scorecardresearch

गन्ना, गौमाता और गाजियाबाद के बहाने योगी ने कैसे बिछाई 2027 की बिसात?

बिजनौर की सभा में योगी ने गन्ना किसानों, विस्थापित हिंदुओं और जाट समाज को साधते हुए गौमाता, सीएए और गाजियाबाद प्रकरण के जरिए 2027 के हिंदुत्व एजेंडे को नई धार दी

Yogi Adityanath
योगी आदित्यनाथ (फोटो : PTI)
अपडेटेड 2 जून , 2026

बिजनौर के बढ़ापुर विधानसभा क्षेत्र के आलमपुर गांवड़ी में 1 जून को आयोजित कार्यक्रम महज पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान से आए विस्थापित हिंदुओं को ‘भूमिधरी अधिकार प्रमाण पत्र’ बांटने का सरकारी आयोजन नहीं था. 

यह पश्चिमी उत्तर प्रदेश की राजनीति के केंद्र में खड़े होकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का 2027 के विधानसभा चुनाव की पृष्ठभूमि तैयार करने का मंच भी था. लगभग 35 मिनट के भाषण में योगी ने विकास, किसान, विस्थापित, गौमाता, गाजियाबाद और कट्टरपंथ जैसे मुद्दों को इस तरह पिरोया कि उनका पूरा भाषण एक राजनीतिक संदेश में तब्दील हो गया.

योगी ने भाषण की शुरुआत ‘ओम नमः पार्वती पतये, हर-हर महादेव’ के उद्घोष से की. इसके बाद महात्मा विदुर की धरती को नमन करते हुए उन्होंने धर्म और संस्कृति का संदर्भ दिया. लेकिन भाषण आगे बढ़ते-बढ़ते स्पष्ट हो गया कि उनका लक्ष्य केवल सरकारी उपलब्धियां गिनाना नहीं बल्कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश के उस सामाजिक और राजनीतिक समीकरण को फिर से सक्रिय करना है जिसने 2017 और 2022 में BJP को निर्णायक बढ़त दिलाई थी. 

सबसे पहले मुख्यमंत्री योगी ने गन्ने का मुद्दा उठाया. बिजनौर प्रदेश के सबसे बड़े गन्ना उत्पादक जिलों में है और यहां किसान राजनीति हमेशा चुनावी परिणामों को प्रभावित करती रही है. योगी ने मंच से कहा कि केंद्रीय मंत्री जयंत चौधरी, किसान संगठनों और अन्य प्रतिनिधियों की मांग पर सरकार ने गन्ने का मूल्य बढ़ाकर 400 रुपए प्रति कुंतल कर दिया. यह केवल मूल्य वृद्धि का उल्लेख नहीं था. इसके जरिए उन्होंने राष्ट्रीय लोकदल के समर्थक जाट किसानों तक भी संदेश पहुंचाया कि BJP सरकार किसानों की मांगों को सुनती है. 

पश्च‍िमी यूपी के राजनीतिक विश्लेषक अविनींद्र कमल मानते हैं कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश में BJP की रणनीति हमेशा दो स्तरों पर काम करती है. पहला, किसानों और ग्रामीण अर्थव्यवस्था से जुड़े मुद्दों पर भरोसा कायम रखना और दूसरा, सांस्कृतिक-धार्मिक पहचान के प्रश्नों को सक्रिय बनाए रखना. उनके अनुसार बिजनौर में योगी का भाषण इसी रणनीति का उदाहरण था, जहां गन्ना किसानों को आर्थिक संदेश दिया गया और बाद के हिस्से में हिंदुत्व का राजनीतिक विमर्श केंद्र में लाया गया. 

योगी ने चौधरी चरण सिंह की 125वीं जयंती पर बड़े कार्यक्रम आयोजित करने की घोषणा भी की. पश्चिमी उत्तर प्रदेश में चौधरी चरण सिंह केवल एक पूर्व प्रधानमंत्री नहीं बल्कि किसान राजनीति के प्रतीक हैं. BJP लंबे समय से उनके राजनीतिक और सामाजिक प्रभाव को अपने पक्ष में साधने की कोशिश कर रही है. जयंत चौधरी के एनडीए में आने के बाद यह प्रयास और मजबूत हुआ है. बिजनौर की सभा में चरण सिंह का उल्लेख इसी व्यापक राजनीतिक रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है.

लेकिन भाषण का सबसे चर्चित हिस्सा गाजियाबाद की हालिया घटना और गौमाता को लेकर दिए गए बयान रहे. गाजियाबाद में एक युवक की दूसरे समुदाय के युवकों ने चाकू से गोदकर हत्या कर दी थी. योगी ने कहा कि दोस्ती की आड़ में होने वाली ‘छुरेबाजी’ अब बर्दाश्त नहीं की जाएगी. उन्होंने मौलाना और मौलवियों को संबोधित करते हुए कहा कि वे अपने ‘शोहदों’ को समझाएं, अन्यथा अंजाम अच्छा नहीं होगा. साथ ही उन्होंने गौमाता को राष्ट्रीय पशु घोषित करने की मांग का जिक्र करते हुए कहा कि गाय उनकी नजर में केवल पशु नहीं बल्कि माता है. 

