26 दिसंबर 2012: तस्वीरों में इंडिया टुडे | पढ़ें इंडिया टुडे
अपडेटेड 20 जनवरी , 2013

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पता नहीं चलता कि कौन नायिका है और कौन खलनायिका
नवंबर की दोपहर है और समुद्र सूरज की गर्मी में नहा रहा है. इसके किनारे बने जुहू के एक होटल का आरामदेह सुइट सिने जगत की दो मशहूर तारिकाओं की गुफ्तगू शूट करने के लिए संवारा जा रहा है. वैसे तो बॉलीवुड में सितारे कई हैं, लेकिन टिकते कुछ ही हैं. यही वजह है कि तनुजा (69) और काजोल (38) की मां-बेटी की जोड़ी आज भी अपनी ओर खींचती है.
नवंबर की दोपहर है और समुद्र सूरज की गर्मी में नहा रहा है. इसके किनारे बने जुहू के एक होटल का आरामदेह सुइट सिने जगत की दो मशहूर तारिकाओं की गुफ्तगू शूट करने के लिए संवारा जा रहा है. वैसे तो बॉलीवुड में सितारे कई हैं, लेकिन टिकते कुछ ही हैं. यही वजह है कि तनुजा (69) और काजोल (38) की मां-बेटी की जोड़ी आज भी अपनी ओर खींचती है.

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सिनेमा में सेक्स: सरक गया पल्लू और नमकीन हुई जुबान
बीते ढाई दशक में बॉलीवुड का सुर-ताल पूरी तरह से बदल चुका है. हीरोइनों को गर्मागर्म सीन देने में झिझक नहीं, कहानियां बोल्ड हुईं और भाषा तीखी मिर्च.
बीते ढाई दशक में बॉलीवुड का सुर-ताल पूरी तरह से बदल चुका है. हीरोइनों को गर्मागर्म सीन देने में झिझक नहीं, कहानियां बोल्ड हुईं और भाषा तीखी मिर्च.

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जाना-पहचाना कातिल: मासूम चेहरे वाले कातिल का दौर
अपराधी अब घोड़े पर सवार होकर नहीं आते और न ही जातीय हिंसा वालेनरसंहार दिखाई देते हैं, अब तो अपने परिवार और जान-पहचान के लोग ही शातिर दिमाग से खौफनाक वारदात को अंजाम दे रहे हैं.
अपराधी अब घोड़े पर सवार होकर नहीं आते और न ही जातीय हिंसा वालेनरसंहार दिखाई देते हैं, अब तो अपने परिवार और जान-पहचान के लोग ही शातिर दिमाग से खौफनाक वारदात को अंजाम दे रहे हैं.

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शादी से लिव-इन तक: बदलते परिवारों का मुल्क
शादी का रिश्ता अब स्वर्ग में नहीं बनता और न ही परिवार फरिश्तों के यहां से उतरी कोई पवित्र चीज है. ये मुल्क के आधुनिक परिवार हैं, जहां सबकुछ शॉर्ट टर्म कॉन्ट्रैक्ट है. हिंदुस्तान बदल रहा है.
शादी का रिश्ता अब स्वर्ग में नहीं बनता और न ही परिवार फरिश्तों के यहां से उतरी कोई पवित्र चीज है. ये मुल्क के आधुनिक परिवार हैं, जहां सबकुछ शॉर्ट टर्म कॉन्ट्रैक्ट है. हिंदुस्तान बदल रहा है.

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शादी से लिव-इन तक: बदलते परिवारों का मुल्क
शादी का रिश्ता अब स्वर्ग में नहीं बनता और न ही परिवार फरिश्तों के यहां से उतरी कोई पवित्र चीज है. ये मुल्क के आधुनिक परिवार हैं, जहां सबकुछ शॉर्ट टर्म कॉन्ट्रैक्ट है. हिंदुस्तान बदल रहा है.
शादी का रिश्ता अब स्वर्ग में नहीं बनता और न ही परिवार फरिश्तों के यहां से उतरी कोई पवित्र चीज है. ये मुल्क के आधुनिक परिवार हैं, जहां सबकुछ शॉर्ट टर्म कॉन्ट्रैक्ट है. हिंदुस्तान बदल रहा है.

