scorecardresearch

योगी आदित्यनाथ और केशव प्रसाद मौर्य के बीच सब ठीक हो गया या ये तूफान के पहले की शांति है!

दिल्ली से लौटने के बाद 29 जुलाई को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य के बदले तेवरों ने उनके आपसी मनमुटाव के सिमटने का संकेत दिया था, लेकिन अब इसपर सवाल उठ रहे हैं

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (दाएं) और उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य (बाएं)
योगी आदित्यनाथ और केशव प्रसाद मौर्य
अपडेटेड 31 जुलाई , 2024

क्या यूपी में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) संगठन और सरकार के बीच चल रही तकरार पर विराम लग गया है? 29 जुलाई को शुरू हुए यूपी विधानमंडल के विधानसभा सत्र के पहले दिन तो कम से कम ऐसा ही लगा. 

लोकसभा चुनाव में करारी हार के बाद यूपी भाजपा में 'विद्रोह' का चेहरा दिखाने वाले उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य और बृजेश पाठक 29 जुलाई को विधानसभा के मानसून सत्र से पहले आयोजित भाजपा विधायक दल की बैठक में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के अगल-बगल नजर आए. 

लोकसभा चुनाव के बाद मौर्य और पाठक दोनों ही अब तक मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में होने वाली कई प्रमुख सरकारी बैठकों से दूर रहे हैं. मौर्य ने हाल ही में योगी द्वारा बुलाई गई भाजपा विधायकों की प्रयागराज मंडल बैठक में भी हिस्सा नहीं लिया था. इसी राह पर चलते हुए ब्रजेश पाठक भी लखनऊ मंडल की बैठक से नदारद रहे थे. हालांकि 29 जुलाई को लोकसभा चुनाव के नतीजों के बाद पहली बार दोनों उपमुख्यमंत्री न केवल मुख्यमंत्री के बगल में बैठे नजर आए, बल्कि सुबह जब मुख्यमंत्री मीडियाकर्मियों से बात कर रहे थे, तब भी वे एक ही फ्रेम में ही दि‍खाई दिए. 

इससे यह संकेत मिलने लगा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के साथ उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य और ब्रजेश पाठक का मनमुटाव सुलझा लिया गया है. राजनीतिक विश्लेषकों ने सरकार के शीर्ष नेताओं के बीच इस खुशफहमी को हाल की दिल्ली यात्रा के व्यापक प्रभाव के रूप में देखा. हालांकि, भाजपा राष्ट्रीय संगठन महामंत्री बीएल संतोष और योगी की बैठक के अलावा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा संबोधित भाजपा शासित मुख्यमंत्रियों की बैठक में सीएम और दोनों डिप्टी सीएम की भागीदारी और नीति आयोग की बैठक में मुख्यमंत्री योगी की मौजूदगी में क्या बातें हुईं, इसकी कोई पुष्ट खबर अबतक बंद कमरे से बाहर नहीं आई है. 

राजनीति के जानकार मान रहे हैं कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की दिल्ली में बीएल संतोष से जो मुलाकात हुई उसमें गवर्नेंस के तौर तरीकों में बदलाव को लेकर कुछ बातें कही गई हैं क्योंकि विधायकों से लेकर मंत्रियों तक की शिकायतें सिर्फ अधिकारियों की मनमानी और गवर्नेंस के तौर तरीकों पर ही हैं. अनुमान यह भी लगाया जा रहा है कि दिल्ली की बैठकों में न सही लेकिन अनौपचारिक रूप से भाजपा के शीर्ष नेतृत्व ने यूपी सरकार के तीन बड़े नेताओं को संयम बरतने की ताकीद जरूर की होगी. 

शायद इसीलिए विधानसभा के मानसून सत्र की पहले दिन की कार्यवाही शुरू होने से पहले बदले वातावरण के संकेत मिलने लगे. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ मानसून सत्र के पहले दिन कार्यवाही शुरू होने से करीब पांच मिनट पहले सदन पहुंचे. पिछले तौर तरीकों से उलट इसबार योगी विपक्ष की बेंच पर गए और यूपी विधानसभा में विपक्ष के नव मनोनीत नेता माता प्रसाद पांडेय, वरिष्ठ सपा नेता शिवपाल यादव और अन्य के साथ अभिवादन का आदान-प्रदान किया. मुख्यमंत्री योगी ने राजा भैया और अपनी सरकार के कैबिनेट सहयोगियों ओमप्रकाश राजभर से भी मुलाकात की. 

