पावर लिस्ट 2014: झारखंड के रसूखदार
अपडेटेड 18 नवंबर , 2014

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सजल चक्रवर्ती: मुख्य सचिव, झारखंड
झारखंड सरकार को सजल चक्रवर्ती को मुख्य सचिव के पद से हटा देने के एक महीने के बाद ही दोबारा मुख्य सचिव बनाना पड़ा. वे कई महत्वपूर्ण पदों पर रह चुके हैं. आम लोगों से सीधा संपर्क रखने के कारण राज्य के अब तक के सबसे लोकप्रिय मुख्य सचिव. चक्रवर्ती की उम्र 58 साल है.
झारखंड सरकार को सजल चक्रवर्ती को मुख्य सचिव के पद से हटा देने के एक महीने के बाद ही दोबारा मुख्य सचिव बनाना पड़ा. वे कई महत्वपूर्ण पदों पर रह चुके हैं. आम लोगों से सीधा संपर्क रखने के कारण राज्य के अब तक के सबसे लोकप्रिय मुख्य सचिव. चक्रवर्ती की उम्र 58 साल है.

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फादर ई. अब्राहम: 64 वर्ष, डायरेक्टर, एक्सएलआरआइ.
अब्राहम देश से सबसे अच्छे बिजनेस स्कूलों में से एक एक्सएलआरआइ, जमशेदपुर के डायरेक्टर हैं. इसलिए झारखंड में सबसे सम्मानित एकेडमिक शख्सियत हैं. उनके नेतृत्व में एक्सएलआरआइ ने टॉप मैनजमेंट स्कूलों में अपना स्थान कायम रखा है. क्योंकि उनके संचालन में एक्सएलआरआइ विस्तार की प्रक्रिया में है.
अब्राहम देश से सबसे अच्छे बिजनेस स्कूलों में से एक एक्सएलआरआइ, जमशेदपुर के डायरेक्टर हैं. इसलिए झारखंड में सबसे सम्मानित एकेडमिक शख्सियत हैं. उनके नेतृत्व में एक्सएलआरआइ ने टॉप मैनजमेंट स्कूलों में अपना स्थान कायम रखा है. क्योंकि उनके संचालन में एक्सएलआरआइ विस्तार की प्रक्रिया में है.

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हरिवंश: 58 वर्ष, राज्यसभा सांसद
हरिवंश बिहार और झारखंड में सबसे अधिक सम्मानीय संपादकीय शख्सियत हैं. उन्होंने मीडिया इंडस्ट्री में भव्य प्रदर्शन करते हुए हिंदी समाचारपत्र प्रभात खबर को देश के सबसे तेजी से बढ़ते समाचार पत्र में तब्दील कर दिया. इस अखबार ने बिहार और झारखंड में खास पहचान बनाई. जेडी (यू) से राज्यसभा सांसद बनने के बावजूद बौद्धिक नेता और पूर्वाग्रह से रहित विचारक के तौर पर उनकी पहचान है.
हरिवंश बिहार और झारखंड में सबसे अधिक सम्मानीय संपादकीय शख्सियत हैं. उन्होंने मीडिया इंडस्ट्री में भव्य प्रदर्शन करते हुए हिंदी समाचारपत्र प्रभात खबर को देश के सबसे तेजी से बढ़ते समाचार पत्र में तब्दील कर दिया. इस अखबार ने बिहार और झारखंड में खास पहचान बनाई. जेडी (यू) से राज्यसभा सांसद बनने के बावजूद बौद्धिक नेता और पूर्वाग्रह से रहित विचारक के तौर पर उनकी पहचान है.

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अनुराग गुप्ता , 52 वर्ष, आइजी, प्रोविजन.
अनुराग मानव तस्करी के खिलाफ उनके अभियान ने राज्य की तस्वीर बदल कर रख दी. अपने कामों की वजह से आदिवासियों में गहरी पहचान है. अब तक मानव तस्करी में फंसी करीब 400 लड़कियों को दिल्ली से छुड़ा चुके हैं. उनकी सक्रियता की वजह से मानव तस्करों में डर पैदा हो गया है. दिल्ली में संचालित प्लेसमेंट एजेंसिया बंद होने लगीं. राजस्थान के मानव तस्करों पर भी कार्रवाई की.
अनुराग मानव तस्करी के खिलाफ उनके अभियान ने राज्य की तस्वीर बदल कर रख दी. अपने कामों की वजह से आदिवासियों में गहरी पहचान है. अब तक मानव तस्करी में फंसी करीब 400 लड़कियों को दिल्ली से छुड़ा चुके हैं. उनकी सक्रियता की वजह से मानव तस्करों में डर पैदा हो गया है. दिल्ली में संचालित प्लेसमेंट एजेंसिया बंद होने लगीं. राजस्थान के मानव तस्करों पर भी कार्रवाई की.

