंकि 2011 में हुए विधानसभा चुनाव में शानदार जीत के बाद उनकी लोकप्रियता और बढ़ी है.

महासचिव, कांग्रेस (4)
पराजित राजकुमार
क्योंकि जब वे कोई गड़बड़ी कर बैठते हैं, तो उनके समर्थक सारा दोष अपने ऊपर लेने के लिए दौड़ पड़ते हैं.
क्योंकि कांग्रेस पार्टी को अब भी लगता है कि वे जब चाहें आधी रात को भी प्रधानमंत्री बन सकते हैं.
क्योंकि जब सोनिया गांधी जान-बूझकर कदम पीछे खींच रही हैं, तो उनका कांग्रेस की बागडोर संभालना तय है. उत्तर प्रदेश में चुनाव के बाद ऐसा होना सिर्फ टला है.

गृह मंत्री (5)
श्रीमान सर्वव्यापी
क्योंकि जब प्रधानमंत्री कार्यालय ने वित्त मंत्रालय का वह नोट लीक कर दिया, जिसमें 2जी स्पेक्ट्रम के आवंटन में उनकी भूमिका पर संदेह किया गया था, तो उन्हें 10 जनपथ का पूरा समर्थन प्राप्त था और सोनिया गांधी ने यह पक्का किया था कि पार्टी गृह मंत्री का समर्थन करे.
