पावर लिस्ट 2014: छत्तीसगढ़ के रसूखदार
अपडेटेड 18 नवंबर , 2014

1/10
सौदान सिंह, 53 वर्ष, बीजेपी के राष्ट्रीय सह संगठन मंत्री.
सत्ता विरोधी फैक्टर के बावजूद उन्हें राज्य में लगातार तीसरी बार रमन सिंह की सरकार बनाने का श्रेय जाता है. बूथ प्रबंधन उनकी रणनीति का खास हिस्सा है और वे खुद मंडल स्तर तक संपर्क करते हैं. वे हर बार जीती हुई 20-25 सीटों को अगले चुनाव में दोबारा जीतने की संभावना में छोड़ देते हैं और उतनी ही नई सीटों पर फोकस करते हैं. राजस्थान में भारी बहुमत की सरकार बनवाने में भी उनकी भूमिका रही.
सत्ता विरोधी फैक्टर के बावजूद उन्हें राज्य में लगातार तीसरी बार रमन सिंह की सरकार बनाने का श्रेय जाता है. बूथ प्रबंधन उनकी रणनीति का खास हिस्सा है और वे खुद मंडल स्तर तक संपर्क करते हैं. वे हर बार जीती हुई 20-25 सीटों को अगले चुनाव में दोबारा जीतने की संभावना में छोड़ देते हैं और उतनी ही नई सीटों पर फोकस करते हैं. राजस्थान में भारी बहुमत की सरकार बनवाने में भी उनकी भूमिका रही.

2/10
अमन कुमार सिंह, 45 वर्ष, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव.
रमन सरकार की हैट्रिक के पीछे उन्हीं का प्रशासनिक प्रबंधन माना जाता है. वे देश के सबसे युवा प्रमुख सचिव हैं और सीएम के साथ लगातार 11 साल से जुड़े रहने वाले एकमात्र अधिकारी हैं. सरकार की साख पर जब भी कोई संकट आता है, सीएम उनकी त्वरित कला पर भरोसा करते हैं. क्रिकेट प्रशासन को क्या सिखा सकता है, इस विषय पर आइआइएम में उनका लेक्चर बेहद चाव से सुना जाता है.
रमन सरकार की हैट्रिक के पीछे उन्हीं का प्रशासनिक प्रबंधन माना जाता है. वे देश के सबसे युवा प्रमुख सचिव हैं और सीएम के साथ लगातार 11 साल से जुड़े रहने वाले एकमात्र अधिकारी हैं. सरकार की साख पर जब भी कोई संकट आता है, सीएम उनकी त्वरित कला पर भरोसा करते हैं. क्रिकेट प्रशासन को क्या सिखा सकता है, इस विषय पर आइआइएम में उनका लेक्चर बेहद चाव से सुना जाता है.

3/10
रजत कुमार, 33 वर्ष, अधिकारी
उन्हें पांच माह पहले ही जिले से राजधानी रायपुर लाया गया और मुख्यमंत्री के मातहत आने वाले जनसंपर्क विभाग का निदेशक बनाया गया और फिर दो महीने बाद ही मुख्यमंत्री का संयुक्त सचिव बना दिया गया. वे मुख्यमंत्री के पास आने वाली शिकायतों पर जिलावार निगरानी रखते हैं. हर दिन सुबह डीएम को घटनास्थलों पर भेजकर 6-8 घंटे में व्हाट्स के माध्यम से ऐक्शन टेकन रिपोर्ट मंगवाते हैं.
उन्हें पांच माह पहले ही जिले से राजधानी रायपुर लाया गया और मुख्यमंत्री के मातहत आने वाले जनसंपर्क विभाग का निदेशक बनाया गया और फिर दो महीने बाद ही मुख्यमंत्री का संयुक्त सचिव बना दिया गया. वे मुख्यमंत्री के पास आने वाली शिकायतों पर जिलावार निगरानी रखते हैं. हर दिन सुबह डीएम को घटनास्थलों पर भेजकर 6-8 घंटे में व्हाट्स के माध्यम से ऐक्शन टेकन रिपोर्ट मंगवाते हैं.

