सबके अपने-अपने राम

लीला से ठीक पहले राम रसोई में भोजन करते स्वरुप. अपने पुरातन रीति-रिवाजों की वजह से वाराणसी के रामनगर की यह रामलीला देश भर की रामलीलाओं में अनोखी मानी जाती है.

रामनगर रामलीला में जितनी भागीदारी आम नागरिकों की होती है उतनी ही संत समाज की भी होती है. शायद इसीलिए रामनगर की रामलीला को भारत की अन्य रामलीलाओं में बहुत ऊंचा दर्जा हासिल है.

रामनगर की रामलीला में स्वरुप तैयार करते कलाकार. वाराणसी के रामनगर की रामलीला समूचे भारत में सबसे विहंगम रामलीला मानी जाती है.

राम से मिलने जाते हुए भरत और शत्रुघ्न. रामनगर की रामलीला कई दशकों से चली आ रही है. स्थानीय लोग हर बार इस रामलीला में पूरे उत्साह से हिस्सा लेते हैं.

इस रामलीला में बाल स्वरुप को कंधे पर बैठाकर मंच पर ले जाया जाता है.

‘काशी नरेश’ अनंत नारायण सिंह का रामलीला में होना अनिवार्य परंपरा मानी जाती है.