यहां योगी ने एक साथ कई राजनीतिक संकेत दिए. पहला, कानून व्यवस्था पर अपनी सख्त छवि को फिर से स्थापित किया. दूसरा, गौ-संरक्षण के मुद्दे को हिंदुत्व के भावनात्मक विमर्श से जोड़ा. तीसरा, उन्होंने कट्टरपंथ और सांप्रदायिक तनाव के मुद्दे को सीधे अपने राजनीतिक नैरेटिव में शामिल किया. मेरठ में राजनीतिक मामलों के जानकार विवेक नौटियाल कहते हैं कि योगी आदित्यनाथ की राजनीति का सबसे मजबूत पक्ष उनकी स्पष्ट वैचारिक पहचान है. उनके अनुसार जब भी चुनाव नजदीक आते हैं, योगी विकास और हिंदुत्व के दोहरे मॉडल पर काम करते हैं. एक तरफ वे सड़क, बिजली, आवास और निवेश की बात करते हैं, दूसरी तरफ गौ-संरक्षण, धार्मिक पहचान और कानून व्यवस्था को प्रमुखता देते हैं. बिजनौर का भाषण इसी मिश्रण का उदाहरण है.

योगी ने नागरिकता संशोधन कानून (CAA) का भी उल्लेख किया. उन्होंने कहा कि जब यह कानून लाया गया तब विपक्ष ने भ्रम फैलाया, जबकि इसका उद्देश्य पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान से प्रताड़ित होकर आए हिंदू, सिख, जैन और बौद्ध समुदायों को राहत देना था. उन्होंने कांग्रेस और समाजवादी पार्टी पर आरोप लगाया कि उन्होंने कभी इन विस्थापित परिवारों की चिंता नहीं की. यही वह बिंदु था जहां सरकारी कार्यक्रम और राजनीतिक संदेश पूरी तरह एक-दूसरे में घुलते दिखाई दिए. 

कार्यक्रम में 1645 परिवारों को भूमिधरी अधिकार प्रमाण पत्र दिए गए. मुख्यमंत्री ने कहा कि आगे चलकर आठ से दस हजार परिवारों को इसका लाभ मिलेगा. विस्थापित हिंदुओं को भूमि अधिकार देने का संदेश BJP के उस राजनीतिक विमर्श से मेल खाता है जिसमें धार्मिक उत्पीड़न के शिकार हिंदुओं को संरक्षण देने की बात प्रमुखता से उठाई जाती है. पश्चिमी उत्तर प्रदेश में इसका विशेष महत्व है. यहां बड़ी संख्या में ऐसे परिवार रहते हैं जो विभाजन, पाकिस्तान या बाद के वर्षों में बांग्लादेश और अफगानिस्तान से आए थे. BJP लंबे समय से इन समुदायों को अपने स्थायी समर्थन आधार में बदलने की कोशिश करती रही है.

राजनीतिक विश्लेषक अविनींद्र कमल मानते हैं कि 2024 के लोकसभा चुनाव में पश्चिमी उत्तर प्रदेश में BJP को अपेक्षित सफलता नहीं मिली थी. 14 लोकसभा सीटों वाले इस क्षेत्र में मुकाबला लगभग बराबरी का रहा. ऐसे में BJP 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले अपने पारंपरिक मुद्दों को फिर से धार देने की कोशिश कर रही है. उनके अनुसार योगी का बिजनौर भाषण इसी दिशा में पहला बड़ा संकेत माना जा सकता है. 

पश्चिमी उत्तर प्रदेश की अहमियत भी कम नहीं है. प्रदेश की करीब 70 विधानसभा सीटें इसी क्षेत्र में आती हैं और पिछले कई चुनावों में पहले चरण का मतदान यहीं से शुरू होता रहा है. वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव में BJP ने पश्च‍िमी यूपी की कुल 71 विधानसभा सीटों में से 41 पर जीत हासिल की थी. जबकि सपा ने 22 और RLD ने 8 सीटें जीती थीं. विधानसभा चुनाव में सपा का RLD के साथ गठबंधन था. मुख्यमंत्री योगी इन आंकड़ों को वर्ष 2027 के विधानसभा चुनाव में न केवल बरकरार रखना चाहते हैं बल्कि इसमें बढ़ोतरी के लिए भी सारी ताकत लगा रहे हैं. ऐसा इसलिए क्योंकि वर्ष 2022 में BJP के विरोध में चुनाव लड़ने वाली जयंत चौधरी की पार्टी RLD इस बार BJP के साथ गठबंधन में है. 

योगी आदित्यनाथ पिछले कुछ वर्षों में केवल उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री नहीं, बल्कि BJP के सबसे प्रमुख हिंदुत्व चेहरों में शामिल हो चुके है. हरियाणा विधानसभा चुनाव में ‘बंटोगे तो कटोगे’, महाराष्ट्र में हिंदुत्व आधारित भाषणों और पश्चिम बंगाल में धार्मिक पहचान से जुड़े बयानों ने उनकी राजनीतिक शैली को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दी है. बिजनौर में भी उन्होंने उसी शैली को आगे बढ़ाया. दिलचस्प यह है कि उन्होंने विपक्ष पर सीधे हमलों से ज्यादा समय कट्टरपंथ, गौमाता, सीएए और विस्थापित हिंदुओं के मुद्दों पर खर्च किया. इससे संकेत मिलता है कि BJP 2027 की लड़ाई को केवल विकास बनाम विकास के आधार पर नहीं, बल्कि सांस्कृतिक और वैचारिक मुद्दों के इर्द-गिर्द भी लड़ना चाहती है.

Advertisement
Advertisement