केंद्र में मंत्रियों पर छाया सुस्ती का साम्राज्य

शरद पवार, कृषि मंत्री
पुराना हाथ
वर्ष 2009 में पवार को फिर यूपीए1 वाला मंत्रालय मिल गया. लेकिन डीबी रियलिटी के विनोद गोयनका, जो 2जी मामले में आरोपी हैं, की वजह से पवार को शर्मिंदगी उठानी पड़ी.
राजनीति हावी
मंत्रालय ने साल भर तक किसानों को बिजली में सब्सिडी दिए जाने के मुद्दे पर कुछ भी बात करने से मना कर दिया. योजना आयोग इसे बंद करना चाहता है.
मंत्रालय ने यह नहीं बताया है कि पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों में उसकी हरित क्रांति तकनीकी क्यों असफल हो गई.
वरिष्ठ नौकरशाह बीज बिल, भूमि अधिग्रहण बिल और राष्ट्रीय बायोटेक्नोलॉजी नियमन प्राधिकरण बिल के विवादित मुद्दों पर बिल्कुल असहमत हैं.

अचानक उत्थान
उन्हें 2010 में मंत्रिमंडल के फेरबदल में कैबिनेट मंत्री बना दिया गया.
गहरा संकट
नौकरशाहों ने पर्यावरण मंत्रालय में अपने बराबर के अधिकारियों से कोयला खनन के लिए प्रतिबंधित
इलाकों के बारे में बातचीत नहीं की.
मंत्रालय ने सरकार को इस बात का कोई स्पष्टीकरण नहीं दिया है कि वह 55 करोड़ टन कोयले का लक्ष्य हासिल करने में क्यों नाकाम रहा.


सब की निगाहें थीं
इस साल जुलाई में, उन्होंने जयराम रमेश का स्थान लिया था जो गलत कारणों से सुर्खियों में थेः उन्होंने भारत की जलवायु को लेकर ''नरम'' छवि बनाने के लिए परियोजनाओं को रोके रखा.
मूक श्रोता
अपने अफसरशाहों के विरोध के चलते मंत्रालय खनन संबंधी उपयुक्त और अनुपयुक्त क्षेत्रों की पहचान की लड़ाई हार चुका है.
मंत्रालय ने अपने ही विशेषज्ञों के पैनल को वन्यजीव रिजर्वों के पास स्थित औद्योगिक परियोजनाओं की पहचान करने का समय नहीं दिया.
इसके साथ ही मंत्रालय केंद्र प्रायोजित तीन योजनाओं के विलय को लेकर योजना आयोग के प्रस्ताव पर खामोश हैः प्रोजेक्ट टाइगर, प्रोजेक्ट एलीफैंट और इंटेग्रेटेड डेवलपमेंट ऑफ वाइल्डलाइफ हैबीटाट्स.

कपिल सिब्बल, दूरसंचार और एचआरडी मंत्री
तुरंत बदलाव
नवंबर 2010 में, सिब्बल ने ए. राजा के स्थान पर दूरसंचार मंत्री का कार्यभार संभाला.
लंबित पड़े फैसले
दूरसंचार मंत्रालय ने 3जी स्पेक्ट्रम के लिए निविदा का काम मई 2010 में ही पूरा कर लिया था लेकिन इसे अभी यह स्पष्ट करना है कि सेवाएं शुरू न कर पाने की स्थिति में लाइसेंसधारी इसे किसी और को दे सकता है.
दूरसंचार कंपनियों के विलय और अधिग्रहण पर रुख अपनाना है.
भारतीय दूरसंचार सेवा को खत्म करने पर मंत्रालय ने कोई फैसला नहीं लिया है.
यूजीसी और एनसीईआरटी, एचआरडी मंत्रालय के दो अहम संस्थान, पिछले आठ माह से प्रमुखों के बिना चल रहे हैं.

ऊंची उम्मीदें
जब उन्होंने 2009 में कमल नाथ की जगह ली थी तो उनसे उम्मीद थी कि वे अनुभवहीन घरेलू उद्योग को ऊंचाइयों पर ले जाएंगे.
शुरू में ही नाकामी
घरेलू कंपनियों के जबरदस्त विरोध के चलते वे सिंगल और मल्टी ब्रांड रिटेल में एफडीआइ को आगे बढ़ाने में कामयाब नहीं हो सके.
दो साल की देरी के बाद मंत्रालय की निर्माण नीति की घोषणा अक्तूबर में की गई. इसमें भी कोई महत्वपूर्ण सुझव नहीं दिए गए हैं.

