14 मार्च 2012: तस्वीरों में इंडिया टुडे | पढ़ें इंडिया टुडे
अपडेटेड 10 मार्च , 2012

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खाकी मांगे खून: कहानी एनकाउंटर स्पेशलिस्टों की
मुंबई के एनकाउंटर स्पेशलिस्ट का कभी बॉलीवुड गुणगान करता था और उनके साथी उनसे डरते थे. लेकिन आज हारी हुई लड़ाई लड़ रहे हैं. इनमें से कई जेल में और बाकी जमानत पर छूटे हैं. उन्हें दुबारा नौकरी में वापसी का इंतजार है.
मुंबई के एनकाउंटर स्पेशलिस्ट का कभी बॉलीवुड गुणगान करता था और उनके साथी उनसे डरते थे. लेकिन आज हारी हुई लड़ाई लड़ रहे हैं. इनमें से कई जेल में और बाकी जमानत पर छूटे हैं. उन्हें दुबारा नौकरी में वापसी का इंतजार है.

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खाकी मांगे खून: कहानी एनकाउंटर स्पेशलिस्टों की
मुंबई के एनकाउंटर स्पेशलिस्ट का कभी बॉलीवुड गुणगान करता था और उनके साथी उनसे डरते थे. लेकिन आज हारी हुई लड़ाई लड़ रहे हैं. इनमें से कई जेल में और बाकी जमानत पर छूटे हैं. उन्हें दुबारा नौकरी में वापसी का इंतजार है.
मुंबई के एनकाउंटर स्पेशलिस्ट का कभी बॉलीवुड गुणगान करता था और उनके साथी उनसे डरते थे. लेकिन आज हारी हुई लड़ाई लड़ रहे हैं. इनमें से कई जेल में और बाकी जमानत पर छूटे हैं. उन्हें दुबारा नौकरी में वापसी का इंतजार है.

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एनआरएचएम घोटाला: उत्तर प्रदेश सेहत की माया
उत्तर प्रदेश के स्वास्थ्य महकमे में इन दिनों खासी हलचल है. कारण, 5,000 करोड़ रु. के राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन (एनआरएचएम) घोटाले को अंजाम देने वालों पर सीबीआइ का कसता शिकंजा. सीबीआइ को तफ्तीश में ऐसे सुबूत मिले हैं जिनके बूते उसके हाथ इस मामले से जुड़े बड़े रसूखदारों तक पहुंच सकते हैं.
उत्तर प्रदेश के स्वास्थ्य महकमे में इन दिनों खासी हलचल है. कारण, 5,000 करोड़ रु. के राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन (एनआरएचएम) घोटाले को अंजाम देने वालों पर सीबीआइ का कसता शिकंजा. सीबीआइ को तफ्तीश में ऐसे सुबूत मिले हैं जिनके बूते उसके हाथ इस मामले से जुड़े बड़े रसूखदारों तक पहुंच सकते हैं.

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'गरीब कभी बेईमान नहीं होता, हम गरीब हैं'
हमने एक बड़ी लकीर खींच दी, बिहार की एक व्यापक पहचान बनाई ताकि बिहारी इन तुच्छ अस्मिताओं से ऊपर उठ सके. पिछले चार साल के दौरान यह नई पहचान मजबूत हुई है.
हमने एक बड़ी लकीर खींच दी, बिहार की एक व्यापक पहचान बनाई ताकि बिहारी इन तुच्छ अस्मिताओं से ऊपर उठ सके. पिछले चार साल के दौरान यह नई पहचान मजबूत हुई है.

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अमेरिकी चुनाव: भारतीयों से लगी आस | गांधी पूरी दुनिया के हीरो
ओबामा ने समुदाय के वोट हासिल करने के लिए तीन भारतीय-अमेरिकियों को अपने चुनाव प्रचार अभियान से जोड़ा.
ओबामा ने समुदाय के वोट हासिल करने के लिए तीन भारतीय-अमेरिकियों को अपने चुनाव प्रचार अभियान से जोड़ा.

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नारायण दत्त तिवारी: जब तक सांस तब तक सियासत
राजभवन सीडी कांड के बाद राजनैतिक बियावान में गए तिवारी को कांग्रेस ने फिर झाड़-पोंछकर खड़ा किया. ऐसा क्या खास है तिवारी में.
राजभवन सीडी कांड के बाद राजनैतिक बियावान में गए तिवारी को कांग्रेस ने फिर झाड़-पोंछकर खड़ा किया. ऐसा क्या खास है तिवारी में.

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डीजीसीए: आसमान में आपका चौकस रक्षक
हेलीपैड्स को बंद करने और विमानों का सुरक्षा ऑडिट करवाने वाले डीजीसीए प्रमुख फटाफट कार्रवाई में भरोसा करते हैं. भूषण डीजीसीए को जवाबदेह संगठन बनाना चाहते हैं. उन्होंने इस संगठन में पारदर्शिता लाने के लिए कई कदम उठाए हैं.
हेलीपैड्स को बंद करने और विमानों का सुरक्षा ऑडिट करवाने वाले डीजीसीए प्रमुख फटाफट कार्रवाई में भरोसा करते हैं. भूषण डीजीसीए को जवाबदेह संगठन बनाना चाहते हैं. उन्होंने इस संगठन में पारदर्शिता लाने के लिए कई कदम उठाए हैं.