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राजनीति: धर्म की सियासत को पछाड़ता साड्डा हक
पिछले ढाई दशक के दौरान खासकर उत्तर के राज्यों में कांग्रेस का किला ढहने और विभिन्न वर्गों की महत्वाकांक्षाओं की पूर्ति करने वाली क्षेत्रीय पार्टियों के उभार की वजह से देश में लोकतंत्र की जड़ें मजबूत हुई हैं.
पिछले ढाई दशक के दौरान खासकर उत्तर के राज्यों में कांग्रेस का किला ढहने और विभिन्न वर्गों की महत्वाकांक्षाओं की पूर्ति करने वाली क्षेत्रीय पार्टियों के उभार की वजह से देश में लोकतंत्र की जड़ें मजबूत हुई हैं.

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राजनीति: धर्म की सियासत को पछाड़ता साड्डा हक
पिछले ढाई दशक के दौरान खासकर उत्तर के राज्यों में कांग्रेस का किला ढहने और विभिन्न वर्गों की महत्वाकांक्षाओं की पूर्ति करने वाली क्षेत्रीय पार्टियों के उभार की वजह से देश में लोकतंत्र की जड़ें मजबूत हुई हैं.
पिछले ढाई दशक के दौरान खासकर उत्तर के राज्यों में कांग्रेस का किला ढहने और विभिन्न वर्गों की महत्वाकांक्षाओं की पूर्ति करने वाली क्षेत्रीय पार्टियों के उभार की वजह से देश में लोकतंत्र की जड़ें मजबूत हुई हैं.

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धर्म: ताकि न हो श्रद्धा का श्राद्ध
बीते ढाई दशक में उदारीकरण की ग्लोबल आंधी ने धर्म और आस्था के तंबुओं को झकझोर दिया है. लेकिन धर्म और आधुनिकता में हर जगह टकराव नहीं है. कई बार दोनों की जुगलबंदी भी दिखती है. पीयूष बबेले और आशीष मिश्र धर्म के सामने मौजूद चुनौतियों का जायजा ले रहे हैं.
बीते ढाई दशक में उदारीकरण की ग्लोबल आंधी ने धर्म और आस्था के तंबुओं को झकझोर दिया है. लेकिन धर्म और आधुनिकता में हर जगह टकराव नहीं है. कई बार दोनों की जुगलबंदी भी दिखती है. पीयूष बबेले और आशीष मिश्र धर्म के सामने मौजूद चुनौतियों का जायजा ले रहे हैं.

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धर्म: ताकि न हो श्रद्धा का श्राद्ध
बीते ढाई दशक में उदारीकरण की ग्लोबल आंधी ने धर्म और आस्था के तंबुओं को झकझोर दिया है. लेकिन धर्म और आधुनिकता में हर जगह टकराव नहीं है. कई बार दोनों की जुगलबंदी भी दिखती है. पीयूष बबेले और आशीष मिश्र धर्म के सामने मौजूद चुनौतियों का जायजा ले रहे हैं.
बीते ढाई दशक में उदारीकरण की ग्लोबल आंधी ने धर्म और आस्था के तंबुओं को झकझोर दिया है. लेकिन धर्म और आधुनिकता में हर जगह टकराव नहीं है. कई बार दोनों की जुगलबंदी भी दिखती है. पीयूष बबेले और आशीष मिश्र धर्म के सामने मौजूद चुनौतियों का जायजा ले रहे हैं.

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घोटाला: घोटाले ने पकड़ी रफ्तार
पहले और अब के घोटाले में बड़ा फर्क यह है कि अब घोटाले में प्रोफेशनल्स भी राजनेताओं का दे रहे साथ.
पहले और अब के घोटाले में बड़ा फर्क यह है कि अब घोटाले में प्रोफेशनल्स भी राजनेताओं का दे रहे साथ.

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धर्म: नए जमाने के नए भगवान शनिदेव
जिंदगी में व्यस्तता बढ़ी तो कॉफी से लेकर मटर-पनीर तक इंस्टेंट मिलने लगे. अब लोगों ने इंस्टेंट फल देने वाला भगवान भी तलाश लिया है. शनि देव 21वीं सदी के तेजी से लोकप्रिय होते भगवान हैं.
जिंदगी में व्यस्तता बढ़ी तो कॉफी से लेकर मटर-पनीर तक इंस्टेंट मिलने लगे. अब लोगों ने इंस्टेंट फल देने वाला भगवान भी तलाश लिया है. शनि देव 21वीं सदी के तेजी से लोकप्रिय होते भगवान हैं.