4/10
सुबोध कुमार सिंह, 41 वर्ष, अधिकारी.
मुख्यमंत्री रमन सिंह के ग्राम सुराज अभियान से लेकर सीधे जनता से जुड़े हर काम का जिम्मा संभालते हैं. चुनाव से पहले सीएम की विकास यात्रा के प्रशासनिक समन्वयक थे. चुनाव बाद सीएम के विशेष सचिव से सचिव बनाकर पदोन्नति दी गई. मुख्यमंत्री के जनदर्शन कार्यक्रम में आने वाले हर आवेदन को देखते हैं. वे बिजली विभाग में आपूर्ति का जिम्मा भी संभालते हैं.
मुख्यमंत्री रमन सिंह के ग्राम सुराज अभियान से लेकर सीधे जनता से जुड़े हर काम का जिम्मा संभालते हैं. चुनाव से पहले सीएम की विकास यात्रा के प्रशासनिक समन्वयक थे. चुनाव बाद सीएम के विशेष सचिव से सचिव बनाकर पदोन्नति दी गई. मुख्यमंत्री के जनदर्शन कार्यक्रम में आने वाले हर आवेदन को देखते हैं. वे बिजली विभाग में आपूर्ति का जिम्मा भी संभालते हैं.

5/10
विवेक कुमार ढांड, 56 वर्ष, मुख्य सचिव.
उन्हें किसी भी योजना के क्रियान्वयन का महारथी नौकरशाह माना जाता है. वे छत्तीसगढ़ के पहले ऐसे मुख्य सचिव हैं जो स्थानीय हैं और 1981 बैच के आईएएस अधिकारी होने के नाते राज्य के 70 फीसदी क्षेत्रों में सीधे अपनी सेवा दे चुके हैं. उन्होंने मुख्य सचिव बनने के बाद महज आठ माह में राजा टोडरमल के जमाने से चली आ रही पटवारी की बस्ते वाली व्यवस्था को खत्म कराने की मुहिम चलाई और नक्शा, खसरा, बी-1 को डिजिटाइज करने में सफलता हासिल की.
उन्हें किसी भी योजना के क्रियान्वयन का महारथी नौकरशाह माना जाता है. वे छत्तीसगढ़ के पहले ऐसे मुख्य सचिव हैं जो स्थानीय हैं और 1981 बैच के आईएएस अधिकारी होने के नाते राज्य के 70 फीसदी क्षेत्रों में सीधे अपनी सेवा दे चुके हैं. उन्होंने मुख्य सचिव बनने के बाद महज आठ माह में राजा टोडरमल के जमाने से चली आ रही पटवारी की बस्ते वाली व्यवस्था को खत्म कराने की मुहिम चलाई और नक्शा, खसरा, बी-1 को डिजिटाइज करने में सफलता हासिल की.

6/10
अजीत जोगी, 68 वर्ष, पूर्व मुख्यमंत्री
वे छत्तीसगढ़ के प्रथम मुख्यमंत्री हैं और कांग्रेस में बड़े गुट के विरोध के बावजूद पार्टी के लिए जाना-पहचाना चेहरा बने हुए हैं. उनके पास निजी समर्थकों की बड़ी जमात है. दिल्ली दरबार में जोगी के खिलाफ अभियान आए दिन तेज होता है, फिर भी न तो उनका कद घटता है, न प्रभाव. वे किसी पद पर हों या न हों, चुनाव के समय पार्टी कार्यालय से ज्यादा टिकटार्थियों की भीड़ उनके घर पर ही दिखती है.
वे छत्तीसगढ़ के प्रथम मुख्यमंत्री हैं और कांग्रेस में बड़े गुट के विरोध के बावजूद पार्टी के लिए जाना-पहचाना चेहरा बने हुए हैं. उनके पास निजी समर्थकों की बड़ी जमात है. दिल्ली दरबार में जोगी के खिलाफ अभियान आए दिन तेज होता है, फिर भी न तो उनका कद घटता है, न प्रभाव. वे किसी पद पर हों या न हों, चुनाव के समय पार्टी कार्यालय से ज्यादा टिकटार्थियों की भीड़ उनके घर पर ही दिखती है.