एस. जयपाल रेड्डी, पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री
साफ बात
उन्होंने जनवरी में मुरली देवड़ा का स्थान लिया था और उनसे हाइड्रोकार्बन क्षेत्र में निवेश बढ़ाने की खासी अपेक्षा थी.
चिकना घड़ा
मंत्रालय को अभी अगस्त 2010 में हुए केयर्न-वेदांत सौदे को मंजूरी देनी है.
60,000 करोड़ रु. के टर्नओवर वाली ओएनजीसी इस साल जनवरी से अक्तूबर तक प्रमुख के बिना रही, ऐसा इसलिए क्योंकि मंत्रालय में चयन को लेकर गहन मतभेद थे.
सरकारी अधिकार वाली तेल कंपनियों के प्रमुख छह माह तक मंत्री से बात करने को खारिज करते रहे. वे रेड्डी से पेट्रोल उत्पादों की कीमतें बढ़ाने के फैसले को खारिज किए जाने से नाराज थे.

युद्ध नहीं, शांति
एंटनी अक्तूबर 2006 से मंत्री हैं, कांग्रेस मंत्री के लिए बिना किसी बाधा के गुजारी गई सबसे लंबी अवधि.
जोखिम में सुरक्षा
सबसे चौकस मंत्रियों में से, प्रक्रिया से मामूली भटकाव वाले भी किसी सौदे को उन्होंने होने नहीं दिया जिसने अधिग्रहण में धीमी गति को हावी कर दिया.
उन्होंने 2007 में 1 अरब डॉलर वाली 197 सैन्य हेलिकॉप्टरों की खरीद को रद्द कर दिया. इस साल, कालीसूची वाले एक बोली लगाने वाले के चुनौती देने पर उन्होंने अल्ट्रा लाइट हॉवित्जर्स के 64.7 करोड़ डॉलर के टेंडर को ठंडे बस्ते में डाल दिया.
पिछले छह महीनों से 50,000 करोड़ रु. की लागत वाली छह पनडुब्बियों का सौदा अधर में लटका हुआ है. आखिरी बार पनडुब्बी 11 साल पहले खरीदी गई थी और 14 जहाजों का मौजूदा बेड़ा अपनी 30 साल की आयु पूरी करने के कगार पर है.

बागडोर संभाली
उन्हें जनवरी 2011 में भूतल परिवहन से शहरी विकास मंत्रालय में भेजा गया था और उम्मीद की जा रही था कि बुनियादी ढांचे में निवेश को आकर्षित कर सकेंगे.
देरी भरे कदम
मंत्री ने दिल्ली और उसके करीब पड़ने वाले शहरों मेरठ, अलवर और पानीपत के बीच तेज कनेक्टिविटी के लिए रिजनल रैपिड ट्रांजिट सिस्टम को सैद्धांतिक मंजूरी देने में ही एक साल का समय लगा दिया.
दो साल से ज्यादा समय से मंत्रालय विभिन्न शहरों में कॉलोनियों के नियमन से जुड़े फैसले को टालता आया है. सिर्फ दिल्ली में ही इस तरह की 1,600 कॉलोनियां हैं.

सदा-सर्वदा संकटमोचन
कांग्रेस के दिग्गज नेता ने यूपीए2 में अंबुमणि रामदास की जगह ली.
सुस्ती से काम
वे जापानी इन्सेफलाइटिस के प्रकोप पर तेजी से कदम उठाने में नाकाम रहे, यह उनके कार्यकाल की सबसे आपातकालीन बीमारी थी. वे प्रभावित इलाकों में तब पहुंचे, जब 400 लोग इस बीमारी से मारे जा चुके थे.
यह महामारी जब तांडव कर रही थी, तो स्वास्थ्य मंत्रालय में 1 सितंबर से 18 अक्तूबर तक करीब डेढ़ महीने कोई सचिव ही नहीं था.