दिलचस्प बात यह है कि सत्ता पक्ष के कई विधायकों ने योगी के पैर छूकर उनका आशीर्वाद लिया. योगी को विधायकों के साथ अनौपचारिक तरीके से बातचीत करते और उनकी बातों को ध्यान से सुनते भी देखा गया.

विधान मंडल की कार्यवाही के बाद अपनी बारी के हिसाब से तीनों नेता यहां से करीब आधा किलोमीटर दूर विश्वेश्वरैया सभागार में आयोजित भाजपा ओबीसी मोर्चा की प्रदेश कार्यसमिति बैठक में भी पहुंचे. यह प्रदेश भाजपा की 14 जुलाई को हुई कार्यसमिति की बैठक से दो हफ्ते बाद हो रही थी. इन दो हफ्तों में नेताओं के रुख में बदलाव भी दिखाई दिया. केशव प्रसाद मौर्य ने 29 जुलाई को भाजपा ओबीसी मोर्चा की राज्य कार्यकारिणी की बैठक में कहा, “पार्टी चुनाव लड़ती है और पार्टी जीतती है. सरकार चुनाव नहीं लड़ती बल्कि पार्टी लड़ती है. हम अति आत्मविश्वास के कारण लोकसभा चुनाव में उम्मीदों के मुताबिक प्रदर्शन नहीं कर सके.”

मौर्य का यह बयान 14 जुलाई को भाजपा की राज्य कार्यकारिणी की बैठक में उनकी रहस्यमयी टिप्पणी से हलचल पैदा करने के कुछ दिनों बाद आया है, जब उन्होंने कहा था, “संगठन सरकार से बड़ा था, बड़ा है और हमेशा बड़ा रहेगा............ 7 कालिदास मार्ग स्थित मेरे आवास के दरवाजे सभी के लिए खुले हैं.” भाजपा प्रदेश कार्यकारिणी की बैठक में मौर्य की टिप्पणी के एक पखवाड़े बाद संगठन बनाम सरकार की बहस शुरू हो गई, जिससे उत्तर प्रदेश भाजपा में खटपट की चर्चा अपने चरम पर पहुंच गई थी. 

14 जुलाई को इसी बैठक में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा था कि पार्टी कार्यकर्ताओं और उम्मीदवारों के अति आत्मविश्वास ने चुनावों में भाजपा की उम्मीदों को ठेस पहुंचाई है. आदित्यनाथ ने कहा था, “2024 में भाजपा पिछले चुनावों की तरह ही वोट प्रतिशत हासिल करने में सफल रही, लेकिन वोट शिफ्टिंग और अति आत्मविश्वास ने हमारी उम्मीदों को ठेस पहुंचाई. विपक्ष, जो पहले वेंटिलेटर पर था, अब उसे कुछ ऑक्सीजन मिल गई है.” 

हालांकि ओबीसी मोर्चा की कार्यसमिति बैठक में केशव प्रसाद मौर्य ने प्रदेश कार्यसमिति में अपनी कही बातों को भी दोहराया लेकिन इस बार उसके तेवर और उनसे निकलने वाला संकेत पहले की तुलना में अलग था. सभा को संबोधित करते हुए मौर्य ने कहा, “2014 (लोकसभा चुनाव) और 2017 (यूपी विधानसभा चुनाव) में, भाजपा सत्ता में नहीं थी (न तो 2014 से पहले केंद्र में और न ही 2017 से पहले उत्तर प्रदेश में), लेकिन हमने दोनों चुनाव जीते.” मौर्य ने कहा, "पार्टी चुनाव लड़ती है और पार्टी जीतती है. चुनाव पार्टी लड़ती है, सरकार नहीं;" उन्होंने कहा, "हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि 2027 (विधानसभा चुनाव) में यह गलती न दोहराई जाए." 

