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झारखंड कांग्रेस के विधायक अपने ही मंत्रियों को सरकार से हटाना क्यों चाहते हैं?

झारखंड की हेमंत सोरेन सरकार में चार मंत्री कांग्रेस के हैं. पार्टी विधायकों में इनके खिलाफ ऐसा असंतोष है कि पांच विधायक हाई कमान से शिकायत करने दिल्ली पहुंचे हैं

झारखंड कांग्रेस के विधायक दिल्ली में पार्टी महासचिव केसी वेणुगोपाल के साथ
झारखंड कांग्रेस के विधायक दिल्ली में पार्टी महासचिव केसी वेणुगोपाल के साथ
अपडेटेड 22 जनवरी , 2026

अभी देश के चार राज्यों में कांग्रेस सत्ता में है. कर्नाटक, तेलंगाना और हिमाचल प्रदेश में पूरी तरह, जबकि झारखंड में झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) के साथ भागीदारी यानी गठबंधन में. लेकिन झारखंड में सुचारू रूप से सरकार चलाने के बजाय, विधायक आपसी सिरफुटव्वल में लगे ज्यादा दिख रहे हैं. यहां पार्टी के पांच विधायक केंद्रीय नेतृत्व को यह बताने के लिए पहुंचे हैं कि कांग्रेस के चार मंत्री, कार्यकर्ताओं की तो छोड़िए, अपने ही विधायकों की भी नहीं सुन रहे. नाराज विधायकों ने तो यहां तक कह दिया कि चारों मंत्रियों के कामकाज की समीक्षा होनी चाहिए और जरूरत पड़ने पर इनको पद से हटाया भी जाए.
 
21 जनवरी को कांग्रेस विधायक दल के उपनेता राजेश कच्छप के साथ चार अन्य विधायक- नमन विक्सल कोंगारी, भूषण बाड़ा, सोनाराम सिंकू और सुरेश बैठा ने दिल्ली पहुंच कर पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव केसी वेणुगोपाल से मुलाकात की. नाराज विधायकों ने यहां अपनी शिकायत दर्ज कराई है.

इस मुलाकात का नेतृत्व कर रहे राजेश कच्छप का कहना है कि नाराज विधायक किसी नेता या मंत्री के बेटे होकर विधायक नहीं बने हैं और संगठन का दर्द बेहतर तरीके से समझते हैं. फिलहाल कृषि मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की और डॉ इरफान अंसारी ऐसे दो मंत्री हैं, जिनके पिता कांग्रेस की टिकट पर सांसद, विधायक रहे हैं. शिल्पी नेहा तिर्की के पिता बंधू तिर्की पार्टी के उपाध्यक्ष हैं और असम चुनाव के लिए पार्टी की ओर से ऑब्जर्बर भी बनाए गए हैं. वहीं इरफान अंसारी के पिता फुरकान अंसारी पुराने कांग्रेसी सांसद हैं. 

लगातार दो बार के विधायक राजेश कच्छप कहते हैं, "ये किसी एक मंत्री की बात नहीं है. चारों मंत्रियों की कार्यशैली संतोषजनक नहीं है. चारों की खास बात ये भी है कि ये कभी पार्टी के जमीनी कार्यकर्ता नहीं रहे सो उनका दुख-दर्द भी नहीं समझते. बीते एक साल के दौरान हमने तीसरी बार अपने शीर्ष नेतृत्व को इनके कार्यकलापों की जानकारी दी है.’’  

कच्छप दावा करते हैं कि कांग्रेस हाई कमान भी इन मंत्रियों से नाराज है. वे दावा करते हैं, "हमें भरोसा दिलाया गया है कि शिकायत पर गंभीरता से विचार किया जा रहा है.’’ 

आखिर मंत्रियों की कार्यशैली में क्या समस्या है? राजेश कहते हैं, "हम ये चाहते हैं कि सरकारी योजनाएं को धरातल पर उतारने के लिए कार्यकर्ताओं को साथ लिया जाए. उनके मार्फत चीजें जमीन पर उतरे ताकि जिनकी बदौलत हम विधायक बने हैं, ये मंत्री बने हैं, उन्हें महसूस हो कि वे भी सरकार का हिस्सा हैं, जनसेवा कर रहे हैं.’’ 