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धर्म: नए जमाने के नए भगवान शनिदेव
जिंदगी में व्यस्तता बढ़ी तो कॉफी से लेकर मटर-पनीर तक इंस्टेंट मिलने लगे. अब लोगों ने इंस्टेंट फल देने वाला भगवान भी तलाश लिया है. शनि देव 21वीं सदी के तेजी से लोकप्रिय होते भगवान हैं.
जिंदगी में व्यस्तता बढ़ी तो कॉफी से लेकर मटर-पनीर तक इंस्टेंट मिलने लगे. अब लोगों ने इंस्टेंट फल देने वाला भगवान भी तलाश लिया है. शनि देव 21वीं सदी के तेजी से लोकप्रिय होते भगवान हैं.

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गांव: किसकी सोहबत में 'बिगड़े’ निगोड़े गांव
भारत माता अब भी कमोबेश ग्रामवासिनी ही है लेकिन वहां अब एक हाथ में लोटा तो दूसरे में मोबाइल है. डीटीएच की रौनक है तो महिलाओं के जिम और ब्यूटी पार्लर भी हैं.
भारत माता अब भी कमोबेश ग्रामवासिनी ही है लेकिन वहां अब एक हाथ में लोटा तो दूसरे में मोबाइल है. डीटीएच की रौनक है तो महिलाओं के जिम और ब्यूटी पार्लर भी हैं.

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एजेंडा आजतक: जब एजेंडा एक तो दूरियां कैसी?
इसे नेताओं की अदा कहें या राजनीति की मजबूरी कि जो घोषणाएं पार्टियों के मंच से होनी चाहिए, उनके लिए एजेंडा-आजतक नेताओं को ज्यादा रास आया.
इसे नेताओं की अदा कहें या राजनीति की मजबूरी कि जो घोषणाएं पार्टियों के मंच से होनी चाहिए, उनके लिए एजेंडा-आजतक नेताओं को ज्यादा रास आया.

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एजेंडा आजतक: जब एजेंडा एक तो दूरियां कैसी?
इसे नेताओं की अदा कहें या राजनीति की मजबूरी कि जो घोषणाएं पार्टियों के मंच से होनी चाहिए, उनके लिए एजेंडा-आजतक नेताओं को ज्यादा रास आया.
इसे नेताओं की अदा कहें या राजनीति की मजबूरी कि जो घोषणाएं पार्टियों के मंच से होनी चाहिए, उनके लिए एजेंडा-आजतक नेताओं को ज्यादा रास आया.

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बिहार में वाइस चांसलरों पर गाज
धारणा और सचाई में कितना अंतर है यह 7 दिसंबर को उस समय साफ जाहिर हो गया जब पटना हाइकोर्ट ने राज्यपाल देवानंद कोनवार के चांसलर के अपने अधिकार के तहत नियुक्त किए गए छह वाइस चांसलर और चार प्रो-वाइस चांसलर की नियुक्ति रद्द कर दी.
धारणा और सचाई में कितना अंतर है यह 7 दिसंबर को उस समय साफ जाहिर हो गया जब पटना हाइकोर्ट ने राज्यपाल देवानंद कोनवार के चांसलर के अपने अधिकार के तहत नियुक्त किए गए छह वाइस चांसलर और चार प्रो-वाइस चांसलर की नियुक्ति रद्द कर दी.

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2010 की गर्मी ने उमर को नेता बनाया
पचहत्तर साल के अपने जीवन में फारूक अब्दुल्ला ने पांच कार्यकाल में 12 साल तक जम्मू और कश्मीर पर राज किया है. उनके 42 वर्षीय बेटे उमर अब्दुल्ला का बतौर मुख्यमंत्री यह तीसरा साल है. फारूक के पिता शेख अब्दुल्ला ने अपने जीवन का अधिकतर हिस्सा जेल में बिताया था, कभी महाराजा हरि सिंह ने तो कभी भारत सरकार ने उन्हें जेल भेजा.
पचहत्तर साल के अपने जीवन में फारूक अब्दुल्ला ने पांच कार्यकाल में 12 साल तक जम्मू और कश्मीर पर राज किया है. उनके 42 वर्षीय बेटे उमर अब्दुल्ला का बतौर मुख्यमंत्री यह तीसरा साल है. फारूक के पिता शेख अब्दुल्ला ने अपने जीवन का अधिकतर हिस्सा जेल में बिताया था, कभी महाराजा हरि सिंह ने तो कभी भारत सरकार ने उन्हें जेल भेजा.