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राजीव कुमार, 51 वर्ष, एडवोकेट, झारखंड हाइकोर्ट.
राजीव जनहितयाचिका डालने के मामले में पूरे राज्य में उनकी पहचान बन चुकी है. मधु कोड़ा की संपत्ति मामले से लेकर विधानसभा नियुक्ति मामले तक, कई जरूरी मामलों में याचिकाएं डालीं. 2011 में बार काउंसिल ने एक आरोपी को गवाह बनाने के आरोप में उनका लाइसेंस रद्द कर दिया, जांच में बेदाग निकले और लाइसेंस बहाल. कई बार धमकियां मिलीं और स्पेशल ब्रांच की रिपोर्ट के बाद पुलिस ने सुरक्षा दी.
राजीव जनहितयाचिका डालने के मामले में पूरे राज्य में उनकी पहचान बन चुकी है. मधु कोड़ा की संपत्ति मामले से लेकर विधानसभा नियुक्ति मामले तक, कई जरूरी मामलों में याचिकाएं डालीं. 2011 में बार काउंसिल ने एक आरोपी को गवाह बनाने के आरोप में उनका लाइसेंस रद्द कर दिया, जांच में बेदाग निकले और लाइसेंस बहाल. कई बार धमकियां मिलीं और स्पेशल ब्रांच की रिपोर्ट के बाद पुलिस ने सुरक्षा दी.

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भारती कश्यप, 45 वर्ष, नेत्र विशेषज्ञ.
भारती कश्यप राज्य की सबसे मशहूर नेत्र विशेषज्ञ हैं. उनका आइ केयर हॉस्पिटल पूर्वी भारत के सबसे बड़े अस्पतालों में से एक है. लेकिन उससे ज्यादा वे अपनी कल्याणकारी योजनाओं के कारण जानी जाती हैं. सियासी हलकों में भी वे लोकप्रिय हैं. जयराम रमेश ने अपनी आंखें कश्यप हॉस्पिटल में दान देने का वादा किया है. लोकसभा चुनाव के दौरान मोदी के साथ चाय पे चर्चा में शामिल चुनिंदा लोगों में वे भी थीं.
भारती कश्यप राज्य की सबसे मशहूर नेत्र विशेषज्ञ हैं. उनका आइ केयर हॉस्पिटल पूर्वी भारत के सबसे बड़े अस्पतालों में से एक है. लेकिन उससे ज्यादा वे अपनी कल्याणकारी योजनाओं के कारण जानी जाती हैं. सियासी हलकों में भी वे लोकप्रिय हैं. जयराम रमेश ने अपनी आंखें कश्यप हॉस्पिटल में दान देने का वादा किया है. लोकसभा चुनाव के दौरान मोदी के साथ चाय पे चर्चा में शामिल चुनिंदा लोगों में वे भी थीं.

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सत्य नारायण प्रधान, 50 वर्ष, एडीजी, सीआइडी, झारखंड.
यह सत्य नारायण प्रकाश की कोशिशों का ही नतीजा है कि राज्य पुलिस का आइटी सेल देशभर में सशक्त माना जा रहा है. नक्सल मामलों के जानकार प्रधान को आइजी ऑपरेशन भी नियुक्त किया गया था. एक समय ऐसा आया कि पकड़े जाने के भय से नक्सलियों ने मोबाइल या संचार के अन्य साधनों का इस्तेमाल बंद कर दिया था. सराहनीय सेवा के लिए उन्हें 2006 और 2012 में राष्ट्रपति पुरस्कार मिला.
यह सत्य नारायण प्रकाश की कोशिशों का ही नतीजा है कि राज्य पुलिस का आइटी सेल देशभर में सशक्त माना जा रहा है. नक्सल मामलों के जानकार प्रधान को आइजी ऑपरेशन भी नियुक्त किया गया था. एक समय ऐसा आया कि पकड़े जाने के भय से नक्सलियों ने मोबाइल या संचार के अन्य साधनों का इस्तेमाल बंद कर दिया था. सराहनीय सेवा के लिए उन्हें 2006 और 2012 में राष्ट्रपति पुरस्कार मिला.