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दंगों का दंश: दो पहचान के बीच पिसता बचपन
गुजरात दंगों के दौरान दो साल के मुजफ्फर को एक हिंदू परिवार ने अपना लिया. दस साल गुजरने के बाद उसके मां-बाप उसे फिर से हासिल करना चाहते हैं.
गुजरात दंगों के दौरान दो साल के मुजफ्फर को एक हिंदू परिवार ने अपना लिया. दस साल गुजरने के बाद उसके मां-बाप उसे फिर से हासिल करना चाहते हैं.

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शेहला मसूद हत्याकांड में सनसनीखेज खुलासा
शेहला मसूद की हत्या के मामले में भोपाल की इंटीरियर डिजाइनर जाहिदा परवेज को पुलिस रिमांड पर भेजा गया. और गिरफ्तारिया संभावित. सीबीआइ की मानें तो कानपुर के शूटर्स को तीन लाख रु. की सुपारी देकर जाहिदा ने शेहला की हत्या करवाई थी.
शेहला मसूद की हत्या के मामले में भोपाल की इंटीरियर डिजाइनर जाहिदा परवेज को पुलिस रिमांड पर भेजा गया. और गिरफ्तारिया संभावित. सीबीआइ की मानें तो कानपुर के शूटर्स को तीन लाख रु. की सुपारी देकर जाहिदा ने शेहला की हत्या करवाई थी.

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भंवरी के पति अमरचंद को लालच ने कहीं का न छोड़ा
भंवरी के पति अमरचंद को पता था कि उसकी तीसरी संतान मलखान सिंह से पैदा हुई है. मलखान और भंवरी के रिश्तों को वह अच्छी तरह जानता था, तभी तो संदिग्ध के तौर पर उसका नाम न लेने के मामले में वह ज्यादा ही सतर्क था.
भंवरी के पति अमरचंद को पता था कि उसकी तीसरी संतान मलखान सिंह से पैदा हुई है. मलखान और भंवरी के रिश्तों को वह अच्छी तरह जानता था, तभी तो संदिग्ध के तौर पर उसका नाम न लेने के मामले में वह ज्यादा ही सतर्क था.

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ये हिंदी को मॉडर्न बना रहे हैं | पढ़ें इंडिया टुडे
हिंदी में बदलाव की बयार बह रही है. एक सदी पुराने हिंदी के बड़े प्रकाशकों की कमान अब ग्लोबल जमाने की युवा पीढ़ी के हाथों में है, जो हिंदी प्रकाशन जगत की जकड़नों को तोड़ने में जुटी है.
हिंदी में बदलाव की बयार बह रही है. एक सदी पुराने हिंदी के बड़े प्रकाशकों की कमान अब ग्लोबल जमाने की युवा पीढ़ी के हाथों में है, जो हिंदी प्रकाशन जगत की जकड़नों को तोड़ने में जुटी है.

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अल्ट्राबुक यानी स्लिम, सुंदर और सुपरफास्ट
अपने नए-नए अवतारों में अल्ट्राबुक, पतला, दिखने में आकर्षक और इस्तेमाल में आसान हो गया है.
अपने नए-नए अवतारों में अल्ट्राबुक, पतला, दिखने में आकर्षक और इस्तेमाल में आसान हो गया है.

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होली का हुल्लड़, येल्ले...येल्ले ऊ...लाला...
एक बड़ी चिंता व्यंग्यकारों की बिरादरी में उभरकर आई है. मल्लब...ये भी कोई बात हुई कि साल भर स्साला रंग ई खेलते रहो, होली सरीखे सालाना मिलावटी फेस्टिवल के लिए कुछ छोड़ो ही न? मुओं ने पूरे साल होली जैसी किचाहिन किए रखी.
एक बड़ी चिंता व्यंग्यकारों की बिरादरी में उभरकर आई है. मल्लब...ये भी कोई बात हुई कि साल भर स्साला रंग ई खेलते रहो, होली सरीखे सालाना मिलावटी फेस्टिवल के लिए कुछ छोड़ो ही न? मुओं ने पूरे साल होली जैसी किचाहिन किए रखी.

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होली का हुल्लड़, येल्ले...येल्ले ऊ...लाला...
एक बड़ी चिंता व्यंग्यकारों की बिरादरी में उभरकर आई है. मल्लब...ये भी कोई बात हुई कि साल भर स्साला रंग ई खेलते रहो, होली सरीखे सालाना मिलावटी फेस्टिवल के लिए कुछ छोड़ो ही न? मुओं ने पूरे साल होली जैसी किचाहिन किए रखी.
एक बड़ी चिंता व्यंग्यकारों की बिरादरी में उभरकर आई है. मल्लब...ये भी कोई बात हुई कि साल भर स्साला रंग ई खेलते रहो, होली सरीखे सालाना मिलावटी फेस्टिवल के लिए कुछ छोड़ो ही न? मुओं ने पूरे साल होली जैसी किचाहिन किए रखी.

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भंवरी देवी हत्याकांड में चार्जशीट से कुछ अंश
भंवरी देवी, मलखान सिंह बिश्नोई और महिपाल मदेरणा के बीच रिश्ते ऐयाशी, लालच, अवसरवाद की जबरदस्त दास्तान हैं.
भंवरी देवी, मलखान सिंह बिश्नोई और महिपाल मदेरणा के बीच रिश्ते ऐयाशी, लालच, अवसरवाद की जबरदस्त दास्तान हैं.
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