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सिगरेट के कारोबार में जाना चाहता था, पापा ने मना किया
मुंबई के दो भाइयों अर्दशीर और पिरोजशा गोदरेज ने 1897 में भारत के सबसे लोकप्रिय और कामयाब कारोबारों में से एक की नींव रखी थी. कभी भारत के सबसे सुरक्षित तालों के लिए पहचाना जाने वाला गोदरेज ब्रांड आज कंज्यूमर गुड्स, केमिकल्स, रियल एस्टेट और रिटेल कारोबार में भी मौजूद है.
मुंबई के दो भाइयों अर्दशीर और पिरोजशा गोदरेज ने 1897 में भारत के सबसे लोकप्रिय और कामयाब कारोबारों में से एक की नींव रखी थी. कभी भारत के सबसे सुरक्षित तालों के लिए पहचाना जाने वाला गोदरेज ब्रांड आज कंज्यूमर गुड्स, केमिकल्स, रियल एस्टेट और रिटेल कारोबार में भी मौजूद है.

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चीन से जंग लड़ सकते है, रोक नहीं सकते
कोलकाता स्थित सेना की पूर्वी कमान के प्रमुख के तौर पर 88 वर्षीय ले. जनरल (अवकाशप्राप्त) जैकब-फर्ज-रफेल (जेएफआर) जैकब 1971 की भारत-पाकिस्तान जंग में फतह दिलाने वालों में से एक थे. इसी जंग के कारण बांग्लादेश बना. 72 वर्षीय जनरल (अवकाश प्राप्त) वेद प्रकाश मलिक 1999 में करगिल की जंग के दौरान सेना प्रमुख थे.
कोलकाता स्थित सेना की पूर्वी कमान के प्रमुख के तौर पर 88 वर्षीय ले. जनरल (अवकाशप्राप्त) जैकब-फर्ज-रफेल (जेएफआर) जैकब 1971 की भारत-पाकिस्तान जंग में फतह दिलाने वालों में से एक थे. इसी जंग के कारण बांग्लादेश बना. 72 वर्षीय जनरल (अवकाश प्राप्त) वेद प्रकाश मलिक 1999 में करगिल की जंग के दौरान सेना प्रमुख थे.

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आज भी क्रिकेटर जितना पैसा कमा रहे हैं, काफी नहीं है
उनमें से एक महान खिलाड़ी है तो दूसरा महान बनने की ओर बढ़ रहा है. हम कपिल देव के होटल सुइट के लिविंग रूम में विराट कोहली का इंतजार कर रहे थे. 53 साल के हो चुके महान खिलाड़ी काफी विनम्र हैं. वे उस समय बड़ी ही समझदारी से पेश आए जब 24 वर्षीय विराट कोहली तय समय से तीन घंटे देरी से पहुंचे. उन्होंने कहा, ‘‘कोई बात नहीं. भारत में सेलिब्रिटी क्रिकेटर होना आसान नहीं है.
उनमें से एक महान खिलाड़ी है तो दूसरा महान बनने की ओर बढ़ रहा है. हम कपिल देव के होटल सुइट के लिविंग रूम में विराट कोहली का इंतजार कर रहे थे. 53 साल के हो चुके महान खिलाड़ी काफी विनम्र हैं. वे उस समय बड़ी ही समझदारी से पेश आए जब 24 वर्षीय विराट कोहली तय समय से तीन घंटे देरी से पहुंचे. उन्होंने कहा, ‘‘कोई बात नहीं. भारत में सेलिब्रिटी क्रिकेटर होना आसान नहीं है.

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छोटे बच्चों को शास्त्रीय संगीत सिखाना चाहिए
पंडित रवि शंकर और सितार एक-दूसरे का पर्याय हैं. 92 साल की उम्र में भी वे कन्सर्ट में प्रस्तुति दे रहे थे. भारतीय संगीत को वैश्विक श्रोताओं तक पहुंचाकर और अपनी शैली में पश्चिमी तत्वों का समावेश करते हुए रवि शंकर ने अपनी गौरवशाली विरासत अपनी 31 वर्षीया बेटी अनुष्का के हाथों में सौंपी.
पंडित रवि शंकर और सितार एक-दूसरे का पर्याय हैं. 92 साल की उम्र में भी वे कन्सर्ट में प्रस्तुति दे रहे थे. भारतीय संगीत को वैश्विक श्रोताओं तक पहुंचाकर और अपनी शैली में पश्चिमी तत्वों का समावेश करते हुए रवि शंकर ने अपनी गौरवशाली विरासत अपनी 31 वर्षीया बेटी अनुष्का के हाथों में सौंपी.

