28 सितंबर 2011: देखें इंडिया टुडे का अंक | पढ़ें: इंडिया टुडे

धुन के पक्के 35 युवा जिन्होंने लीक तोड़कर बनाई अपनी नई पहचान.







एक किताब के कुछ अंशों को लेकर एक पूर्व राजघराने के विश्वेंद्र सिंह इस कदर अपने चाचा रघुराज सिंह पर गुत्थमगुत्था होंगे, किसी को अंदाजा भी न था.


आज की शासक की पुलिस को जनता की पुलिस में तब्दील करने के लिए कुछ फौरन कुछ कदम उठाने की जरूरत हैः उसे हर तरह के दबावों से मुक्त रखा जाए, अधिकारियों का कार्यकाल सुरक्षित किया जाए.

सब कुछ सामान्य ढंग से चलता है और अधिकारियों को मालूम होता है कि किससे उनका कॅरिअर आगे बढ़ सकता है. पुलिस की कार्यशैली में कुछ भी नया नहीं है.

पिछले 20 साल से बम विस्फोट हो रहे, लेकिन पुलिस बलों ने प्रशिक्षण पर निवेश नहीं किया

पुलिस-आबादी अनुपात को सुधारकर संयुक्त राष्ट्र की ओर से बताए गए जरूरी अनुपात के बराबर लाने की कोशिश की जाए, उसके कर्मचारियों की आवासीय सुविधा सुधारी जाए, और प्रशिक्षण का स्तर बढ़ाया जाए. पुलिस सुधार शासन सुधारने और कानून का शासन बनाए रखने के लिए है.





जनता से जुड़ने और अपनी राजनैतिक सार्थकता बनाए रखने के लिए लालू यादव. अब मुद्दों की तलाश में लालू फोर्बिसगंज फायरिंग के पीड़ित परिवारों से मिलने पहुंचे.



देवघर में एक हजार करोड़ रु. का जमीन घोटाला सामने आया. भू-माफिया ने कथित तौर पर प्रशासन की मिलीभगत से तकरीबन 771.59 एकड़ गैर बिक्री योग्य जमीन बेच डाली.





सर्वेक्षण: युवाओं का गुस्सा और उम्मीद
उनके सामने जब टीम अण्णा के जाने-माने सदस्यों और प्रमुख राजनीतिकों के बीच तीन परिकल्पित चुनावी मुकाबलों का विकल्प रखा गया तो जनादेश बिल्कुल साफ दिखा. अण्णा हजारे 76-24 के अंतर से राहुल गांधी को मात दे रहे हैं और किरण बेदी 84-16 के अंतर से (दिल्ली में यह अंतर बढ़कर 96-4 हो जाता है) कपिल सिब्बल को शिकस्त दे रही हैं.

सर्वेक्षण: युवाओं का गुस्सा और उम्मीद
उत्तर देने वालों में से 84 फीसदी युवाओं का मानना है कि वे शिक्षा, आजादी, आमदनी और जीवन शैली के मायनों में उससे बेहतर जिंदगी बसर करेंगे, जैसी उनके माता-पिता व्यतीत कर चुके हैं. 81 फीसदी का मानना है कि सरकार के बावजूद वे आज के मुकाबले भविष्य में ज्यादा सुखी होंगे.

सर्वेक्षण: युवाओं का गुस्सा और उम्मीद
महानगरों और बड़े शहरों में जिन युवाओं को सर्वेक्षण में शामिल किया गया, उनमें से ज्यादातर अब अपनी संपन्नता के लिए सरकार पर निर्भर नहीं हैं. इसके विपरीत, सरकार को तेजी से आ रही संपन्नता की उनकी राह में बाधा के रूप में देखा जा रहा है. युवा अधीर हैं. लेकिन वे राजनीति में कदम रखने से हिचकिचाते हैं. भारत में राजनीति के केंद्र दिल्ली को छोड़कर उत्तरदाताओं की खासी तादाद ने कहा कि उन्हें राजनीति में जाने की इच्छा नहीं है.