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राजीव कुमार, 55 वर्ष, पुलिस महानिदेशक
राजीव कुमार के पुलिस महानिदेशक बनते ही माओवादियों के पैर उखडऩे शुरू हो गए. 1981 बैच के इस आइपीएस अधिकारी ने कई बार नक्सली मुठभेड़ का नेतृत्व किया है. इससे जवानों का हौसला बढ़ा है. वे मुख्यालय में बैठ कर निर्देश देने की बजाए खुद जंगल जाने लगे. ऑनलाइन प्राथमिकी दर्ज करने की सुविधा उन्होंने ही शुरू करवाई.
राजीव कुमार के पुलिस महानिदेशक बनते ही माओवादियों के पैर उखडऩे शुरू हो गए. 1981 बैच के इस आइपीएस अधिकारी ने कई बार नक्सली मुठभेड़ का नेतृत्व किया है. इससे जवानों का हौसला बढ़ा है. वे मुख्यालय में बैठ कर निर्देश देने की बजाए खुद जंगल जाने लगे. ऑनलाइन प्राथमिकी दर्ज करने की सुविधा उन्होंने ही शुरू करवाई.

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के.के. सोन, 45 वर्ष, एडिशनल चीफ इलेक्टोरल अफसर.
के के सोन एडिशनल चीफ इलेक्टोरल अफसर के तौर पर माओवाद प्रभावित झारखंड में साफ-सुथरा विधानसभा चुनाव कराने की जिम्मेदारी उनकी है. उन्होंने प्रभावी कदम भी उठाए हैं, जैसे हर स्ट्रांग रूम में सीसीटीवी लगाने का काम. वे राज्य से सबसे अधिक कुशल आइएएस अफसर माने जाते हैं. प्रशासन और उसकी डिलिवरी को पारदर्शी बनाने के लिए वे लगातार कोशिश करते हैं.
के के सोन एडिशनल चीफ इलेक्टोरल अफसर के तौर पर माओवाद प्रभावित झारखंड में साफ-सुथरा विधानसभा चुनाव कराने की जिम्मेदारी उनकी है. उन्होंने प्रभावी कदम भी उठाए हैं, जैसे हर स्ट्रांग रूम में सीसीटीवी लगाने का काम. वे राज्य से सबसे अधिक कुशल आइएएस अफसर माने जाते हैं. प्रशासन और उसकी डिलिवरी को पारदर्शी बनाने के लिए वे लगातार कोशिश करते हैं.

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डी.के. तिवारी, 54 वर्ष, प्रिंसिपल रेजिडेंट कमिश्नर.
तिवारी को विधानसभा चुनाव के बाद नई सरकार में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दी जा सकती है. वे पहले भी मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव रह चुके हैं. काम के प्रति जुनूनी हैं. एचआरडी के प्रधान सचिव के तौर पर उन्हें रणनीतिक बदलाव लाने वाला माना जाता है. वे उन गिने-चुने अधिकारियों में से एक हैं, जो टेंडर निर्धारण से खुद को दूर रखते हैं. फील्ड अफसरों को छूट देते हैं और उनकी सख्त मॉनिटरिंग भी करते हैं.
तिवारी को विधानसभा चुनाव के बाद नई सरकार में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दी जा सकती है. वे पहले भी मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव रह चुके हैं. काम के प्रति जुनूनी हैं. एचआरडी के प्रधान सचिव के तौर पर उन्हें रणनीतिक बदलाव लाने वाला माना जाता है. वे उन गिने-चुने अधिकारियों में से एक हैं, जो टेंडर निर्धारण से खुद को दूर रखते हैं. फील्ड अफसरों को छूट देते हैं और उनकी सख्त मॉनिटरिंग भी करते हैं.
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