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हम दोस्त नहीं हैं. मेरे पिता ने भी मुझसे दोस्ती नहीं की थी
ऋषि कपूर सिर्फ 16 वर्ष के थे और स्कूल में पढ़ रहे थे, जब उन्हें मेरा नाम जोकर में लिया गया. रणबीर कपूर सिर्फ 15 वर्ष के थे, जब उनके पिता ने उन्हें अपने डायरेक्शन में बनने वाली पहली फिल्म आ अब लौट चलें का असिस्टेंट डायरेक्टर बनाया. दोनों फिल्में औसत रहीं लेकिन दोनों के सितारों का उदय हो गया. 60 वर्षीय ऋषि कपूर का संभवत: बॉलीवुड में एक रोमांटिक हीरो के रूप में सबसे लंबा करियर रहा है.
ऋषि कपूर सिर्फ 16 वर्ष के थे और स्कूल में पढ़ रहे थे, जब उन्हें मेरा नाम जोकर में लिया गया. रणबीर कपूर सिर्फ 15 वर्ष के थे, जब उनके पिता ने उन्हें अपने डायरेक्शन में बनने वाली पहली फिल्म आ अब लौट चलें का असिस्टेंट डायरेक्टर बनाया. दोनों फिल्में औसत रहीं लेकिन दोनों के सितारों का उदय हो गया. 60 वर्षीय ऋषि कपूर का संभवत: बॉलीवुड में एक रोमांटिक हीरो के रूप में सबसे लंबा करियर रहा है.

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पता नहीं चलता कि कौन नायिका है और कौन खलनायिका
नवंबर की दोपहर है और समुद्र सूरज की गर्मी में नहा रहा है. इसके किनारे बने जुहू के एक होटल का आरामदेह सुइट सिने जगत की दो मशहूर तारिकाओं की गुफ्तगू शूट करने के लिए संवारा जा रहा है. वैसे तो बॉलीवुड में सितारे कई हैं, लेकिन टिकते कुछ ही हैं. यही वजह है कि तनुजा (69) और काजोल (38) की मां-बेटी की जोड़ी आज भी अपनी ओर खींचती है.
नवंबर की दोपहर है और समुद्र सूरज की गर्मी में नहा रहा है. इसके किनारे बने जुहू के एक होटल का आरामदेह सुइट सिने जगत की दो मशहूर तारिकाओं की गुफ्तगू शूट करने के लिए संवारा जा रहा है. वैसे तो बॉलीवुड में सितारे कई हैं, लेकिन टिकते कुछ ही हैं. यही वजह है कि तनुजा (69) और काजोल (38) की मां-बेटी की जोड़ी आज भी अपनी ओर खींचती है.

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ब्रॉन्ज मेडल जीतते थे तो हमें अपना चेहरा छुपाना पड़ता था
छप्पन वर्षीय जफर इकबाल और उनके आधे से भी कम उम्र के 26 वर्षीय संदीप सिंह खेल के दो ऐसे अलग-अलग दौर से ताल्लुक रखते हैं जिसमें इन्फ्रास्ट्रक्चर और अन्य सुविधाओं में भारी सुधार हुआ है, लेकिन नतीजों में नाटकीय गिरावट आई है. इकबाल 1980 में मॉस्को ओलंपिक में गोल्ड मेडल जीतने वाली भारतीय हॉकी टीम का हिस्सा रहे हैं, जबकि संदीप सिंह को लंदन ओलंपिक 2012 में सबसे निचले पायदान पर रहने की बदनामी झेलनी पड़ी.
छप्पन वर्षीय जफर इकबाल और उनके आधे से भी कम उम्र के 26 वर्षीय संदीप सिंह खेल के दो ऐसे अलग-अलग दौर से ताल्लुक रखते हैं जिसमें इन्फ्रास्ट्रक्चर और अन्य सुविधाओं में भारी सुधार हुआ है, लेकिन नतीजों में नाटकीय गिरावट आई है. इकबाल 1980 में मॉस्को ओलंपिक में गोल्ड मेडल जीतने वाली भारतीय हॉकी टीम का हिस्सा रहे हैं, जबकि संदीप सिंह को लंदन ओलंपिक 2012 में सबसे निचले पायदान पर रहने की बदनामी झेलनी पड़ी.