विधायकों ने यह भी कहा कि राज्य में कई बोर्ड निगम के पद भी खाली हैं, इन्हें भी भरा जाना चाहिए. विधायकों की बात सही भी है. क्योंकि इस वक्त राज्य महिला आयोग, सूचना आयोग, लोकायुक्त, खाद्य आयोग, मानवाधिकार आयोग के अलावा राज्य खनिज विकास निगम, माटी कला बोर्ड, झारखंड राज्य खादी बोर्ड, तेनुघाट विद्युत निगम लिमिटेड, झारखंड राज्य समाज कल्याण बोर्ड, झारखंड ट्राइबल डेवलपमेंट सोसाइटी,  झारखंड लिफ्ट इरिगेशन कॉरपोरेशन लिमिटेड, झारखंड रियल स्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी में अध्यक्ष का पद कई साल से खाली हैं.

शुरूआत से ही खटपट

यह कोई पहला मामला नहीं है, जब कांग्रेस विधायक और मंत्री आपस में इस तरह सीधे भिड़ने-लड़ने पर उतारू हो गए हों. शीतकालीन सत्र बीते 11 दिसंबर को खत्म हुआ है. इस दौरान भी कांग्रेस पार्टी के विधायकों ने अपने मंत्रियों के खिलाफ मोर्चा खोल दिया था. कांग्रेस विधायक दल के नेता प्रदीप यादव ने दुमका जिले के हंसडीहा अस्पताल में 25 करोड़ के सामान की चोरी का मामला उठाया था. जिस पर कांग्रेस कोटे के स्वास्थ्य मंत्री डॉ इरफान अंसारी ने कहा कि प्रदीप यादव ने सदन को दिग्भ्रमित किया है. जांच में केवल 60 लाख रुपए का सामान चोरी होने की बात सामने आई है.

यही नहीं, मंत्री ने स्पीकर से प्रदीप यादव के सवाल को कार्यवाही से हटाने का आग्रह किया और यादव पर सदन की गरिमा को ठेस पहुंचाने का आरोप लगाया. इसी बहस के दौरान मंत्री इरफान अंसारी ने प्रदीप यादव को प्रदीप जी कहकर संबोधित किया. तिस पर तमतमाते हुए प्रदीप यादव ने कहा, "मैं सदन में हूं और मुझे माननीय विधायक कहकर संबोधित किया जाए.’’ 

बीते 4 दिसंबर को कांग्रेस विधायक दल की एक बैठक हुई थी. तीन दिन बाद कथिततौर पर इस बैठक का एक ऑडियो लीक हो गया. इसमें कांग्रेसी विधायक ममता देवी ने आरोप लगाया था कि उन्होंने अपने क्षेत्र में एक नर्सिंग कॉलेज के लिए अनुमति मांगी थी और इसके लिए पांच लाख रुपए भी दिए थे. लेकिन काम नहीं हुआ. जवाब में इरफान अंसारी ने यहां भी आरोप को सिरे से खारिज कर दिया. उन्होंने कहा कि वे ऐसा 'गंदा' काम नहीं करते. कांग्रेस की इस सारी उठापटक पर प्रदेश अध्यक्ष केशव महतो कमलेश कहते हैं, "यह पार्टी का अंदरूनी मामला है. इस संबंध में जो भी फैसला लेना होगा, हमारा शीर्ष नेतृत्व ही लेगा.” हालांकि कांग्रेस में बढ़ रहा अंसतोष सिर्फ पांच विधायकों तक सीमित नहीं है. दो और विधायक दिल्ली जानेवाले थे, लेकिन किसी कारणवश नहीं जा सके.

कुल मिलाकर 16 विधायकों वाली झारखंड कांग्रेस में चार विधायक मंत्री हैं. बाकि बचे 12 विधायकों में सात सीधे तौर पर अपने इन चार मंत्रियों से नाराज दिख रहे हैं. हालांकि इस बात की संभावना है कि इनकी शिकायतों के आधार पर फिलहाल किसी का पद छीन लिया जाए यानी फिर किसी नए विधायक का भाग्य खुल सकता है. 

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