राजनीति के जानकार ओबीसी मोर्चा की बैठक से निकले संकेतों को नेताओं के बीच पनपी दरार को भरने की फौरी कवायद भी बता रहे हैं. लखनऊ के प्रतिष्ठ‍ित अवध गर्ल्स डिग्री कॉलेज की प्राचार्य और राजनीतिक शास्त्र विभाग की विभागाध्यक्ष बीना राय कहती हैं, “उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की लाइन पर चलते हुए उत्तर प्रदेश में हाल ही में संपन्न लोकसभा चुनावों में पार्टी के खराब प्रदर्शन का कारण अति आत्मविश्वास बता रहे हैं. अब मौर्य के यह कहने के साथ कि यह पार्टी है, न कि सरकार जो चुनाव लड़ती है और जीतती है, यह देखना बाकी है कि क्या उनकी ताजा टिप्पणी हफ्तों के मंथन के बाद यूपी भाजपा में क्षणिक संघर्ष का संकेत हैं. क्योंकि वे उत्तर प्रदेश में भाजपा की 2019 की लोकसभा सीटों की संख्या 62 से घटकर 33 पर आ जाने की जिम्मेदारी से योगी आदित्यनाथ सरकार को बचाने का प्रयास करते प्रतीत हो रहे हैं.” 

हालांकि ओबीसी मोर्चा की प्रदेश कार्यसमिति की बैठक में शामिल एक नेता योगी और दोनों उपमुख्यमंत्री के बीच तनाव जारी रहने की बात कह रहे हैं. बैठक में शामिल एक वरिष्ठ भाजपा नेता बताते हैं, “बैठक में यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ और दोनों डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य के साथ ब्रजेश पाठक बुलाए गए थे. अगर संबंध सामान्य हो गए होते दोनों डिप्टी सीएम योगी आदित्यनाथ के आने के ठीक पहले सभा को छोड़कर निकलते नहीं. जैसे ही सीएम योगी की कुर्सी पर भगवा तौलिया लगने लगा दोनों डिप्टी सीएम कार्यक्रम से निकल लिए.” 

टकराव की बात को और बल मिला जब उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने 29 जुलाई को पुलिस महानिदेशक सहित वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों की एक बैठक की अध्यक्षता की और उन्हें राज्य में बढ़ते भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने का निर्देश दिया. इतना ही नहीं, इस बैठक की तस्वीर के साथ प्रदेश के डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य ने एक्स पर लिखा, “मैंने विधान परिषद में मानसून सत्र के दौरान कानून व्यवस्था के संबंध में उत्तर प्रदेश के पुलिस महानिदेशक श्री प्रशांत कुमार और वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के साथ बैठक की और पुलिस स्टेशनों पर जनता की समस्याओं को प्राथमिकता के आधार पर हल करने, बढ़ते भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने के निर्देश दिए.” 

इसके बाद यह चर्चाएं शुरू हो गईं कि केशव प्रसाद मौर्य किस हैसियत से पुलिस अधिकारियों के साथ बैठक कर रहे हैं. अटकलें तो यहां तक लगने लगीं कि संभवत: केशव प्रसाद मौर्य को अगला गृह मंत्री बनाया जा सकता है इसीलिए वे इस तरह की बैठकें कर रहे हैं. हालांकि इन सभी अटकलों का खंडन केशव प्रसाद मौर्य के एक करीबी नेता करते हैं. वे कहते हैं “केशव प्रसाद मौर्य विधान परिषद में नेता सदन है. इस हैसियत से उन्होंने वर्ष 2023 में भी विधानमंडल के शीतकालीन सत्र के दौरान भी अधिकारियों के साथ ऐसी ही बैठक की थी. इस बैठक को मुख्यमंत्री योगी और केशव प्रसाद मौर्य के बीच बढ़ती आपसी समझ के रूप में देखा जाना चाहिए.” 

अगले दिन 30 जुलाई को सीएम योगी आदित्यनाथ के 5 कालीदास मार्ग स्थ‍ित सरकारी आवास पर हुई कैबिनेट की बैठक में डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य और ब्रजेश पाठक भी पहुंचे. दोनों ने बकायदा सोशल मीडिया पर बैठक की फोटो पोस्ट कर इसकी जानकारी भी दी. यूपी भाजपा में सरकार और संगठन के बीच बीते एक महीने से मची उठापटक के अचानक शांत होने से भी कई तरह की कयासबाजी को बल मिला है. कुछ लोग इसे योगी आदित्यनाथ के बढ़ते प्रभाव के आगे सरकार और संगठन के बीच की जोरआजमाइश को थमने की बात कह रहे हैं तो दूसरी तरफ कुछ ऐसी बातें अब भी हो रही हैं जिससे लगता है कि कहीं यह तूफान के पहले की शांति तो नहीं है. 

Advertisement
Advertisement