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मुनाफे के लिए जानलेवा मिलावट
मध्य प्रदेश का ग्वालियर-चंबल इलाका भरपूर दूध और घी उत्पादन के लिए जाना जाता है. यहां से ये उत्पाद देशभर में भेजे जाते हैं. लेकिन पिछले दिनों क्षेत्र के कारोबार की दूध की उजली साख पर बट्टा लग गया जब शिर्डी के साईं बाबा मंदिर ट्रस्ट ने ग्वालियर की घी निर्माता कंपनी चंबल डेयरी प्रोडक्ट के घी को मिलावटी पाया और कंपनी पर बैन लगा दिया.
मध्य प्रदेश का ग्वालियर-चंबल इलाका भरपूर दूध और घी उत्पादन के लिए जाना जाता है. यहां से ये उत्पाद देशभर में भेजे जाते हैं. लेकिन पिछले दिनों क्षेत्र के कारोबार की दूध की उजली साख पर बट्टा लग गया जब शिर्डी के साईं बाबा मंदिर ट्रस्ट ने ग्वालियर की घी निर्माता कंपनी चंबल डेयरी प्रोडक्ट के घी को मिलावटी पाया और कंपनी पर बैन लगा दिया.

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गोला दागने को तैयार स्वदेशी तोप
भारतीय थल सेना 27,000 करोड़ रु. की तोपें खरीदने वाली है. इस जरूरत को पूरा करने के लिए स्वदेशी उद्योगों ने कदम आगे बढ़ाया.
भारतीय थल सेना 27,000 करोड़ रु. की तोपें खरीदने वाली है. इस जरूरत को पूरा करने के लिए स्वदेशी उद्योगों ने कदम आगे बढ़ाया.

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बीजेपी में विचार ज्यादा मजबूत: शिवराज सिंह चौहान
मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने आजतक चैनल के सीधी बात कार्यक्रम में हेडलाइंस टुडे के मैनेजिंग एडिटर राहुल कंवल से बातचीत की. पेश हैं प्रमुख अंश:
मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने आजतक चैनल के सीधी बात कार्यक्रम में हेडलाइंस टुडे के मैनेजिंग एडिटर राहुल कंवल से बातचीत की. पेश हैं प्रमुख अंश:

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चला गया सितार का सुल्तान
रवि शंकर के जीवन और प्रतिभा की छाप बीते नौ दशकों पर रही. पेश है एस. कालिदास की श्रद्धांजलि. हमारे दौर के महान भारतीय संगीतकार पंडित रवि शंकर अब हमारे बीच नहीं हैं.
रवि शंकर के जीवन और प्रतिभा की छाप बीते नौ दशकों पर रही. पेश है एस. कालिदास की श्रद्धांजलि. हमारे दौर के महान भारतीय संगीतकार पंडित रवि शंकर अब हमारे बीच नहीं हैं.

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अब बनो, किसके अध्यक्ष बनोगे
आइओए के अध्यक्ष पद के लिए रणधीर सिंह और अभय चौटाला की आपसी जंग में भारत की ओलंपिक मान्यता निलंबित.
आइओए के अध्यक्ष पद के लिए रणधीर सिंह और अभय चौटाला की आपसी जंग में भारत की ओलंपिक मान्यता निलंबित.

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राजस्थान: विवादों के चार 'अभूतपूर्व' वर्ष
अशोक गहलोत का मुख्यमंत्री के तौर पर अनुभव नौ वर्षों का है. लेकिन वे राज्य को कुशल प्रशासन देने में विफल रहे.
अशोक गहलोत का मुख्यमंत्री के तौर पर अनुभव नौ वर्षों का है. लेकिन वे राज्य को कुशल प्रशासन देने में विफल रहे.

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टाटा के आगे बढऩे का वक्त
रिटायर हो रहे टाटा संस के चेयरमैन को भारतीय कारोबार जगत का नैतिक दिशा निर्धारक बनना चाहिए.
रिटायर हो रहे टाटा संस के चेयरमैन को भारतीय कारोबार जगत का नैतिक दिशा निर्धारक बनना चाहिए.
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