7/10
एस.आर.पी. कल्लूरी, 43 वर्ष, आइजी, बस्तर.
उन्हें राज्य में नक्सलियों का नेटवर्क तोड़कर अपना नेटवर्क बनाने वाला अधिकारी माना जाता है. सर्वाधिक नक्सल प्रभावित बस्तर में आइजी बनने के बाद पिछले पांच माह में उन्होंने रिकॉर्ड 280 सरेंडर करवाए. जबकि 2012 में 13 और 2013 में सिर्फ 6 सरेंडर हुए थे. उनकी वजह से नक्सली हमले में पुलिस जवानों के हताहत होने और हथियार लूटने की घटनाओं में कमी आई है.
उन्हें राज्य में नक्सलियों का नेटवर्क तोड़कर अपना नेटवर्क बनाने वाला अधिकारी माना जाता है. सर्वाधिक नक्सल प्रभावित बस्तर में आइजी बनने के बाद पिछले पांच माह में उन्होंने रिकॉर्ड 280 सरेंडर करवाए. जबकि 2012 में 13 और 2013 में सिर्फ 6 सरेंडर हुए थे. उनकी वजह से नक्सली हमले में पुलिस जवानों के हताहत होने और हथियार लूटने की घटनाओं में कमी आई है.

8/10
रमेश अग्रवाल. 60 वर्ष, सामाजिक कार्यकर्ता
छत्तीसगढ़ में पिछले दो दशक से जल, जंगल, जमीन के लिए उद्योगपतियों और प्रशासन से लोहा लेने में उन्होंने अपनी जान की भी परवाह नहीं की. उन्हें हाल ही में अमेरिका के सैन फ्रांसिस्को में आयोजित समारोह में प्रतिष्ठित गोल्डमैन एनवायरनमेंटल पुरस्कार से नवाजा गया है.
छत्तीसगढ़ में पिछले दो दशक से जल, जंगल, जमीन के लिए उद्योगपतियों और प्रशासन से लोहा लेने में उन्होंने अपनी जान की भी परवाह नहीं की. उन्हें हाल ही में अमेरिका के सैन फ्रांसिस्को में आयोजित समारोह में प्रतिष्ठित गोल्डमैन एनवायरनमेंटल पुरस्कार से नवाजा गया है.

9/10
हिमांशु द्विवेदी, 41 वर्ष, प्रबंध संपादक, हरिभूमि
छत्तीसगढ़ में चाहे किसी भी पार्टी की सरकार हो, शासन पर उनकी खासी पकड़ रहती है. राज्य के नेता-नौकरशाह उन्हें एक सलाहकार के तौर पर देखते हैं. उन्हें हरिभूमि अखबार को राष्ट्रीय स्तर पर स्थापित करने में अहम किरदार के रूप में देखा जाता है. बाल ठाकरे ने कार्टूनिस्ट के तौर लाइफ टाइम अचीवमेंट अवार्ड किसी नेता के हाथ से लेने से इनकार कर दिया था, लेकिन उनके हाथों से ग्रहण किया था.
छत्तीसगढ़ में चाहे किसी भी पार्टी की सरकार हो, शासन पर उनकी खासी पकड़ रहती है. राज्य के नेता-नौकरशाह उन्हें एक सलाहकार के तौर पर देखते हैं. उन्हें हरिभूमि अखबार को राष्ट्रीय स्तर पर स्थापित करने में अहम किरदार के रूप में देखा जाता है. बाल ठाकरे ने कार्टूनिस्ट के तौर लाइफ टाइम अचीवमेंट अवार्ड किसी नेता के हाथ से लेने से इनकार कर दिया था, लेकिन उनके हाथों से ग्रहण किया था.

10/10
अभिषेक सिंह, 33 वर्ष, सांसद, राजनांदगांव
वे छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री रमन सिंह के बेटे हैं. 2014 में राजनांदगांव लोकसभा सीट से रिकॉर्ड वोटों से जीत दर्ज की. 2013 के विधानसभा चुनाव से पहले उन्होंने राज्य में कई सर्वेक्षण कराए और टिकट बंटवारे में पिता को सलाह दी. लोकसभा का टिकट हासिल करने के बाद उन्होंने एक महीने में 7, 000 किलोमीटर सड़क नापी और संसदीय क्षेत्र में हर दिन 25 से 30 सभाएं कीं.
वे छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री रमन सिंह के बेटे हैं. 2014 में राजनांदगांव लोकसभा सीट से रिकॉर्ड वोटों से जीत दर्ज की. 2013 के विधानसभा चुनाव से पहले उन्होंने राज्य में कई सर्वेक्षण कराए और टिकट बंटवारे में पिता को सलाह दी. लोकसभा का टिकट हासिल करने के बाद उन्होंने एक महीने में 7, 000 किलोमीटर सड़क नापी और संसदीय क्षेत्र में हर दिन 25 से 30 सभाएं कीं.
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